{"_id":"68dffb9d0b3421f9ce0af7bf","slug":"niti-aayog-suggestion-for-foreign-investors-tax-reform-will-increase-india-confidence-trust-2025-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Niti Ayog: विदेशों निवेशकों के लिए नीति आयोग का सुझाव, कहा- टैक्स सुधार से बढ़ेगा भारत का भरोसा","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Niti Ayog: विदेशों निवेशकों के लिए नीति आयोग का सुझाव, कहा- टैक्स सुधार से बढ़ेगा भारत का भरोसा
Fri, 03 Oct 2025 10:06 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 03 Oct 2025 10:06 PM IST
सार
भारत ने विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नीति आयोग ने सुझाव दिया कि विदेशी कंपनियों के लिए अनुमानित कराधान योजना लाई जाए। इससे विवादों में कमी आएगी और निवेशकों को स्पष्ट व स्थिर माहौल मिलेगा।
विज्ञापन
नीति का सुझाव।
विस्तार
भारत ने विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स व्यवस्था को और सरल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नीति आयोग ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि विदेशी कंपनियों के लिए अनुमानित कराधान योजना लागू की जाए। इस कदम का उद्देश्य निवेशकों को स्थिरता और स्पष्टता देना है ताकि भारत की ओर वैश्विक पूंजी का प्रवाह और तेज हो सके।
नीति आयोग के कार्यपत्र में कहा गया कि यह वैकल्पिक योजना विदेशी कंपनियों को टैक्स विवादों से राहत देगी। इसमें स्थायी प्रतिष्ठान से जुड़े मामलों को आसान बनाया जाएगा और अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी। यह योजना न केवल निवेशकों को भरोसा दिलाएगी बल्कि सरकार के राजस्व की सुरक्षा भी करेगी। आयोग ने कहा कि यह समाधान भारत के कराधान अधिकार और निवेशकों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाएगा।
निवेश में अड़चन और सुधार
कार्यपत्र में बताया गया कि भारत में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है लेकिन अस्पष्ट नियम और विवाद निवेशकों को असहज करते हैं। विशेषकर पीई रेगुलेशन की अस्पष्टता के कारण कई बार निवेशक असमंजस में रहते हैं। आयोग का मानना है कि अगर अनुमानित कराधान व्यवस्था लागू हो जाती है तो भारत की टैक्स व्यवस्था एक 'माइनफील्ड' से बदलकर 'रोशनी से भरे रास्ते' में बदल जाएगी, जिससे भारत की ग्लोबल बिजनेस इंडेक्स रैंकिंग में सुधार होगा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 11 बच्चों की मौत से हड़कंप, MP सरकार जांच में उलझी तो राजस्थान के मंत्री ने माताओं को बताया दोषी
कैसे काम करेगी योजना?
इस स्कीम के तहत विदेशी कंपनियां तय दर पर अपनी आय घोषित कर सकती हैं। इसके बदले उन्हें अलग से बहीखाते और ऑडिट की झंझट से छुटकारा मिलेगा। हालांकि अगर किसी कंपनी का वास्तविक लाभ तय दर से कम होता है तो उसे नियमित रिटर्न दाखिल करने की छूट भी दी जाएगी। आयोग ने सुझाव दिया है कि अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग-अलग लाभ दर तय होनी चाहिए।
विवादों और मुकदमों से राहत
नीति आयोग ने कहा कि टैक्स अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे नियमों को एकरूपता से लागू करें, खासकर डिजिटल और सीमा-पार मामलों में। इससे व्यक्तिपरकता घटेगी और विदेशी निवेशकों को स्थिरता मिलेगी। आयोग का सुझाव है कि एक बार कोई कंपनी इस योजना के तहत आती है तो उस पर स्थायी प्रतिष्ठान (पीई) को लेकर अलग से मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। इससे निवेशकों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।
ये भी पढ़े- भारत और S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने की बना रहा योजना; पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बन सकती है बात
स्थिरता से निवेश को बढ़ावा
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर. सुब्रह्मण्यम ने कहा, “निवेश और विकास के लिए स्थिर और पूर्वानुमान योग्य टैक्स व्यवस्था जरूरी है। अनिश्चितता निवेशकों और कारोबार दोनों के लिए हानिकारक है।” उन्होंने बताया कि भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनने का है और इसके लिए निवेश आकर्षित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आर्थिक सुधार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और यह योजना उसी दिशा में बड़ा कदम होगी।
विज्ञापन
नीति आयोग के कार्यपत्र में कहा गया कि यह वैकल्पिक योजना विदेशी कंपनियों को टैक्स विवादों से राहत देगी। इसमें स्थायी प्रतिष्ठान से जुड़े मामलों को आसान बनाया जाएगा और अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी। यह योजना न केवल निवेशकों को भरोसा दिलाएगी बल्कि सरकार के राजस्व की सुरक्षा भी करेगी। आयोग ने कहा कि यह समाधान भारत के कराधान अधिकार और निवेशकों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाएगा।
विज्ञापन
निवेश में अड़चन और सुधार
कार्यपत्र में बताया गया कि भारत में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है लेकिन अस्पष्ट नियम और विवाद निवेशकों को असहज करते हैं। विशेषकर पीई रेगुलेशन की अस्पष्टता के कारण कई बार निवेशक असमंजस में रहते हैं। आयोग का मानना है कि अगर अनुमानित कराधान व्यवस्था लागू हो जाती है तो भारत की टैक्स व्यवस्था एक 'माइनफील्ड' से बदलकर 'रोशनी से भरे रास्ते' में बदल जाएगी, जिससे भारत की ग्लोबल बिजनेस इंडेक्स रैंकिंग में सुधार होगा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 11 बच्चों की मौत से हड़कंप, MP सरकार जांच में उलझी तो राजस्थान के मंत्री ने माताओं को बताया दोषी
कैसे काम करेगी योजना?
इस स्कीम के तहत विदेशी कंपनियां तय दर पर अपनी आय घोषित कर सकती हैं। इसके बदले उन्हें अलग से बहीखाते और ऑडिट की झंझट से छुटकारा मिलेगा। हालांकि अगर किसी कंपनी का वास्तविक लाभ तय दर से कम होता है तो उसे नियमित रिटर्न दाखिल करने की छूट भी दी जाएगी। आयोग ने सुझाव दिया है कि अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग-अलग लाभ दर तय होनी चाहिए।
विवादों और मुकदमों से राहत
नीति आयोग ने कहा कि टैक्स अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे नियमों को एकरूपता से लागू करें, खासकर डिजिटल और सीमा-पार मामलों में। इससे व्यक्तिपरकता घटेगी और विदेशी निवेशकों को स्थिरता मिलेगी। आयोग का सुझाव है कि एक बार कोई कंपनी इस योजना के तहत आती है तो उस पर स्थायी प्रतिष्ठान (पीई) को लेकर अलग से मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। इससे निवेशकों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।
ये भी पढ़े- भारत और S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने की बना रहा योजना; पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बन सकती है बात
स्थिरता से निवेश को बढ़ावा
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर. सुब्रह्मण्यम ने कहा, “निवेश और विकास के लिए स्थिर और पूर्वानुमान योग्य टैक्स व्यवस्था जरूरी है। अनिश्चितता निवेशकों और कारोबार दोनों के लिए हानिकारक है।” उन्होंने बताया कि भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनने का है और इसके लिए निवेश आकर्षित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आर्थिक सुधार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और यह योजना उसी दिशा में बड़ा कदम होगी।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन