फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Hindustan Aeronautics Limited HAL top bidder for transfer of technology for Small Satellite Launch Vehicle

HAL: इसरो के SSLV रॉकेट का संचालन अब एचएएल के हाथों में, दो साल में तैयार होंगे तीन लॉन्च व्हीकल

Fri, 20 Jun 2025 02:46 PM IST
नितिन गौतम बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 20 Jun 2025 02:46 PM IST
सार

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसरो के स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के तकनीकी हस्तांतरण की बोली जीत ली है। एसएसएलवी छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम है। इसरो दो वर्षों तक एचएएल का संचालन करेगा।

विज्ञापन
Hindustan Aeronautics Limited HAL top bidder for transfer of technology for Small Satellite Launch Vehicle
एचएएल - फोटो : एएनआई

विस्तार

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने बड़ी उपलब्धी हासिल की है। एचएएल ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) के स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) के तकनीकी हस्तांतरण की बोली जीत ली है।

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: Swiss Bank: स्विस बैंक में पैसा जमा करने से बच रहे भारतीय, 10 साल में आई 18 फीसदी की गिरावट

विज्ञापन

इसरो दो वर्षों तक एचएएल का करेगा संचालन 

यह घोषणा राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र के अध्यक्ष पवन गोयनका ने की। गोयनका ने कहा कि इसरो दो वर्षों तक एचएएल का संचालन करेगा। इस दौरान एचएएल को समान डिजाइन और आपूर्तिकर्ताओं वाले दो रॉकेट विकसीत करने होंगे। एचएएल डिजाइन में सुधार करने और तीसरे रॉकेट के लिए अपने स्वयं के विक्रेता चुनने के लिए स्वतंत्र होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

एचएएल ने दो बड़े समूहों को पीछे छोड़ा 

बेंगलुरु की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इस बोली में दो मजबूत समूहों को पीछे छोड़ दिया। इनमें अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजिस , जिसे अडानी डिफेंस सिस्टम्स और टेक्नोलॉजीज का समर्थन था और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की समर्थन वाली कंपनी शामिल थी। 

एसएसएलवी क्यों है खास?

एसएसएलवी छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम है। यह क्षमता देश की रक्षा जरूरतों के लिए आपातकाल में बहुत काम आ सकती है। यह रॉकेट 10 किलो से 500 किलो तक के सैटेलाइट को 500 किलोमीटर ऊंचाई की गोल कक्षा में पहुंचा सकता है। इस रॉकेट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह कम लागत वाला हो, जल्दी लॉन्च किया जा सके, एक साथ कई सैटेलाइट ले जा सके और इसे लॉन्च करने के लिए बहुत ज्यादा ढांचा या बड़ी तैयारी की जरूरत न हो।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed