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Report: विनिर्माण में 17.5 साल की रफ्तार, पीएमआई 59.2 पर; महंगाई-रोजगार की चुनौती बनी चिंता का विषय
Sat, 26 Jul 2025 04:11 AM IST
शुभम कुमार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 26 Jul 2025 04:11 AM IST
सार
जुलाई में भारत की विनिर्माण गतिविधियों ने 17.5 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाई छू ली। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में बढ़कर 59.2 पर पहुंच गया, जो जून में 58.4 था। घरेलू व वैश्विक मांग में तेजी, तकनीकी निवेश और उत्पादन क्षमता में विस्तार के चलते यह उछाल दर्ज हुआ है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
देश की विनिर्माण गतिविधियां जुलाई में 17.5 वर्ष के शीर्ष पर पहुंच गई हैं। एसएंडपी ग्लोबल की ओर से जारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में 59.2 पर पहुंच गया। खरीद प्रबंधक सूचकांक यानी पीएमआई जून में 58.4 पर था। दरअसल, यह उछाल, मज़बूत घरेलू और वैश्विक मांग के कारण विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत वृद्धि का संकेत देता है।
विनिर्माण और सेवा दोनों का पीएमआई 60.7 पर पहुंच गया, जो एक साल से भी अधिक समय में सबसे तेज उछाल है। यह मांग में तेजी, तकनीकी निवेश और विस्तारित क्षमताओं के कारण संभव हुआ है। रोजगार में विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में, मजबूत वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि भारत के विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के विस्तार के साथ-साथ स्वस्थ रोजगार सृजन भी हो रहा है।
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अगले 12 महीनें में उत्पादन वृद्धि में आशावादी
भारतीय कंपनियां अगले 12 महीने में उत्पादन वृद्धि के बारे में आशावादी बनी रहीं। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग, प्रौद्योगिकी में निवेश और विस्तारित क्षमताओं के कारण वृद्धि हो रही है। पीएमआई आंकड़ों से पता चला है कि भारत में वस्तु उत्पादकों ने सेवा प्रदाताओं की तुलना में उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की है। इनकी वृद्धि की गति अप्रैल, 2024 के बाद से सबसे मजबूत हो गई है।
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सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मामूली नरमी
जुलाई के दौरान सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में थोड़ी नरमी देखी गई। हालांकि ऐतिहासिक मानकों के अनुसार वृद्धि दर तेज रही। निजी क्षेत्र के परिचालन में सुधार जारी रहा। कुल बिक्री, निर्यात ऑर्डर और उत्पादन स्तर में तेज वृद्धि दिखाई दी। हालांकि कारोबारी विश्वास सकारात्मक बना रहा, लेकिन कुछ प्रतिस्पर्धा और महंगाई के दबाव को लेकर चिंतित होने के कारण यह लगभग ढाई साल के निचले स्तर पर आ गया। रोजगार सृजन की दर 15 महीनों में सबसे कम रही।
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विनिर्माण और सेवा दोनों का पीएमआई 60.7 पर पहुंच गया, जो एक साल से भी अधिक समय में सबसे तेज उछाल है। यह मांग में तेजी, तकनीकी निवेश और विस्तारित क्षमताओं के कारण संभव हुआ है। रोजगार में विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में, मजबूत वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि भारत के विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के विस्तार के साथ-साथ स्वस्थ रोजगार सृजन भी हो रहा है।
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अगले 12 महीनें में उत्पादन वृद्धि में आशावादी
भारतीय कंपनियां अगले 12 महीने में उत्पादन वृद्धि के बारे में आशावादी बनी रहीं। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग, प्रौद्योगिकी में निवेश और विस्तारित क्षमताओं के कारण वृद्धि हो रही है। पीएमआई आंकड़ों से पता चला है कि भारत में वस्तु उत्पादकों ने सेवा प्रदाताओं की तुलना में उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की है। इनकी वृद्धि की गति अप्रैल, 2024 के बाद से सबसे मजबूत हो गई है।
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सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मामूली नरमी
जुलाई के दौरान सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में थोड़ी नरमी देखी गई। हालांकि ऐतिहासिक मानकों के अनुसार वृद्धि दर तेज रही। निजी क्षेत्र के परिचालन में सुधार जारी रहा। कुल बिक्री, निर्यात ऑर्डर और उत्पादन स्तर में तेज वृद्धि दिखाई दी। हालांकि कारोबारी विश्वास सकारात्मक बना रहा, लेकिन कुछ प्रतिस्पर्धा और महंगाई के दबाव को लेकर चिंतित होने के कारण यह लगभग ढाई साल के निचले स्तर पर आ गया। रोजगार सृजन की दर 15 महीनों में सबसे कम रही।