{"_id":"60dae8ecbf4504270c4e5338","slug":"msme-sector-expectations-before-festivals-but-uncertainity-due-to-covid-third-wave","type":"story","status":"publish","title_hn":"MSME: कर्ज से त्योहारों के पहले उद्योग जगत में बंधी उम्मीद, तीसरी लहर की अनिश्चितता से व्यापारियों में डर","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
MSME: कर्ज से त्योहारों के पहले उद्योग जगत में बंधी उम्मीद, तीसरी लहर की अनिश्चितता से व्यापारियों में डर
Tue, 29 Jun 2021 03:03 PM IST
डिंपल अलावाधी
अमित शर्मा
अमित शर्मा
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Tue, 29 Jun 2021 03:03 PM IST
सार
वित्त मंत्री ने एमएसएमई सेक्टर के छोटे व्यापारियों को कर्ज की राहत देकर उनका भरोसा जीता। लेकिन बाजार के खुलने को लेकर अनिश्चितता अब भी बरकरार है।
विज्ञापन
बाजार के खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के छोटे व्यापारियों के लिए कर्ज का खजाना खोल दिया है। नई घोषणा के अनुसार 25 लाख छोटे व्यापारी 1.25 लाख रुपये तक का आसान कर्ज ले सकेंगे। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारी सीजन के पहले छोटे व्यापारियों को मिली इस छूट से बाजार में आर्थिक तरलता बढ़ सकती है जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे छोटे सेक्टर में काम करने वालों को रोजगार भी मिलेगा जिससे उनके हाथों में पैसा भी पहुंचेगा जो बाजार में मांग बढ़ाने में सहायक होगा।
विज्ञापन
लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की इस घोषणा से खुश बाजार में एक अलग तरह की दहशत भी बरकरार है। बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर अभी भी सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अलग-अलग मंचों से अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। इससे उत्पादकों, थोक व्यापारियों से लेकर छोटे रिटेल व्यापारियों तक में अनिश्चितता का माहौल है। व्यापारी पैसा फंस जाने के डर से बाजार से पैसा नहीं उठा रहे हैं, माल खरीदने से भी हिचक रहे हैं। इसका परिणाम हो रहा है कि उत्पादन में भी अपेक्षित गति नहीं बन पा रही है।
विज्ञापन
अगर इस भ्रम को दूर नहीं किया जाता तो आशंका है कि सरकार की नई घोषणा से भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा। विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार से यह अनिश्चितता दूर करने के लिए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को केवल अधिकृत मंच से केवल एक स्वर में बात करनी चाहिए जिससे बाजार में विश्वास बहाली की जा सके।
विज्ञापन
बाहरी बाजारों से नहीं आ रहे व्यापारी
कपड़ा उद्योग व्यापार संघ के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली-एनसीआर एरिया में टेक्सटाइल बाजार में बहुत सुस्ती चल रही है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों की ओर से विवाह कार्यक्रमों की अनुमति के बाद भी कार्यक्रम बेहद सीमित रखे जा रहे हैं। इसका बड़ा असर टेक्सटाइल बाजार पर पड़ रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में टेक्सटाइल बाजार के सबसे बड़े ग्राहक उत्तरी और दक्षिणी भारत से थोक माल की खरीद में आने वाले व्यापारी होते हैं। लेकिन दक्षिणी राज्यों में भी कोरोना के हालात के कारण स्थितियों में बहुत सुधार नहीं हुआ है। यही कारण है कि इन बाजारों के 20-25 फीसदी व्यापारी ही बाजार तक पहुंच रहे हैं। जो व्यापारी आ भी रहे हैं, उनकी खरीद बेहद सीमित रह गई है।
उत्पादन सीमित, त्योहारों से उम्मीद
गांधी नगर, गाजियाबाद और नोएडा की एरिया में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में उत्पादन भी बहुत सीमित हो रहा है। इसका बड़ा कारण यह है कि रिटेलर के पिछले स्टॉक अभी भी क्लीयर नहीं हुए हैं। आगे कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए व्यापारी किसी भी अतिरिक्त खरीद से बच रहा है। श्रमिकों की कमी भी इसका एक बड़ा कारण बन रही है।
आगे रक्षाबंधन-भैया दूज से त्योहारों की शुरुआत होने वाली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि इन त्योहारों से बाजार में खरीद-बिक्री का कुछ सिलसिला शुरू होगा और बाजार में मांग बढ़ेगी। कोरोना के कमजोर पड़ने से लोगों ने आवाजाही भी शुरू की है। इसलिए इस त्योहारी सीजन को व्यापारी उम्मीद भरी निगाह से देख रहे हैं।
लेकिन पैसा कहां है?
राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोगों के पास सामान खरीदने के लिए पैसा नहीं है। अप्रैल-मई महीने में संगठित-असंगठित क्षेत्रों में लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। केवल होटल, टेक्सटाइल और कृषि जैसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में ही नहीं, अन्य क्षेत्रों में लोगों की नौकरियों पर संकट बना हुआ है। यही कारण है कि लोग खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक तौर पर लोगों में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर को लेकर अलग-अलग बयान दे रहे हैं। इससे केवल ग्राहकों में ही नहीं, उत्पादकों और थोक विक्रेताओं में भी अनिश्चितता बनी हुई है। अगर तीसरी लहर आई तो व्यापारियों का पैसा फंस सकता है, लिहाजा ये लोग थोक खरीद से भी बच रहे हैं। इन सबका समग्र परिणाम है कि बाजार गति नहीं पकड़ पा रहा है।
अगर वैज्ञानिक और सरकार आपसी सामंजस्य का एक उचित फोरम बना लें और उसके माध्यम से केवल अधिकृत बातों को ही जनता तक पहुंचाया जाए तो बड़े भ्रम से बचा जा सकता है और इससे बाजार को अपेक्षित गति देने की कोशिश की जा सकेगी।