फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Narendra Modi can win elections of 2024 again if he take these steps for economy

अगर अर्थव्यवस्था के लिए उठाए ये कदम तो 2024 में फिर आ सकती है मोदी सरकार

Tue, 28 May 2019 12:32 PM IST
‌डिंपल अलवधी बीबीसी, अमर उजाला
बीबीसी, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Tue, 28 May 2019 12:32 PM IST
विज्ञापन
Narendra Modi can win elections of 2024 again if he take these steps for economy

ऐतिहासिक बहुमत के साथ दूसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी की वापसी की खबर के साथ ही रुपये की हालत में सुधार हुआ है और साथ ही शेयर बाजार में भी रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया गया है। नरेंद्र मोदी को मिला ये बड़ा जनादेश एक और मौका है जब वो सुधार से जुड़े अपने वादों को हकीकत में बदल सकते हैं।

विज्ञापन


लोकतंत्र में मिली इस बड़ी जीत का असर जब कम होगा तब नरेंद्र मोदी के सामने अर्थव्यवस्था से जुड़ी कठिन चुनौतियां सामने आएंगी।

अपनी सरकार में मोदी ने क्या किया?

जब मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री 2014 में कार्यभार संभाला तो अर्थव्यवस्था एक मिलीजुली स्थिति में थी। उन्होंने अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ कड़े कदम उठाए, जैसे नया बैंकरप्सी कानून लाया ताकि बढ़ते एनपीए की समस्या से निपटा जा सके।

विज्ञापन


मोदी सरकार ने रेड टेप घटाया जिसकी मदद से भारत विश्व बैंक की व्यापार करने की सहूलियत वाली सूची में 77वें पायदान पर पहुंच सका, जो साल 2014 में 134वें स्थान पर था।
विज्ञापन
विज्ञापन


नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में ही भारत तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना।

लेकिन सबसे बड़ी आलोचना की शिकार नोटबंदी हुई। साल 2016 में कालेधन से निपटने के इरादे से देश की तीन-चौथाई मुद्रा को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। इससे देश की अर्थव्यवस्था को धक्का लगा। नए नोट बाज़ार में उपलब्ध नहीं थे और पुराने नोटों के वापस ले लिया गया। इससे तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था की गति बेहद धीमी हो गई। देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ी।

इसके बाद भारत की नई टैक्स नीति जीएसटी लाई गई और वह भी धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ी। लंबे समय में जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही कदम मानी गई, जिसके अंतर्गत देश में लगने वाले तमाम करों को एक टैक्स में लाया गया। लेकिन फौरी तौर पर जीएसटी का छोटे-मझोले व्यापारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

Narendra Modi can win elections of 2024 again if he take these steps for economy

मोदी सरकार से उम्मीदें

नरेंद्र मोदी 30 मई को दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। मोदी के पहले कार्यकाल में आर्थिक सलाहकार परिषद का हिस्सा रहे अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला मानते हैं कि बड़ा बहुमत मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर निर्भीक और मजबूत फैसले लेने में मदद करेगा।

वह कहते हैं, ''ये जनादेश देख कर हम उम्मीद कर सके हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी साहसिक कदम उठा सकते हैं।''

लेकिन सवाल ये कि क्या ये जनादेश भारत के सामने खड़ी परेशानियों जितना ही बड़ा है?

तीन महीनों में दिसंबर 2018 तक आर्थिक वृद्धि दर धीमी होकर 6.6 फीसदी रह गई। ये छह तिमाहियों की सबसे धीमी दर रही।

एनएसएसओ के एक कथित लीक डेटा के मुताबिक देश में बेरोज़गारी पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा रही। हालांकि सरकार इस रिपोर्ट से इनकार करती रही लेकिन उसने रोजगार से जुड़े कोई पुख्ता आंकड़े पेश नहीं किए।

रोजगार के लिए क्या करेंगे मोदी?

