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मूडीज को भारत में लंबी मंदी की आशंका, विकास दर घटने का बढ़ा जोखिम

Sat, 09 Nov 2019 03:08 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sat, 09 Nov 2019 03:08 AM IST
सार

  • सुस्ती का तात्कालिक हल निकालने में कामयाब सरकार, लेकिन विकास दर घटने का बढ़ा जोखिम
  • वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग घटाने की दिशा में उठाया पहला कदम
  • 3.7 फीसदी रह सकता है राजकोषीय घाटा, जबकि सरकार का लक्ष्य 3.3 फीसदी है

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Moodys changes its outlook on India rating to negative citing lower economic growth

विस्तार

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने शुक्रवार को भारत को तगड़ा झटका दिया। वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत की साख यानी क्रेडिट रेटिंग आउटलुक नकारात्मक कर दिया। इसे साख को घटाने की दिशा में पहला कदम माना जाता है। मूडीज ने भले ही कहा कि सरकार आर्थिक कमजोरी का हल निकालने में आंशिक तौर पर कामयाब रही है, लेकिन आगे विकास दर नीचे रहने का जोखिम बढ़ गया है।

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मूडीज ने विदेशी मुद्रा रेटिंग को बीएए2 को बरकारर रखा, लेकिन मार्च 2020 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में 3.7 फीसदी राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान जाहिर किया। वहीं सरकार का अनुमान 3.3 फीसदी राजकोषीय घाटे का है। माना जा रहा है कि सुस्त विकास दर और कॉरपोरेट कर में कटौती के चलते राजस्व घटने से राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर सरकार को झटका लग सकता है।
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मूडीज ने एक बयान मेें कहा कि इस आउटलुक से आर्थिक कमजोरी का समाधान निकालने में सरकार और नीतियों का आंशिक असर जाहिर होता है, जिससे पहले से ऊंचे स्तर पर बना हुआ कर्ज और बढ़ गया है। इससे पहले वैश्विक व्यापार गतिरोध के बीच उपभोक्ता मांग और सरकारी व्यय में कमी के चलते अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो 2013 के बाद सबसे कमजोर रही थी।
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मूडीज के क्रेडिट रेटिंग आउटलुक नकारात्मक किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मजबूत बने हुए हैं और हाल में किए गए सुधारों से आगे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खुदरा कारोबार, कार कंपनियों, घरों की बिक्री और भारी उद्योगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ भारत का विकास अनुमान लगातार घट रहा है।

मूडीज ने कहा कि भले ही सरकार के अर्थव्यवस्था को सहारा देने के प्रयास से फिलहाल आर्थिक विकास में सुस्ती का असर, समय, ग्रामीण घरों में वित्तीय संकट, नौकरियों में कमी और एनबीएफआई के लिए उधारी का संकट कम होना चाहिए, लेकिन इससे बड़ी मंदी की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘आगे संभावित सुधारों से कारोबारी निवेश और ऊंचे स्तरों पर विकास को समर्थन मिलना चाहिए। साथ ही कर आधार को विस्तार मिलेगा।’ मूडीज ने कहा कि आर्थिक विकास में लंबी सुस्ती से आय में बढ़ोतरी कम हुई है और जीवन स्तर में सुधार और मध्यम से दीर्घावधि में भारी  निवेश के लिए संभावित नीतिगत विकल्प खासे सीमित हो गए हैं।

इससे पहले दो अन्य अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों फिच रेटिंग्स और एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स अभी तक भारत के आउटलुक को स्थिर रखा है।

मूडीज की 10 बड़ी बातें

  • भारत का क्रेडिट रेटिंग आउटलुक नकारात्मक किया, जो साख को घटाने की दिशा में पहला कदम है
  • आगे विकास दर नीचे रहने का बढ़ गया है जोखिम
  • राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.7 फीसदी होने का अनुमान
  • सरकारी खजाने पर बढ़ा कर्ज, जो पहले से ही ज्यादा था
  • सरकार के प्रयासों से तात्कालिक सुस्ती कम होनी चाहिए, लेकिन बड़ी मंदी की आशंकाएं बढ़ गई हैं

 

अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए किए कई सुधार: सरकार

उधर मूडीज की रिपोर्ट पर वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए वित्तीय क्षेत्र के लिए कई पहले के सात ही कई सुधार किए।



मंत्रालय ने कहा, ‘भारत सरकार वैश्विक सुस्ती के असर को कम करने के लिए सक्रिय रूप से नीतिगत फैसले ले रही है। इनसे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा और पूंजी प्रवाह व निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।’ बयान के मुताबिक, ‘महंगाई काबू में है और बांड प्राप्ति कम है। सात ही अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। निकट भविष्य और मध्यम अवधि में मजबूत आर्थिक विकास की संभावनाएं हैं।’

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