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RBI: वैश्विक संकटों से निपटने को आरबीआई की बड़ी तैयारी, जोखिम कवच दोगुना कर मजबूत की अर्थव्यवस्था की सुरक्षा

Sat, 23 May 2026 06:58 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 23 May 2026 06:58 AM IST
सार

आरबीआई ने वैश्विक आर्थिक संकट, महंगे तेल और बाजार में अस्थिरता से निपटने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 1.09 लाख करोड़ रुपये का जोखिम प्रावधान किया है। यह पिछले साल से दोगुना से ज्यादा है। केंद्रीय बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधिशेष भी देने का फैसला किया है। इस कदम से सरकार को आर्थिक प्रबंधन और बाजार स्थिरता बनाए रखने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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Major Preparations to Tackle Global Crises RBI Strengthens Economic Security by Doubling Risk Buffer
महंगे तेल और तनाव के बीच आरबीआई सतर्क - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दुनिया भर में बढ़ते आर्थिक तनाव, महंगे कच्चे तेल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देश की अर्थव्यवस्था को संभावित संकटों से बचाने के लिए अपने जोखिम कवच यानी ‘रिस्क बफर’ को दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया है। आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.09 लाख करोड़ रुपये जोखिम प्रावधान में रखने का फैसला किया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 44,900 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस फैसले को भारत की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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आखिर आरबीआई ने जोखिम कवच इतना बड़ा क्यों किया?
आरबीआई ने साफ संकेत दिया है कि वह वैश्विक और घरेलू आर्थिक जोखिमों को हल्के में नहीं ले रहा। दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। ईरान संकट और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता से भी दबाव बढ़ा है। ऐसे हालात में अगर अचानक बड़ा आर्थिक झटका लगता है तो केंद्रीय बैंक को मजबूत वित्तीय सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। इसी कारण आरबीआई ने अपनी बैलेंस शीट को ज्यादा सुरक्षित बनाने का फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने कंटिंजेंट रिस्क बफर को बैलेंस शीट के 6.5 फीसदी पर बनाए रखा है। हालांकि पिछले साल यह 7.5 फीसदी था, लेकिन आरबीआई की कुल बैलेंस शीट 20.6 फीसदी बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी वजह से जोखिम प्रावधान की राशि भी तेजी से बढ़ गई।
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सरकार को रिकॉर्ड अधिशेष से क्या फायदा मिलेगा?
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरण करने का फैसला भी किया है। यह सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। बजट 2026-27 में सरकार ने आरबीआई, सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये लाभांश और अधिशेष मिलने का अनुमान लगाया था। आरबीआई का यह रिकॉर्ड हस्तांतरण उस लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा करेगा। इससे सरकार को महंगे तेल, सब्सिडी, संभावित राजस्व कमी और बढ़ते खर्चों के बीच राजकोषीय प्रबंधन संभालने में मदद मिलेगी। साथ ही अतिरिक्त कर्ज लेने का दबाव भी कुछ कम हो सकता है।
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बाजार और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा?
अब बाजार की नजर सोमवार को बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर रहेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बाजार ने इसे सरकार पर वित्तीय दबाव कम करने वाला कदम माना, तो बॉन्ड यील्ड को राहत मिल सकती है। हालांकि महंगे तेल, युद्ध जैसे हालात और कर संग्रह को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है। आरबीआई ने अपनी सुरक्षा दीवार इसलिए भी मजबूत की है क्योंकि उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार, सरकारी प्रतिभूतियां और सोने जैसी बड़ी संपत्तियां हैं। डॉलर-रुपया विनिमय दर, सोने की कीमत और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर उसकी बैलेंस शीट पर पड़ता है। ऐसे में मजबूत जोखिम कवच भविष्य के झटकों से बचाव का काम करेगा।


आरबीआई की आय इतनी तेजी से कैसे बढ़ी?
आरबीआई की आय में भी इस साल मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय बैंक की सकल आय 26.4 फीसदी बढ़ी, जबकि खर्च और जोखिम प्रावधान से पहले व्यय 27.6 फीसदी बढ़ा। इसके बावजूद आरबीआई की शुद्ध आय पिछले साल के 3.13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.96 लाख करोड़ रुपये हो गई। सोने की कीमतों में तेजी और विदेशी संपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन से बैलेंस शीट का आकार बढ़ा। आरबीआई मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा भंडार पर मिलने वाले ब्याज, अमेरिकी बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों, रुपये-डॉलर लेनदेन और बैंकों को दी जाने वाली तरलता सुविधा से कमाई करता है।
 
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