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चुनावों के बाद बढ़ सकते हैं दूध के दाम, इतना हो सकता है प्रति लीटर इजाफा

Thu, 28 Mar 2019 05:37 PM IST
shubham बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: shubham Updated Thu, 28 Mar 2019 05:37 PM IST
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Milk Prices may rise after lok sabha election 2019

मई में लोकसभा चुनावों के बाद दूध के दामों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। अगर ऐसा होता है तो फिर इसका असर दूध से बने अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ेगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यह इसलिए होगा क्योंकि स्किम दूध के उत्पादन में कमी हो गई है। वहीं गर्मी के मौसम में दूध की सप्लाई भी काफी कम हो जाती है। 

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इतने बढ़ सकते हैं दाम

क्रिसिल के मुताबिक दूध बेचने वाली कंपनियां दाम में एक से दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे पहले दूध के दाम 2017 में बढ़े थे। हालांकि देश में दो प्रमुख दूध कंपनियां अमूल और मदर डेयरी ने इस बारे में किसी तरह की घोषणा नहीं की है।

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इन पर पड़ेगा असर

अगर दूध के दामों में इजाफा होता है तो फिर घी, पनीर, मक्खन, चीज़, लस्सी और छाछ के अलावा चाय, कॉफी, मिठाई, चॉकलेट आदि की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। दूध के दाम बढ़ने का असर आम आदमी की रसोई पर देखने को मिलेगा, क्योंकि इसकी खपत प्रत्येक परिवार में रोजाना होती है। 

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Milk Prices may rise after lok sabha election 2019

यह कंपनियां बेचती हैं दूध

राज्यों में मौजूद दुग्ध संघों के अलावा देश में क्वालिटी, नेस्ले, ब्रिटानिया, नमस्ते इंडिया, पतंजलि, आनंदा जैसी निजी क्षेत्र में कई कंपनियां मौजूद हैं, जो दूध और इससे बने उत्पादों को बेचने का काम करती हैं। 

इस वजह से बढ़ेंगे दाम

फिलहाल दूध की मांग करीब इस साल सात फीसदी तक बढ़ सकती है। लेकिन अभी आपूर्ति तीन से चार फीसदी कम है। अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो फिर डेयरी सेक्टर को परिचालन मुनाफे में 30-40 बेसिस प्वाइंट का इजाफा देखने को मिलेगा। 

किसानों का खर्चा बढ़ा

किसानों का भी गाय, भैंस पालने पर होने वाला खर्चा काफी बढ़ गया है। ऐसे में अब ज्यादातर किसान इनको पालने में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिस कीमत पर वो दूध कंपनियों को बेचते हैं, उससे उनका खर्चा भी नहीं निकलता है।

कई कंपनियां काफी कड़े मानकों का पालन करती हैं, जिसके चलते दूध खरीदने से पहले उसका सैंपल भी फेल हो जाता है। ऐसे में उन्हें उस दूध को खुले बाजार में बेचने के बजाए फेंकना पड़ता है। 

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