Navratri: नवरात्रि पर बाजारों में तेजी, लेकिन इस्राइल-ईरान संकट से कारोबारियों की चिंता बढ़ी
Navratri: दीपावली आने के कारण गृह निर्माण से संबंधित वस्तुओं और तैयार घरों-फ्लैटों की बिक्री में भी तेजी बने रहने का अनुमान है। रीयल स्टेट सेक्टर में तेजी इस बात का सबूत है कि बाजार में निवेश के लिए अब भी निवेशक सबसे सुरक्षित माध्यम इसी को मान रहे हैं।
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नवरात्रि के साथ ही भारत में त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। नवरात्रि के बाद दशहरा, दीपावली, भैया दूज जैसे बड़े त्योहार होने के कारण बाजार में सोना, वाहनों, कपड़ों, दैनिक उपभोग यानी एफएमसीजी वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीदारी में लगातार तेजी बने रहने का अनुमान है। इससे पूरी अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी। लेकिन इसी बीच इस्रा-ईरान के बीच युद्ध तेज होने की आशंका से बाजार सहम गया है। तीन अक्तूबर के करोबारी सत्र के दौरान घरेलू शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स करीब 1800 अंक टूट गया। इससे निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये का चूना लगा।
आने वाले समय में यदि इस्राइल-ईरान संकट और ज्यादा गहराया तो इससे पूरे बाजार में अफरातफरी मच सकती है। इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ेगा। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इस संकट से पहले, पिछले काफी समय से भारतीय बाजार लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी बनी हुई है। जिस तरह केंद्र-राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही हैं, उन पर टैक्स छूट देकर उनकी बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, दीपावली आने के कारण गृह निर्माण से संबंधित वस्तुओं और तैयार घरों-फ्लैटों की बिक्री में भी तेजी बने रहने का अनुमान है। रीयल स्टेट सेक्टर में तेजी इस बात का सबूत है कि बाजार में निवेश के लिए अब भी निवेशक सबसे सुरक्षित माध्यम इसी को मान रहे हैं। लेकिन घरों की असली आवश्यकता वाले ग्राहकों के लिए भी इसमें तेजी बने रहने का अनुमान है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मंदी का खतरा
यदि इजरायल-ईरान का संकट बढ़ता है तो इसका सीधा असर क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों पर पडे़गा। अभी ही शुरुआत के तीन दिनों के अंदर क्रूड ऑयल की कीमतों में चार प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है। भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 40 फीसदी तेल रूस से और लगभग 20 प्रतिशत तेल ईराक से खरीदता है, इसलिए संकट बढ़ने के बाद भी भारत की कुल तेल आपूर्ति के बहुत अधिक प्रभावित होने की आशंका नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी होने पर इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा और भारत में भी तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर महंगाई के रूप में सामने आएगा। महंगे पेट्रोल-डीजल के कारण सामान्य वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि हो सकती है। इससे त्योहारी सीजन के कारण बाजार की उम्मींदों में जो पंख लग रहे हैं, उसे महंगाई का करंट लग सकता है। मंदी से उबरती दुनिया के लिए यह खबर किसी भी दृष्टि से सही नहीं होगी।