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Mukesh Ambani: मुकेश अंबानी ने आईसीटी को दान किए 151 करोड़; 1970 के दशक में यहीं से की थी स्नातक की पढ़ाई

Sat, 07 Jun 2025 09:25 AM IST
अभिषेक दीक्षित बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 07 Jun 2025 09:25 AM IST
सार

मुकेश अंबानी ने मुंबई में इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहीं से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक किया था। उन्होंने प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी 'डिवाइन साइंटिस्ट' के प्रकाशन के अवसर पर आयोजित एक समारोह में भाग लिया।

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Reliance Industries Chairman and Managing Director Mukesh Ambani Donates 151 Crore Rupees to ICT Mumbai
मुकेश अंबानी - फोटो : ANI

विस्तार

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई को 151 करोड़ रुपये का बिना शर्त अनुदान देने की घोषणा की। यहीं से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक की पढ़ाई की थी। आईसीटी के वरिष्ठ और सम्मानित प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी 'डिवाइन साइंटिस्ट' के विमोचन समारोह में मुकेश अंबानी ने कहा कि प्रोफेसर शर्मा और जेबी जोशी मेरे प्रोफेसर थे। अन्य संस्कृतियों में गुरु केवल शिक्षक होता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में 'गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं'...'

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मुकेश अंबानी ने कहा, '70 के दशक के मध्य में जब मैं एक छात्र के रूप में यहां आया था, तब यह इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी नहीं था, यह यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी था। मैंने जानबूझकर IIT बॉम्बे की जगह UDCT को चुना था। आज भी मुझे प्रोफेसर शर्मा का पहला व्याख्यान याद है और उन्हें सुनने के बाद मुझे विश्वास हो गया कि मैंने सही चुनाव किया है।
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धीरूभाई अंबानी का जिक्र किया
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, 'मेरे पिता धीरूभाई अंबानी की तरह प्रोफेसर एमएम शर्मा में भारतीय उद्योग को अभाव से वैश्विक नेतृत्व में बदलने की तीव्र इच्छा थी। मैं उनके और मेरे पिता के बीच हुई सभी बैठकों में मौजूद था। इन दो साहसी दूरदर्शी लोगों का मानना था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, निजी उद्यमिता के साथ गठबंधन करके समृद्धि के द्वार खोले जा सकते हैं। वे दोनों इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारत के लिए बड़ा सोचने और विश्व स्तरीय विनिर्माण सुविधा बनाने का समय आ गया है।

 

'प्रतिभाशाली छात्रों और संकायों को वापस आकर्षित करने का सबसे अच्छा अवसर'
उन्होंने कहा कि हमें भारत को एक डीप टेक राष्ट्र बनाना चाहिए। एआई और अन्य सफल तकनीकों का उपयोग करके हमें अपने देश को उन्नत विनिर्माण में वैश्विक नेता बनाना चाहिए। हमारे विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विशेष रूप से उन पर जैसे- प्रोटीन, एंजाइम और रसायन विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में, जो जटिल बीमारियों का इलाज कर सकते हैं, मानव जीवन को लम्बा कर सकते हैं और नई सामग्री बना सकते हैं, पर्यावरण को साफ कर सकते हैं। आज जब कई विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय संकट का सामना कर रहे हैं। भारत के पास दुनिया भर से सबसे प्रतिभाशाली छात्रों और संकायों को वापस आकर्षित करने का सबसे अच्छा अवसर है।

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