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Lilavati Hospital Scam: क्या है मुंबई के लीलावती अस्पताल का घोटाला? जानिए गबन और काले जादू की पूरी कहानी

Thu, 13 Mar 2025 05:00 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Thu, 13 Mar 2025 05:00 PM IST
सार

Lilavati Hospital Scam: मुंबई स्थित प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल में 1,500 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। अस्पताल का संचालन करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट ने पूर्व ट्रस्टियों और उनसे जुड़े लोगों पर घोटाले का आरोप लगाया है। बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें वित्तीय हेराफेरी के साथ काले जादू को लेकर भी शिकायत दर्ज हुई है। क्या है पूरा मामला? कैसे चल रहा था पूरा खेल, आइए जानते हैं।

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Mumbai's Lilavati Hospital scam, power struggle among trustees, fraud, embezzlement and even black magic
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : adobe stock

विस्तार

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी ही नहीं है, यहां इलाज के लिए भी देश भर से लोग आते हैं। देश के बड़े अस्पताल और हेल्थ केयर इन्फ्रास्टक्चर के मामले में भी मुंबई को अच्छा नाम माना जाता है। लेकिन हाल ही में मुंबई का जानामाना अस्पताल लीलावती में घोटाले का मामला सामने आया तो न केवल संगठन की साख को प्रभावित कर रहा है, वहीं इसके संचालन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 

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लीलावती अस्पताल में कितने रुपये का घोटाला?

मुंबई स्थित प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल में 1,500 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। अस्पताल का संचालन करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट ने पूर्व ट्रस्टियों और उनसे जुड़े लोगों पर घोटाले का आरोप लगाया है। बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। पूर्व ट्रस्टियों में ज्यादातर अनिवासी भारतीय हैं और दुबई व बेल्जियम के निवासी हैं। लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (एलकेएमएमटी) ने इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बांद्रा पुलिस स्टेशन में तीन अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई है।

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शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अस्पताल परिसर में पूर्व ट्रस्टियों और संबंधित व्यक्तियों की ओर से काला जादू भी किया गया। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि लीलावती अस्पताल के वित्तीय रिकॉर्ड के फोरेंसिक ऑडिट के दौरान उजागर हुई इस हेराफेरी ने ट्रस्ट के संचालन और अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है।  

ऑडिट में क्या गड़बड़ी सामने आई?

एलकेएमएमटी के स्थायी ट्रस्टी प्रशांत मेहता से अमर उजाला डॉटकॉम द्वारा संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि जो भी जानकारी हमारी तरफ से दी गई है वो हमारे द्वारा ऑडिट किए जाने पर मिली है, जिस पर कार्यवाही की जा रही है। उनका कहना है कि हम लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जो भी घोटाला सामने आया है वह वह हमारे लिए ही नहीं मरीजों के साथ भी विश्वासघात है। उन्होंने पीटीआई से बताया कि पूर्व ट्रस्टियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तीन से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन व्यक्तियों के खिलाफ चौथी कार्यवाही अब मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है, जो काले जादू और गुप्त प्रथाओं के लिए बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज हमारी शिकायत पर आधारित है। मेहता ने बताया है कि अस्पताल के परिसर में मानव बाल मिले हैं और सात खोपड़ी वाले सात से ज्यादा कलश भी मिले हैं। इसके लिए महाराष्ट्र एंटी ब्लैक मैजिक एक्ट के तह मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

ट्रस्ट ने जालसाजी और फंड की हेराफेरी के खिलाफ तीन शिकायते बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज की है। पहली शिकायत 11.52 करोड़ रुपये की जालसाजी और दुरुपयोग के लिए है जसमें मेफेयर रियल्टर्स और वेस्टा इंडिया में निवेश किया गया था, दूसरी शिकायत 44 करोड़ रुपये की कानूनी फीस के रूप मे ठगी के लिए दर्ज की गई है। इसमे आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने लीलावती अस्पताल के तीन पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ दर्ज 85 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले की जांच शुरू की है और तीसरी शिकायत 14 पूर्व ट्रस्टियों और 3 निजी कंपनियों पर आरोप है कि बीते 20 सालों में मेडिकल उपकरणों की अवैध तरह से खरीदारी पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का आरोप है।

