58 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी एयर इंडिया लेगी 2400 करोड़ का उधार
- एनएसएसएफ से उधारी के लिए सरकार से मांगी अनुमति
- 58 हजार करोड़ का कुल कर्ज हो गया है सरकारी विमानन कंपनी पर
- 0.5 फीसदी सस्ता पड़ेगा एनएसएसएफ का कर्ज बैंकों की तुलना में
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लगातार विनिवेश की कोशिश में नाकाम एकमात्र सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया अपना खर्च चलाने को 2,400 करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है। कंपनी के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) से कर्ज लेने के लिए सरकार से अनुमति मांगी है।
नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला के साथ पिछले दिनों बैठक में एयर इंडिया के शीर्ष अधिकारियों ने संचालन खर्च पूरा करने के लिए नया फंड देने की सिफारिश की थी।
कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि यह नई जरूरत पिछली मदद से पूरी तरह अलग है, जिसके लिए सरकार से अनुमति मांगी है। अगर सरकार की ओर से यह अनुमति गारंटी के रूप में मिलती है तो बैंकों से कर्ज लिया जाएगा, जबकि लोन के रूप में मदद मिलने पर इसका ब्याज सीधे सरकार को चुकाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एनएसएसएफ से कर्ज लेना सरकार से उधारी की तरह होता है, जो वाणिज्यिक बैंकों की अपेक्षा 0.5 फीसदी सस्ता पड़ता है। इस कर्ज से कंपनी के विनिवेश पर असर पड़ने के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक आगे बढ़ेगी। जल्द ही कंपनी की बिक्री के लिए रुचि पत्र सार्वजनिक होंगे।
रोक दी है विस्तार योजना
एयर इंडिया अधिकारी ने बताया कि रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया को तेज करने के लिए फिलहाल कंपनी की विस्तार योजनाओं को रोक दिया गया है। इस दौरान न तो कोई नया एयरक्राफ्ट लीज पर लिया जाएगा और न ही कंपनी के नेटवर्क में विस्तार पर काम होगा। हालांकि, एयर इंडिया जमीन पर खड़े अपने कुछ एयरक्राफ्ट को वापस उड़ान के लिए तैयार कर सकता है।