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मकर संक्रांति के बाद किसानों, गरीबों को मिलेगा तोहफा, खाते में आएंगे 30 हजार रुपये
Fri, 11 Jan 2019 11:12 AM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Fri, 11 Jan 2019 11:12 AM IST
सार
- केंद्र सरकार कैबिनेट बैठक में एलान कर सकती है।
- यह बैठक मकर संक्रांति के ठीक एक दिन बाद 16 जनवरी को होगी।
- इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा।
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विस्तार
गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ देने के बाद मोदी सरकार अब किसानों, बेरोजगारों और गरीबों के लिए जल्द ही खजाना खोलने जा रही है। केंद्र सरकार, अगली कैबिनेट बैठक में इस बात का एलान कर सकती है। यह बैठक मकर संक्रांति के ठीक एक दिन बाद 16 जनवरी को होगी।
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खाते में एकमुश्त ट्रांसफर होगी रकम
केंद्र सरकार मकर संक्रांति के बाद एक और मास्टर स्ट्रोक देने जा रही है। कैबिनेट की अगली बैठक में सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों और गरीब लोगों को एक मुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने का एलान कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा।
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खत्म हो जाएगी सब्सिडी
हालांकि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा। इसमें वो किसान भी शामिल होंगे, जो दूसरों के यहां मजदूरी करते हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल करके फायदा पहुंचाएगी।
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प्रत्येक महीने मिलेगी इतनी रकम
मोदी सरकार के प्लान के मुताबिक गरीब किसानों व बेरोजगारों को प्रत्येक महीना 2500 हजार रुपया दिया जाएगा। यह राशि हर महीने के बजाए एकमुश्त दी जाएगी। किसान के परिवार को भी मदद पहुंचाई जा सकती है। राहत पैकेज में बीमा, कृषि लोन, आर्थिक मदद दी जा सकती है। स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर है।क्या है मोदी सरकार की स्कीम
किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने जिन दो मॉडल का अध्ययन किया है उसमें ओडिशा का मॉडल ज्यादा दमदार है। ओडिशा के कालिया मॉडल में किसानों को 5 क्रॉप सीजन में 25000 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि, मोदी सरकार किसान को सालाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार कर रही है।क्या है यूबीआई
संसद में वर्ष 2017-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वेक्षण में इसका जिक्र किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यूबीआई एक बेहद शक्तिशाली विचार है और यदि यह समय इसे लागू करने के लिए परिपक्व नहीं है तो इस पर गंभीर चर्चा तो हो ही सकती है।इसमें कहा गया है कि सिर्फ केन्द्र सरकार की ही करीब 950 योजनाएं चलती हैं जिस पर सकल घरेलू उत्पाद की करीब पांच फीसदी राशि खर्च होती है। इसके अलावा मध्यम वर्ग को खाद्य, रसोई गैस और उर्वरक पर सकल घरेलू उत्पाद की तीन फीसदी राशि खर्च होती है। यह राशि लक्ष्य समूह तक पहुंच सके, इसमें यूबीआई सहायक हो सकता है।
बैंक खाते में ट्रांसफर होगी राशि
इसमें कहा गया है कि हर आंख से आंसू पोछने का महात्मा गांधी का उद्देश्य पूरा करने में यूबीआई सफल हो सकता है। इस योजना में राशि का हस्तांतरण सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में होगा, इसलिए लाल फीताशाही या ब्यूरोक्रेसी से इसे निजात मिल सकती है।इसमें कहा गया था कि यूबीआई के लिए जन धन, आधार और मोबाइल -जैम- में से दो चीजें तो पूरी तरह से कार्यशील हैं। सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि इसे लागू करने से गरीबी में आधा फीसदी की कमी हो सकती है और इसे लागू करने पर सकल घरेलू उत्पाद का महज चार से फीसदी राशि ही लगेगी।
2019 के चुनाव पर नजर
केंद्र सरकार की अब सीधे नजर मई 2019 में होने वाले आम चुनावों पर है। इसलिए वो बजट में इस योजना की घोषणा करना चाहती है, ताकि एनडीए एक बार फिर से भारी बहुमत से जीत सकें। मोदी सरकार इस स्कीम पर दो साल से काम कर रही है।भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने 29 जनवरी 2018 को कहा था कि अगले सालों में 1 और 2 राज्यों में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की शुरुआत हो सकती है। सुब्रमण्यन ने 2016-17 के आर्थिक सर्वे में यह सिफारिश की थी।