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ऑनलाइन शराब बिक्री के क्या हैं फायदे और नुकसान?

Fri, 08 May 2020 11:52 AM IST
बीबीसी Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Fri, 08 May 2020 11:52 AM IST
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merits and demerits of online sale of alcohol in India in lockdown period
शराब - फोटो : PTI

लॉकडाउन के तीसरे चरण में जैसे ही केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर से प्रतिबंध हटाया, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से लेकर छोटे शहरों में भी शराब खरीदने के लिए एक-दो कलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिली। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में तो भारी बारिश के बीच भी लोग कतार में जमे रहे।

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लोगों की लंबी कतारें एक ओर राज्य सरकारों के लिए कोरोना संक्रमण के आंकड़ों के बढने का कारण बन सकती है, तो दूसरी ओर यही कतारें राज्य की अर्थव्यस्था को फिर से दुरुस्त करने का एकमात्र साधन भी लग रही हैं।
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हालांकि लॉकडाउन के पहले चरण (25 मार्च-14 अप्रैल) में असम, मेघालय, पश्रिम बंगाल, केरल और पंजाब ने कड़े दिशा-निर्देशों के साथ कुछ शराब की दुकानें खोली थीं क्योंकि तब केंद्र सरकार ने शराब की बिक्री पर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की थी। बाद में केंद्र सरकार ने इन राज्यों को ऐसा करने से मना किया।
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15 अप्रैल को केंद्र ने स्पष्ट रूप से गाइडलाइन जारी कर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध भी लगा दिया था जिसको अब लॉकडाउन के तीसरे चरण में हटा दिया गया है।

बिहार, गुजरात, नागालैंड, मिजोरम और केंद्र शासित लक्षद्वीप; इन राज्यों को छोड़कर जहां शराब बैन है, अन्य राज्यों के लिए शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी कमाई का मजबूत स्रोत है।

आरबीआई के राज्य वित्त पर किए गए शोध की (2019-20) रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्य सरकारों के खुद के कर राजस्व का 10-15 प्रतिशत हिस्सा शराब पर लगे एक्साइज ड्यूटी से आता है।

चार मई से प्रतिबंध हटने के बाद कर्नाटक ने करीब 70 करोड़ रुपये कमाए तो उत्तर प्रदेश ने 100 करोड़ रुपये तक की कमाई की।

संट्रेल एक्साइज (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर काम कर रहे एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि शराब से जुडे कर का लाभ भी राज्य सरकारों को ही मिलता है और इसमें केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करती।

विदेशी शराब के आयात पर लगने वाला कस्टम टैक्स केंद्र सरकार के खाते में जाता है और उसकी बिक्री पर लगने वाला टैक्स का फायदा राज्य सरकार को होता है। वो यह भी बताते हैं कि शराब पर जीएसटी न लगने की वजह से राज्य सरकार मुनाफा अच्छा कमा लेती है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब शराब बेचनी ही है तो कोरोना काल में भीड़ से बचने के लिए ऑनलाइन सेवा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल क्या राज्यों में किया जा सकता है?

छत्तीसगढ़ ने पांच मई को ग्रीन जोन में शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलिवरी शुरू की। पंजाब ने अपनी ऑनलाइन सेवा तो जारी नहीं की लेकिन ऑरेंज और ग्रीन जोन में होम डिलीवरी पर विचार कर रहा है। लेकिन यह फॉर्मूला कितना कारगर है?

ऑनलाइन शराब की बिक्री पर कानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार शराब की बिक्री से जुड़े कानून राज्य सरकार बना सकती है।

दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील रूप चंद तिवारी के अनुसार हर राज्य सरकार ने अपने अनुसार ऑनलाइन शराब की बिक्री के नियम बनाए हैं, कहीं यह प्रतिबंधित है तो कहीं इस विकल्प का एक्ट में जिक्र ही नहीं है।

अगर शराब पीने की उम्र की भी बात करें तो वह भी हर राज्य में अलग-अलग है। जैसे दिल्ली में 25 साल, गोवा, कर्नाटक में 18 साल तो केरल में 23 साल है।

वो बताते हैं “चूंकि भारत इस वक्त कोरोना वायरस से आई वैश्विक आपदा से निपट रहा है, इसके कारण आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के तहत लोगों को आपदा से बचाने के लिए नियमों या कानून में बदलाव किया जा सकता है। जैसे छत्तीसगढ़ ने किया, वैसे अन्य राज्य भी कर सकते हैं।”

रूप चंद बताते हैं कि फिलहाल दिल्ली एक्साइज एक्ट, 2009 के अनुसार शराब की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध है। दिल्ली सरकार एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897 और दिल्ली एपीडेमिक डिसीज कोविड-19 रेगुलेशन, 2020 का इस्तेमाल कर कुछ समय के लिए ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती है।

वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के ही वकील देवांशु खन्ना का मानना है कि कोरोना आपदा के चलते अध्यादेश पारित कर राज्य सरकारें शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर सकती हैं लेकिन इसको सतर्कता से लागू करना होगा ताकि इस मौके का फायदा उठाकर कोई इसकी तस्करी न करे।

वो बताते हैं कि हाल ही में केरल के एक नागरिक ने केरल हाईकोर्ट में शराब की होम डिलिवरी के लिए याचिका दायर दी की थी जिसको कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा था कि सरकार इस पर निर्यण ले सकती है, कोर्ट नहीं।

