अर्थव्यवस्था में 2020-21 में आएगी वास्तविक गिरावट, अगले साल आ सकता है सुधार: मूडीज

पीटीआई, नई दिल्ली Updated Fri, 22 May 2020 02:47 PM IST
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सार

  • मूडीज का अनुमान है कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिल सकती है।
  • सरकार द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज में उठाए गए कदम उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं।
  • 2021-22 में देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद जताई गई।

विस्तार

रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस का अनुमान है कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिल सकती है। यह चार दशक में पहली बार होगा जब कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए जारी लॉकडाउन की वजह से खपत कम होने और कारोबारी गतिविधियां थमने से चुनौतियों का सामना कर रही घरेलू अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी।
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मूडीज के मुताबिक कोरोना वायरस संकट से पहले भी भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीमी पड़ गई थी और यह छह वर्ष की सबसे निचली दर पर पहुंच गई थी। सरकार द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज में उठाए गए कदम उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं, अर्थव्यवस्था की समस्याएं इससे बहुत ज्यादा व्यापक हैं।
2020-21 में आएगी वास्तविक गिरावट 
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'अब हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर में वास्तविक गिरावट आएगी। इससे पहले हमने वृद्धि दर शून्य रहने की संभावना जताई थी।'

2021-22 में सुधार सकती है अर्थव्यवस्था 
हालांकि मूडीज ने 2021-22 में देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद जताई। यह उसके पूर्ववर्ती 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान से भी मजबूत रह सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कोविड-19 लॉकडाउन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। यह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र को प्रभावित करेगा।

उल्लेखनीय है कि देश में 25 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा की थी गई। तब से अब तक रियायतों के साथ इसकी मियाद चार बार बढ़ाई जा चुकी है। चौथा लॉकडाउन 31 मई तक लागू रहेगा। लॉकडाउन से खासकर देश के असंगठित क्षेत्र के समक्ष संकट खड़ा हुआ है। इस क्षेत्र का जीडीपी में आधे से अधिक योगदान है।

आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज पर दिया बयान
आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के बारे में मूडीज ने कहा, 'सरकार का सीधे तौर पर राजकोषीय प्रोत्साहन जीडीपी का एक से दो फीसदी के दायरे में रह सकता है। सरकर की ज्यादातर योजनाएं ऋण गारंटी या प्रभावित क्षेत्रों की नकदी चिंता को दूर करने से संबद्ध है। प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय खर्च की मात्रा हमारी उम्मीदों से कहीं कम है और इसे वृद्धि को खास गति मिलने की संभावना कम है।'
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