इसके अलावा पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा 500 करोड् रुपये की कर मांग के दावों की कार्यवाही भी शामिल है साथ ही गुजरात के एक वॉल्ट से 59 करोड़ रुपये के मूल्य के आभूषणों और कीमती वस्तुओं की चोरी का मामला भी जांच के दायरे में है। वहीं चौथी कार्यवाही जो कि मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है, जो कि काले जादू और गुप्त प्रथाओं के लिए बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज हमारी शिकायत पर आधारित है।

क्या है सता संघर्ष और जालसाजी की कहानी?

बताया जा रहा है कि लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के संस्थापक किशोरी मेहता 2002 से बीमार चल रहे थे और इलाज के लिए विदेश चले गए थे। इस बीच उनके भाई विजय मेहता ने ट्रस्ट के कुछ समय के लिए संभाल लिया, आरोप है कि विजय मेहता ने दस्तावेजों की जालसाजी करके अपने बेटे और भतीजों को ट्रस्टी बना दिया और किशेशरी मक मेहता को स्थाी ट्रस्टी के पद से हटा दिया। यह मामला 2016 तक चला और जब किशोरी मेहता ने अपनी स्थिति दोबार प्राप्त करनके लिए उसके बाद 2024 में उनका निधन हो गया और अब उनके बेटे प्रशात महेता स्थायी ट्रस्टी बने हैं और उन्हें वित्तीय अनियमितताओं का पता ल है और उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज की है। लीलावती अस्पताल का निर्माण 1997 में मुंबई करवाया गया था।

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क्या है घोटाले का विदेशी लिंक?

वर्तमान ट्रस्टियों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल से जुड़ी खरीद फरोक में बड़े स्तर पर धांधली करके फंड को अवैध रूप से डायर्वट किया गया। जिन ट्रस्टियों पर आरोप लगा है वे दुबई और बेल्जियम में हैं। एक बयान में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और एलकेएमएम के मौजूदा कार्यकारी निदेशक परमबीर सिंह ने कहा है कि पूर्व ट्रस्टियों ने ट्रस्ट फंड में भारी मात्रा में धनराशि का गबन किया है और यह घोटाला सैकड़ों करोड़ रुपये का हो सकता है। 

क्या है जानकारों की राय?

विशेषज्ञ व सीए फर्म के वरिष्ठ सीए रमेश प्रभु बताते हैं ट्रस्टी की ओर से चलाई जा रही संस्थाओं में इस तरह की अनिमियतता अब सामाने आने लगी हैं। ट्रस्टी संस्थाओं पर अपना एकाधिकार समझने लगे हैं और अपने फायदे के लिए इसका उपयोग करने लगे हैं। ऐसा नहीं है कि सभी ट्रस्ट ऐसे है देश में बड़े स्तर ट्रस्ट से जुड़ी संस्थाएं और कंपनियां काफी सराहनीय काम कर रही हैं। वहीं बात करें काला जादू की तो यह वित्तीय घोटाले में बिल्कुल नया है, क्योंकि इस तरह के अपराध दूसरी जगहों पर देखे जाते रहे हैं।

अस्पताल में काला जादू यह गंभीर प्रश्न है, इसकी जांच तुंरन होनी चाहिए, क्योंकि यहां सैकड़ों लोगों का इलाज होता है। कॉपोरेट मामलों के जानकार प्रशांत चिनमय कहते हैं पिछले कुछ समय से घोटाले सामने आने लगे हैं जिसमें मुंबई में जनवरी में टॉरेस पोंजी घोटाला, न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला जिसमें निवेशकों को करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह मेडिकल क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है जो बडी वित्तीय धोखाधड़ी का उदाहरण है।

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