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Dharavi: पुनर्विकास कार्य अदाणी को सौंपने के मामले में महाराष्ट्र सरकार का हलफनामा, कहा- नहीं हुई गड़बड़ी

Wed, 30 Aug 2023 09:05 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 30 Aug 2023 09:05 PM IST
सार

Dharavi Redevelopment Plan: सरकार ने इस महीने की शुरुआत में यूएई स्थित कंपनी सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरशन की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में अपना हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को परियोजना सौंपने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।

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New tender process for Dharavi slum redevelopment transparent, no undue favour to Adani Group: Maha govt to HC
धारावी जीर्णोद्धार परियोजना - फोटो : amarujala.com

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया है कि मुंबई में धारावी झुग्गी पुनर्विकास परियोजना के लिए 2022 में जारी की गई नई निविदा पारदर्शी थी और सबसे ऊंची बोली लगाने वाले अदाणी समूह को कोई अनुचित लाभ नहीं दिया गया।

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सरकार ने इस महीने की शुरुआत में यूएई स्थित कंपनी सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरशन की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में अपना हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को परियोजना सौंपने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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हलफनामे में कहा गया है, "याचिकाकर्ता ने निराधार और लापरवाह आरोप लगाए हैं जैसे कि उत्तरदाताओं के कार्यों को बिना किसी आधार या सामग्री के राजनीति से प्रेरित होना क्योंकि वास्तव में कोई भी मौजूद नहीं है। अकेले इस तरह के लापरवाह आरोप लगाने के लिए, रिट याचिका को लागत के साथ खारिज कर दिया जाना चाहिए।"
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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ 31 अगस्त को याचिका पर सुनवाई करेगी। राज्य आवास विभाग के उप सचिव की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि याचिकाकर्ता कंपनी ने "झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं कि पुरानी निविदा को रद्द करना राजनीति से प्रेरित था" और इन आरोपों का खंडन जाता है।

उन्होंने कहा, 'मैं कहता हूं कि उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद निविदा प्रक्रिया रद्द की गई है। मैं इस बात से भी इनकार करता हूं कि नई निविदा प्रतिवादी संख्या 3 (अदाणी समूह) के पक्ष में जारी की गई थी। मैं कहता हूं कि नई निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई थी और वास्तव में नई निविदा ने पुरानी निविदा में भाग लेने वालों की तुलना में अधिक बोलीदाताओं को आकर्षित किया।


सरकार ने कहा कि सचिवों की समिति और मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त करने के बाद नई निविदा संशोधित नियमों और शर्तों के साथ वास्तविक तरीके से और तर्कसंगत आधार पर जारी की गई थी। पीठ ने कहा, ''किसी की भागीदारी को बाहर रखने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि बोली नए सिरे से जमा करने की जरूरत थी और याचिकाकर्ता भी नयी निविदा के नियमों और शर्तों का पालन करते हुए बोली जमा कर सकता था।"

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