शराब के ठेकेदारों की क्या है राय?
दिल्ली के एक शराब दुकानदार ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि सरकारी और प्राइवेट दुकानों को मिलाकर दिल्ली में 700 से ज्यादा शराब की दुकानें हैं और इस वक्त केवल 75-100 दुकानें ही खोली गई हैं।

डिमांड ज्यादा है लेकिन सप्लाई सिर्फ कुछ ही दुकानें कर रही है। इससे यह दिक्कत हो सकती है कि अगर इन दुकानों में स्टॉक की कमी हुई तो भीड़ दुकानदारों पर हावी भी हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि “दिल्ली सरकार ने केवल एल-6 और एल-8 लाइसेंस वाली दुकानें ही खोली हैं जो सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। इन दुकानों में स्टॉक भी ज्यादा नहीं होता।”

वो कहते हैं “ऑनलाइन सेवा शुरू करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। रिटेल विक्रेता से स्टॉक लेकर ऑनलाइन बेचा जा सकता है।”

उत्तर प्रदेश के एक्साइज विभाग में कार्यरत एक अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने शर्त पर बीबीसी को बताया कि उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन शराब की बिक्री जैसी कोई सेवा नहीं है। यहां पर लाइसेंस वाली रीटेल दुकानों पर बिक्री जारी है।

पश्रिम बंगाल में रिटेल की दुकानों के जरिए होम डिलीवरी की जा रही है लेकिन ऑनलाइन शराब की बिक्री के अपने कई नुकसान भी हैं।

ऑनलाइन शराब की बिक्री के नुकसान
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील रूप चंद बताते हैं कि ऑनलाइन सेवा में उम्र का आकलन करना मुश्किल हो सकता है।

चूंकि ऑनलाइन सिस्टम में ऐसे प्रावधान नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि शराब का ऑर्डर देने वाला उम्र में छोटा है या फिर शराब पीने की कानूनी उम्र तक पहुंच गया है।

कर्नाटक के एक मामले का जिक्र करते हुए वो कहते हैं, साल 2015 में तमिलनाडु के चेन्नई शहर से एक ऑनलाइन शराब विक्रेता कंपनी, ‘हिप बार’ ने अपनी शुरुआत की। इसके बाद 2017 में उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में अपनी सेवा शुरू की थी। लेकिन साल 2019 में कर्नाटक सरकार ने अपने राज्य में ‘हिप बार’ की सेवा को यह कहकर रद्द कर दिया था कि ऑनलाइन शराब की बिक्री में उम्र का पता नहीं चल पाता और यह खतरनाक है।

हिप बार के मालिक प्रसन्ना नटराजन ने दलील दी थी कि आधार कार्ड आधारित प्रक्रिया पर काम किया जा सकता है जिससे उम्र का पता चल सके।

इसके साथ-साथ वह यह भी बताते हैं कि क्योंकि हर राज्य सरकार के शराब की बिक्री के अपने नियम है इससे ऑनलाइन लाइसेंस मिलना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है।

सबसे अहम बात यह है कि लोग इसका गलत इस्तेमाल कर शराब की तस्करी के लिए भी कर सकते हैं। राज्य सरकार को जितना कर राजस्व मिलता है उसका ठीक से आकलन भी नहीं हो पाएगा।

ऑनलाइन शराब की बिक्री से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण?
जहां ऑनलाइन सेवा या शराब की होम डिलीवरी को कुछ समय के लिए शुरू कर, भीड़ को नियंत्रित करके कुछ राज्य कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इससे शराब पीने वालों के स्वाथ्य पर क्या असर पड़ेगा?

क्या शराब पीने से कोरोना का संक्रमण का खतरा पीने वाले पर बढ़ सकता है? ऑनलाइन सेवा शुरू होने से शराब का सेवन ज्यादा होगा क्योंकि लोग घर बैठे-बैठे शराब का ऑर्डर दे पाएंगे।

विश्व स्वाथ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन अल्कोहॉल एंड हेल्थ' के मुताबिक भारत में करीब 32 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं जिसमें से आधे से ज्यादा लोग खतरनाक स्तर पर शराब पीते हैं यानी की जरूरत से ज्यादा पीते हैं। ऐसे में शराब का सेवन कई बीमारियों को जन्म दे सकता है।

शराब पीने से बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

विश्व स्वाथ्य संगठन ने जागरुक करने के लिए गाइडलाइंस जारी करते हुए बताया कि भले ही शराब पीने से सीधे कोविड-19 होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता पर शराब असर डालती है इसलिए इसका सेवन करने से बचना ही चाहिए।

एएनआई की खबर के अनुसार तमिलनाडु के मदुरै जिले में औरतों का एक गुट बाहर निकल कर राज्य सरकार के शराब के ठेके खोलने के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरा। उनके मुताबिक़ शराब के सेवन के बाद उनके पति घरेलू हिंसा करते हैं।

केंद्रीय एक्साइज विभाग में कार्यरत अधिकारी कहते हैं कई राज्यों द्वारा शराब की बिक्री पर बढ़ाए टैक्स के जरिए पैसा तो कमाया जा सकता है लेकिन साथ ही शायद बिक्री पर नियंत्रण भी हो सके।

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