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Iran-Israel Conflict: भारतीय कंपनियों पर भी पड़ेगा ईरान-इस्राइल संघर्ष का असर, तनाव पर क्रिसिल की रिपोर्ट जारी

Fri, 20 Jun 2025 08:24 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Fri, 20 Jun 2025 08:24 PM IST
सार

Iran-Israel Conflict: ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष का असर अभी भाारतीय उद्योग जगत और वैश्विक व्यापार अभी तक नहीं पड़ा है, लेकिन यदि स्थितियां और बिगड़ती हैं, तो बासमती चावल के निर्यात पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है।

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Middle East unrest to significantly impact Indian basmati rice, fertilisers, and diamond sectors: Crisil
ईरान और इस्राइल से भारत में इन सेक्टर पर पड़ेगा असर - फोटो : ANI

विस्तार

ईरान और इस्राइल संघर्ष को लेकर भारत के कारोबार और भारतीय कंपनियों पर इसका असर निकट भविष्य में सीमित रहने की उम्मीद है, क्योंकि कम पूंजीगत व्यय और कंपनियों की बैलेंस शीट की मजबूती संभावित प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करेगी। क्रिसिल ने पश्चिम एशिया तनाव पर रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह कहा गया है कि मध्य पूर्व में तनाव का असर भारतीय कंपनियों पर निकट भविष्य में सीमित रहेगा लेकिन यदि युद्ध लंबे समय तक चला तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति बाधित होने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
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चावल निर्यात से लेकर हीरे पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट के अनुसार ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष का असर अभी भाारतीय उद्योग जगत और वैश्विक व्यापार अभी तक नहीं पड़ा है, लेकिन यदि स्थितियां और बिगड़ती हैं, तो बासमती चावल के निर्यात पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है। जबकि उर्वरक और हीरे कटिंग व पॉलिश के कारोबार पर असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल भारत ने ईरान को लगभग 6,734 करोड़ रुपये का चावल निर्यात किया था जो कुल चावल निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत था। निर्यात बाधित होने से घरेलू बाजार में बासमती चावल के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं चाय के निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका है।
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रिपोर्ट के अनुसार घरेलू हीरा पॉलिश करने वालों के लिए इस्राइल मुख्य रूप से एक व्यापारिक केंद्र है, जहां पिछले वित्त वर्ष में कुल हीरा निर्यात का लगभग चार प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया गया। इसके अलावा आयात किए जाने वाले सभी कच्चे हीरों में लगभग दो प्रतिशत इस्राइल से आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पॉलिश करने वालों के पास बेल्जियम और संयुक्त अरब अमीरात जैसे विकल्प व्यापारिक केंद्र हैं, जिनके अंतिम खरीदार अमेरिका और यूरोप में हैं, जो उन्हें इस क्षेत्र पर पड़ने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से निपटने में मदद करेंगे।


पेंट, केमिकल कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे भारत इंक के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। कच्चे तेल से जुड़े कारोबार जैसे कि तेल रिफाइनरियों के लिए उच्च इनपुट लागत के कारण उनके परिचालन मार्जिन कम होने की संभावना है, क्योंकि उनके पास रिटेल ईंधन की कीमतों में वृद्धि कर सकते हैं और जिसका भार उपभोक्ता पर पड़ेगा। 

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रिपोर्ट के अनुसार केमिकल कंपनियों की परिचालन लागत 30 प्रतिशत कच्चे तेल से जुड़ी होती है। यहां, इनपुट लागत में भारी वृद्धि को आगे बढ़ाने की क्षमता सीमित होगी क्योंकि पिछले दो वित्तीय वर्षों में चीन द्वारा लगातार डंपिंग और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा इन्वेंट्री सुधार के कारण दबी हुई मांग के कारण लाभप्रदता दबाव देखने के बाद यह क्षेत्र अभी सामान्य स्थिति में लौट रहा है। इसी प्रकार, पेंट क्षेत्र में मार्जिन पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इसकी उत्पादन लागत का लगभग 30 प्रतिशत कच्चे तेल से जुड़ा हुआ है, जहां प्रतिस्पर्धा की तीव्रता ग्राहकों पर बढ़ी हुई इनपुट कीमतों का बोझ डालने की क्षमता को सीमित कर सकती है और कुछ हद तक लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है।
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