फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Monsoon rainfall 4% above normal as of June 24, Kharif sowing progressing well

Monsoon: देश में 24 जून तक मानसून की बारिश सामान्य से 4% अधिक, शोध में दावा- खरीफ की बुवाई सही रास्ते पर

Wed, 25 Jun 2025 01:25 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 25 Jun 2025 01:25 PM IST
सार

आईसीआईसीआई बैंक ने मानसून से जुड़ी अपनी रिसर्च में सीईआईसी और आईएमडी के आंकड़ों का हवाला देकर बताया गया है कि राजस्थान (एलपीए से 135 प्रतिशत अधिक) और गुजरात (एलपीए से 134 प्रतिशत अधिक) में प्रमुख खरीफ राज्यों में सबसे अधिक अतिरिक्त बारिश हुई है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

विज्ञापन
Monsoon rainfall 4% above normal as of June 24, Kharif sowing progressing well
इस साल अच्छे मानसून की उम्मीद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

24 जून तक, देश में मानसून की बारिश दीर्घ अवधि औसत (एलपीए) से 4.0 प्रतिशत अधिक है। यह बारिश के मौसम की सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी एक शोध में यह बात कही है। शोध के अनुसार, वर्षा में इस मामूली वृद्धि से उन राज्यों में खरीफ फसल उत्पादन को लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां पर्याप्त बारिश हुई है। 

विज्ञापन


रिसर्च में सीईआईसी और आईएमडी के आंकड़ों का हवाला देकर बताया गया है कि राजस्थान (एलपीए से 135 प्रतिशत अधिक) और गुजरात (एलपीए से 134 प्रतिशत अधिक) में प्रमुख खरीफ राज्यों में सबसे अधिक अतिरिक्त बारिश हुई है। अन्य प्रमुख खरीफ फसल उत्पादक राज्य जैसे मध्य प्रदेश (एलपीए से 28 प्रतिशत अधिक), उत्तर प्रदेश (19 प्रतिशत), तमिलनाडु (15 प्रतिशत), कर्नाटक (10 प्रतिशत), हरियाणा (11 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (7 प्रतिशत) में भी मौसमी औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पंजाब में एलपीए के बराबर वर्षा हुई है।
विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार इस व्यापक और समय पर हुई बारिश से बुवाई और फसल वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे समग्र कृषि उत्पादन में सुधार होगा। हालांकि, सभी क्षेत्रों में बारिश अच्छी हुई, ऐसा नहीं है। तेलंगाना (एलपीए से 43 फीसदी कम), छत्तीसगढ़ (एलपीए से 36 फीसदी कम), आंध्र प्रदेश (एलपीए से 34 फीसदी कम) और बिहार (एलपीए से 20 फीसदी कम) जैसे राज्य बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। यदि कमी जारी रहती है, तो इससे इन क्षेत्रों में खरीफ की बुवाई और फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कमजोर नोट पर शुरू हुआ मानसून जून के उत्तरार्ध में काफी बेहतर हुआ। संचयी वर्षा अब दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 104 प्रतिशत है, जो कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के जून के लिए 108 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा कम है। हालांकि, देश भर में वर्षा का वितरण असमान बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, भले ही कुछ प्रमुख खरीफ उत्पादक राज्यों में वर्षा एलपीए से कम है, लेकिन अब तक खरीफ की बुवाई 10.4 प्रतिशत (सालाना आधार पर) अधिक है। 109.7 मिलियन हेक्टेयर की सामान्य बुवाई में से 13.8 मिलियन हेक्टेयर बुवाई पहले ही पूरी हो चुकी है। पिछले साल इस अवधि तक 12.5 मिलियन हेक्टेयर बुवाई हुई थी। मुख्य रूप से चावल जैसे प्रमुख फसलों की बुवाई में 57.9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई है।


वहीं, दालों की बुवाई में 42.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं और मोटे अनाज की बुवाई में 22.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। हालांकि, तिलहन और जूट और मेस्टा की बुवाई में क्रमशः 2 प्रतिशत और 2.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। मानसून की गतिविधि अब भी जारी है। आने वाले हफ्तों में वर्षा वितरण की स्थिति पर देश भर में कृषि पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा यह निर्धारित होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed