Petrol Diesel Price: क्या पेट्रोल-डीजल के भाव घटने वाले हैं? क्रूड की घटती कीमतों के बीच हरदीप पुरी का जवाब
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कमी संभव नहीं है। तेल विपणन कंपनियों को 2.18 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी और पश्चिम एशिया संकट के कारण 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की शोधन क्षमता 2030 तक बढ़ेगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा हालात में खुदरा ईंधन कीमतों को कम करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि वैश्विक कच्चे तेल बाजारों में बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं। पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 फीसदी और डीजल की कीमतों में 6.23 फीसदी की वृद्धि हुई है।
मंत्री ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) अब भी लगभग 2.18 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय घाटे की भरपाई कर रही हैं। इन कंपनियों के पास अब भी उच्च अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर खरीदा गया ईंधन भंडार मौजूद है। इससे खुदरा कीमतों में तत्काल कमी करना अव्यावहारिक हो जाता है।
पुरी ने कहा, "इसलिए, इस समय ईंधन कीमतों को कम करने का सवाल उचित नहीं है। अगर दो-तीन महीनों तक कच्चे तेल की कीमतें नरम रहती हैं तो हम इस बारे में सोचेंगे।" उन्होंने सरकार की ओर से वैश्विक ऊर्जा बाजार में व्यवधानों के प्रबंधन के बारे में भी बताया। भारत ने उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से उत्पन्न अधिकांश अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालिया तनाव के दौरान भी देश ने ईंधन की उपलब्धता में कोई व्यवधान नहीं आने दिया। मंत्री ने बताया कि भारत के लगभग 1.07 लाख ईंधन खुदरा बिक्री केंद्रों का नेटवर्क संकट के दौरान सामान्य रूप से संचालित होता रहा।
क्या तेल कंपनियों को नुकसान हुआ है?
हां, तेल विपणन कंपनियों को 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम बेचने के कारण 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। यह नुकसान पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बाद हुआ। पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अब कम हो गई हैं। हालांकि, कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं जिसे उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के चरम पर खरीदा था।
कीमतें कम क्यों नहीं हो सकतीं?
तेल कंपनियां आमतौर पर कच्चे तेल को कम से कम दो महीने पहले खरीदती हैं। इसलिए, वर्तमान में जिस कच्चे तेल का प्रसंस्करण हो रहा है, वह अनिवार्य रूप से अप्रैल या मई में खरीदा गया था। उस समय अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत अधिक थीं। पुरी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी का सवाल तब उचित होगा जब कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक कम बनी रहें। अमेरिकी और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के समझौते के बाद जून के दूसरे भाग में कच्चे तेल की कीमतें कम होना शुरू हुईं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या योजना है?
सरकार देश की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बना रही है। भारत की शोधन क्षमता 2030 तक बढ़कर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) होने का अनुमान है। कई रिफाइनरी विस्तार और ग्रीनफील्ड परियोजनाएं वर्तमान में कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनमें से कुछ अगले दो वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और शोधन क्षमताएं और बढ़ेंगी।