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भीषण गर्मी बिगाड़ रही बजट: 2024 में 80 फीसदी से ज्यादा बढ़े प्याज-आलू के दाम; बढ़ेगी आर्थिक असमानता

Sat, 26 Jul 2025 02:14 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो/डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/डेस्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 26 Jul 2025 02:14 AM IST
सार

एक अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जलवायु परिवर्तन से फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं  ग्लोबल वार्मिग के चलते 18 देशों में जलवायु से जुड़े 16 खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। अध्ययन में कहा गया है कि कीमतों में ऐसे उतार-चढ़ाव से आर्थिक असमानता बढ़ेगी।
 

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Extreme heat is ruining the budget, onion and potato prices will increase by more than 80% in 2024
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद

विस्तार

जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी के कारण भारत में बीते साल खाद्य कीमतों में बेतहाशा उछाल देखा गया। खास तौर पर प्याज और आलू की कीमतों में 2024 की दूसरी तिमाही में 80 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया। यह खुलासा एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में हुआ है, जिसका नेतृत्व बार्सिलोना सुपरकंप्यूटिंग सेंटर के मैक्सिमिलियन कोट्ज ने किया हैं।

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अध्ययन में यूरोपीय सेंट्रल बैंक, पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च और यूके के फूड फाउंडेशन के विशेषज्ञ भी शामिल थे। इसमें 2022 से 2024 के बीच 18 देशों में जलवायु से जुड़ी 16 खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इनमें से कई घटनाएं 2020 से पहले के सभी ऐतिहासिक उदाहरणों से कहीं ज्यादा थीं और ग्लोबल वार्मिंग से काफी प्रभावित थीं।
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विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में मई में आई भीषण गर्मी ने फसलों की पैदावार और आपूर्ति शृंखलाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। इससे सब्जियों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। प्याज और आलू के दाम 80 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में ऐसे उतार-चढ़ाव से कुपोषण बढ़ सकता है। स्वास्थ्य संबंधी नतीजे बिगड़ सकते हैं, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।
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दाम बढ़ने से कम आय वाले परिवार प्रभावित
कोट्ज ने कहा, खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का खाद्य सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खासकर कम आय वाले परिवारों पर। खाद्य पदार्थों की कीमतें जब बढ़ती हैं, तो कम आय वाले परिवारों को अक्सर कम पौष्टिक और सस्ती खाद्य वस्तुओं का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह के आहार कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग जैसी कई स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े हुए हैं।

 उच्च महंगाई से चुनाव नतीजों पर भी असर
शोधकर्ताओं ने कहा, जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य कीमतें मुख्य महंगाई को भी बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए मूल्य स्थिरता बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। खासकर विकासशील देशों में जहां घरेलू बजट में खाद्य उत्पादों का बड़ा हिस्सा होता है। यही नहीं, उच्च महंगाई चुनाव परिणामों को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। लोकलुभावन दलों के लिए समर्थन बढ़ा सकती हैं।

 
चेतावनी : नहीं सुधरे तो और खराब होंगे हालात
शोधकर्ताओं ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए तत्काल उपाय करने का आह्वान किया। कोट्ज ने कहा, जब तक हम शुद्ध-शून्य उत्सर्जन तक नहीं पहुंच जाते, तब तक चरम मौसम और भी बदतर होता जाएगा। यह पहले से ही फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है और दुनियाभर में खाद्य कीमतों को बढ़ा रहा है।
 

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