जानकारों का कहना है कि मोदी को रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए कई क्षेत्रों में निजी निवेश को हरी झंडी देनी होगी।

सरकार की बहुचर्चित मेक इन इंडिया योजना के लिए कहा गया कि ये नौकरियों के सृजन में बढ़ोतरी करेगी लेकिन इसका कोई खास नतीजा सामने नहीं नजर आता।

आदित्या बिड़ला ग्रुप के प्रमुख अर्थशास्त्री अजीत रानाडे का मानना है कि विदेशी बाजारों पर फोकस करके रोजगार के बेहतर अवसर लाए जा सकते हैं।

''निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग की प्रक्रिया रुक सी गई है। जब तक निर्यात नहीं बढ़ेगा तब तक मैन्युफैक्चरिंग भी नहीं बढ़ेगा। नई सरकार को निर्माण, पर्यटन, टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।''

Narendra Modi can win elections of 2024 again if he take these steps for economy

क्या मोदी अर्थव्यवस्था की गति बढ़ा सकते हैं?

चीन से अलग, पिछले 15 सालों से भारत की आर्थिक वृद्धि में सबसे बड़ी भूमिका घरेलू खपत की रहती है। लेकिन पिछले कुछ महीने के आंकड़े बताते हैं कि ये इस खपत की गति कम हुई है।

कारों-एसयूवी की बिक्री पिछले सात सालों के सबसे निम्न पायदान पर पहुंच गई है। ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, स्कूटर की बिक्री में भी कमी हुई है। बैंक से कर्ज लेने की मांग भी तेज़ी से बढ़ी है। हालिया तिमाहियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर की आय वृद्धि में भी कमी आई है। इन तथ्यों को देखते हुए ये समझा जा सकता है कि उपभोक्ता की खरीदने की क्षमता में कमी आई है।

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया कि वह मध्यम आय वाले परिवारों के हाथों में अधिक नकदी और अधिक क्रय शक्ति सुनिश्चित करने के लिए आय करों में कटौती करेगी।

हालांकि, सरकार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह तुरंत संभव नहीं हो सकता है। भारत का वित्तीय घाटा 3.4 फीसदी पर है। यानी सरकारी व्यय और राजस्व के बीच का अंतर 3.4 फीसदी है। ये आंकड़े मोदी के इस वादे की राह में रोड़ा साबित हो सकते हैं।

रानाडे मानते हैं कि भारत का बढ़ता वित्तीय घाटा देश की अर्थव्यवस्था के लिए मीठा जहर साबित हो सकता है।

क्या किसानों की परेशानी दूर होगी?

भारत में बढ़ता कृषि संकट नरेंद्र मोदी के लिए उनके पहले कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा। देश भर के किसान दिल्ली-मुंबई सहित देश के कई हिस्सों में सड़कों पर अपनी फसल के उचित दाम की मांग के साथ उतरे।

भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार रह चुकीं इला पटनायक कहती हैं कि छोटे किसानों को अधिक समर्थन देने का वादा किया गया है, लेकिन बाजार के काम करने के तरीके में संरचनात्मक परिवर्तन करके ही ये संभव किया जा सकता है।

वह कहती हैं, ''एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां किसान अपनी फसलों को राज्य सरकारों की एजेंसियों को सीधे एक तय दाम पर बेच सकें।''

''हमें किसानों को स्वतंत्र माहौल देने की आवश्यकता है ताकि वे जिसे चाहें उन्हें उत्पाद बेच सकें। यह उन्हें ऊंचे मूल्य वाले फ़सलों के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।''

क्या मोदी निजीकरण को बढ़ावा देंगे

उनके चुनावी वादों में से एक था कि वह रेलवे, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.44 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगे। लेकिन इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी? जानकार मानते हैं कि मोदी इसके लिए निजीकरण की राह अपना सकते हैं।

मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में सरकारी उद्यमों को बेचने के अपने वादों पर धीमी गति से काम किया है। एयर इंडिया लंबे वक्त से कर्ज में डूबी है। सरकार ने इसके शेयर बेचने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन कोई खरीददार नहीं मिला और एयर इंडिया नहीं बिक सकी।

भल्ला मानते हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी निजीकरण को तेजी से अपनाएंगे।

वह कहते हैं, ''आने वाले दो साल सरकार के लिए सबसे बेहतर हैं जिसमें वो तेजी से निजीकरण अपना सकते हैं।''

''भारत की नई, सहासिक और निर्भीक नीतियां विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए लुभा सकती हैं। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में बताया है कि वह कड़े फैसले लेने में सक्षम हैं।''

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed