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एच-1बी वीजा के नए नियम भारतीय आईटी उद्योग के लिए संकट, 5 लाख पेशेवरों पर होगा असर 

Tue, 04 Dec 2018 04:32 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Dec 2018 04:32 AM IST
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New h1b visa proposal expected to negative impact on Indian IT Industry
एच1बी वीजा

एच-1बी वीजा पर अमेरिका के नए नियम इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग के लिए संकट खड़ा कर सकते हैं। इस वीजा पर अमेरिका ने इस साल न सिर्फ संख्या में कटौती की है, बल्कि नियमों को भी कड़ा कर दिया है। आव्रजन नीति में बदलाव के कारण अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले पांच लाख भारतीय अपने भविष्य को लेकर आशंकाओं में घिर गए हैं।

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देश के आईटी क्षेत्र के संगठन नैस्कॉम के मुताबिक नए वीजा नियमों से सिर्फ भारतीय हुनरमंदों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी आईटी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। भारतीय कंपनियों में डेढ़ लाख लोग फिलहाल देश से बाहर नौकरी कर रहे हैं और वीजा की संख्या घटने से इन कंपनियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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घटेगी संख्या, महंगा होगा वीजा

नैस्कॉम ने कंपनियों के अच्छे कर्मचारियों को वीजा देने की राय जाहिर करते हुए कहा है कि फिलहाल वह वीजा नियमों पर अध्ययन कर रहा है। अध्ययन के बाद वह इस मामले में अपना स्पष्ट पक्ष रखेगा। अमेरिका के एच1बी वीजा पर नए नियमों के चलते अगले साल से सिर्फ 65 हजार वीजा ही मिलेंगे, जिनकी संख्या पहले 85 हजार हुआ करती थी। ऐसे में आईटी पेशेवरों के लिए वीजा लेने में कंपनियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना होगा। इसके साथ ही वीजा लेना महंगा भी होगा। उल्लेखनीय है कि नए नियमों में अमेरिका के डिग्री धारकों को प्राथमिकता देना तय किया गया है।

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किस्मत से मिलेगा वीजा

नए वीजा नियमों के तहत अप्रैल, 2019 से एच1बी वीजा मुहैया कराने की प्रक्रिया लॉटरी के जरिए होगी। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा मिलना किस्मत का भी खेल होगा। एच1बी वीजा अस्वीकार करने की दर मौजूदा समय 65 फीसदी तक बढ़ी है, जिसमें नए नियमों के बाद और बढ़ोतरी होगी। 

गौरतलब है कि ट्रंप सरकार ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत एच-1बी वीचा चाहने वाली कंपनियों को पहले से अपनी अर्जी इलेक्ट्रॉनिक रूप में पंजीकृत करने की जरूरत होगी। हालांकि इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि यह लोकप्रिय वीजा सिर्फ अत्यधिक कुशल और ऊंची पगार वाले विदेशी श्रमिकों को ही मिले। 

अमेरिका की शीर्ष कंपनियों ने हालांकि ट्रंप सरकार को चेताया है कि एच-1बी वीजा के नए नियमों से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। कई कंपनियों के सीईओ ने ट्रंप सरकार को पत्र भेजा है। इस पत्र में एपल के सीईओ टिम कुक, जेपीमोर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन, कोका कोला के जेम्स क्वीनी और आईबीएम के गिनी रोमेटी समेत 59 शीर्ष कंपनियों के सीईओ ने हस्ताक्षर किए हैं।

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