महामारी का असर: 6.4 करोड़ महिलाओं ने गंवाई नौकरी, बच्चों की देखभाल में बिता रहीं अधिक समय
बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी का सबसे ज्यादा नुकसान नौकरीपेशा महिलाओं को हुआ है। इसकी वजह से पिछले एक साल में दुनिया भर में 6.4 करोड़ महिलाओं को नौकरी गंवानी पड़ी।
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कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया के काम करने के तरीके को बदल दिया है। इस दौरान सभी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो दी। काम के प्रति सभी की घारणा भी बदली है। महामारी के चलते कंपनियों ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की। वहीं करोड़ों लोगों की अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। महिलाओं पर इसका गंभीर असर पड़ा है। बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी का सबसे ज्यादा नुकसान नौकरीपेशा महिलाओं को हुआ है। इसकी वजह से पिछले एक साल में दुनिया भर में 6.4 करोड़ महिलाओं को नौकरी गंवानी पड़ी। यानी हर 20 कामकाजी महिलाओं में से एक महिला बेरोजगार हुई।
इसलिए सबसे ज्यादा प्रभावित हुई महिलाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा नुकसान महिला कर्मचारियों की अधिकता वाले खुदरा, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर पड़ा है इसलिए महिलाओं पर ज्यादा असर पड़ा है। इन क्षेत्रों में करीब 40 फीसदी कर्मचारी महिलाएं हैं।
बच्चों की देखभाल में अधिक समय
इसके अतिरिक्त स्कूल बंद होने की वजह से महिलाओं पर घर-परिवार और बच्चों की देखभाल का दबाव भी बढ़ा है। महिलाएं अब बच्चों की देखभाल में हर हफ्ते 31 घंटे गुजार रही है, जबकि पिछले साल यह हफ्ते के 26 घंटे था। यानी पिछले साल की तुलना में वे अब बच्चों की देखभाल में अधिक समय व्यतीत कर रही हैं।
लगभग हर देश में महिलाओं ने ज्यादा नौकरी खोई
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग हर देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा नौकरी खोई है। कोलंबिया, कोस्टारिका, इक्वाडोर और चिली जैसे देशों में नौकरी गंवाने वाली महिलाओं की संख्या ज्यादा हैं। शीर्ष 10 देशों में अमेरिका, कनाडा, स्पेन और ब्राजील भी शामिल है।
इन चार तरीकों से सुधर सकती है स्थिति
इसके साथ ही रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए चार तरीके भी सुझाए गए हैं- डिजिटल मजबूती, कारोबार में मदद, नीति बनाते वक्त हर क्षेत्र की महिला का ध्यान रखा जाए, केयरगिविंग को भी नौकरीपेशा जैसी अहमियत मिले।