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LPG: 92700 मीट्रिक टन गैस लेकर आ रहे शिवालिक और नंदा, सरकार ने बताया- कालाबाजारी के खिलाफ देशभर में छापेमारी

Sat, 14 Mar 2026 04:47 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 14 Mar 2026 04:47 PM IST
सार

भारत की ऊर्जा सुरक्षा, एलपीजी आपूर्ति और कालाबाजारी पर सरकार की ओर से क्या बताया गया है। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें।

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LPG Supply India Energy Security Mundra Port Kandla Port Black Marketing Raids Indian Sailors Evacuation
एलपीजी संकट - फोटो : amarujala.com

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार सक्रिय है। भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गई हैं। एक तरफ जहां भारी मात्रा में एलपीजी गैस लेकर विशाल टैंकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में आपूर्ति शृंखला को बाधित करने वालों के खिलाफ एजेंसियों ने सख्त रुख अपना लिया है।

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गैस आपूर्ति और पोर्ट लॉजिस्टिक्स
शनिवार को सरकार की ओर से बताया गया कि 'शिवालिक' और 'नंदा' नाम के एलपीजी टैंकर इस समय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज पास को पार कर चुके हैं और भारत की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यह एक बड़ा ऊर्जा लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन है, क्योंकि ये दोनों पोत कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन गैस का बड़ा शिपमेंट लेकर आ रहे हैं। 
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जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि तय योजना के मुताबिक, ये वाणिज्यिक जहाज पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों- मुंद्रा पोर्ट और कांडला पोर्ट पर एंकर करेंगे। शेड्यूलिंग के अनुसार ये शिपमेंट 16 और 17 मार्च को भारत पहुंच जाएंगे। इतनी बड़ी मात्रा में गैस की आवक से घरेलू बाजार में ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी और औद्योगिक व घरेलू मांग को सुचारू रूप से पूरा किया जा सकेगा।
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घबराहट के कारण बढ़े गैस बुकिंग के मामले
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है; हालांकि, अभी तक किसी भी प्रकार की स्टॉक की कमी की सूचना नहीं मिली है। शर्मा ने बताया कि घबराहट में बुकिंग के मामले अब भी बहुत अधिक हैं। उन्होंने कहा, "जो आंकड़ा मैंने कल आपके साथ साझा किया था - लगभग 75 से 76 लाख बुकिंग - वह अब बढ़कर लगभग 88 लाख हो गया है।"

शर्मा ने कहा, "हमें विभिन्न स्थानों और स्रोतों से शिकायतें मिल रही हैं कि गैस सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहे हैं। मैं इस अवसर पर एक बार फिर स्पष्ट करना चाहूंगी कि शहरी क्षेत्रों में पिछली डिलीवरी और अगली बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अनिवार्य अंतराल है और ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिनों का है। यदि आप इस अवधि के समाप्त होने से पहले सिलेंडर बुक करने का प्रयास करते हैं, तो बुकिंग सफल नहीं होगी। कृपया वर्तमान में उपलब्ध डिजिटल बुकिंग साधनों का उपयोग करें। इनमें आईवीआरएस, एसएमएस बुकिंग, व्हाट्सएप बुकिंग और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की ओर से प्रदान किए गए मोबाइल एप्लिकेशन शामिल हैं। सिलेंडर बुक करने या प्राप्त करने के लिए वितरक केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से जाने, कतार में खड़े होने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमारी तेल विपणन कंपनियों ने अतीत में लगातार आपके घर तक सीधे सिलेंडर पहुंचाए हैं और वे ऐसा करना जारी रखेंगी। इसलिए, घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।" शर्मा ने लोगों से अपील की है कि घबराकर बुकिंग न करें; तभी बुकिंग करें जब यह अत्यंत आवश्यक हो।

राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में व्यावसायिक सिलेंडरों का वितरण शुरू
व्यावसायिक सिलेंडरों को लेकर काफी चर्चा हुई, जिसके बाद व्यावसायिक सिलेंडरों के लिए भी एलपीजी की एक निश्चित मात्रा आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इस बारे राज्य सरकारों से भी बातचीत की गई। उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए ये व्यावसायिक सिलेंडर राज्य सरकारों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस संबंध में, लगभग 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यावसायिक सिलेंडरों का वितरण शुरू हो चुका है और वे उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके हैं। ऑनलाइन बुकिंग वर्तमान में लगभग 84% है; हालांकि, इस आंकड़े को लगभग 100% तक सुधारने की जरूरत है।" 

भारतीय नाविकों की सुरक्षित और सफल वापसी
कमर्शियल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स के अलावा, समुद्री क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक खबर सामने आई है। आधिकारिक सूचना के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के भीतर 30 भारतीय नाविकों को सफलतापूर्वक सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। यह कदम समुद्री ऑपरेशंस से जुड़े मानव संसाधन की सुरक्षा और संकट प्रबंधन की सफलता को दर्शाता है।

बाजार में कालाबाजारी के खिलाफ संयुक्त देशव्यापी अभियान
आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ, घरेलू बाजार में गैस और आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम किल्लत  पैदा करने वाले तत्वों पर भी कड़ा प्रहार किया जा रहा है। बाजार में कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कई संयुक्त टीमों  का गठन किया गया है, जो लगातार रेड कर रही हैं।

इस प्रवर्तन अभियान का सीधा प्रभाव कई राज्यों में देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में व्यापक कार्रवाई हुई है।  राज्य में कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए बड़े पैमाने पर 1400 स्थानों पर छापेमारी की गई है। इस दौरान अनियमितताओं में संलिप्त पाए गए 19 लोगों के खिलाफ मामले भी दायर किए गए हैं। अन्य राज्यों में भी चौकसी है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी कई जगहों पर संयुक्त टीमों द्वारा छापेमारी की जा रही है।


अब आगे क्या?
कुल मिलाकर, भारत अपनी रणनीतिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्री लॉजिस्टिक्स और आयात को सफलतापूर्वक सुरक्षित कर रहा है। 16 और 17 मार्च को मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर 92,700 मीट्रिक टन गैस की आवक से जहां देश के ऊर्जा भंडार में वृद्धि होगी, वहीं देशव्यापी छापों से कालाबाजारी नेटवर्क पर भारी दबाव बनेगा। आपूर्ति और सुशासन की यह दोहरी रणनीति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और सकारात्मक आउटलुक पेश करती है।

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