{"_id":"66f2b01e995c39773c0e9613","slug":"lilavati-hospital-trustee-s-plaint-alleging-harassment-by-hdfc-bank-is-bid-to-avoid-paying-dues-bombay-hc-2024-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mumbai: लीलावती अस्पताल के ट्रस्टी को हाईकोर्ट से झटका, कोर्ट ने कहा- उनकी अपील बकाया भुगतान से बचने की कोशिश","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Mumbai: लीलावती अस्पताल के ट्रस्टी को हाईकोर्ट से झटका, कोर्ट ने कहा- उनकी अपील बकाया भुगतान से बचने की कोशिश
Tue, 24 Sep 2024 05:57 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 24 Sep 2024 05:57 PM IST
सार
Mumbai: न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने कहा कि राज्य अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराना ‘‘अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास मात्र था।’’ अदालत ने यह फैसला 18 सितंबर को सुनाया।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बंबई उच्च न्यायालय ने लीलावती अस्पताल के एक ट्रस्टी की ओर से एचडीएफसी बैंक के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत को बकाया भुगतान से बचने की कोशिश करार दिया है। ट्रस्टी की शिकायत में आरोप लगाया गया कि बैंक की ओर से उत्पीड़न होने के कारण उनके पिता और अस्पताल के संस्थापक की मौत हो गई।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने कहा कि राज्य अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराना ‘‘अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास मात्र था।’’ अदालत ने यह फैसला 18 सितंबर को सुनाया।
विज्ञापन
अदालत ने इस वर्ष जुलाई में एचडीएफसी बैंक और उसके प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को आयोग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया जिसमें उन्हें एक अगस्त को आयोग के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
विज्ञापन
आयोग ने लीलावती अस्पताल का संचालन करने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के स्थायी ट्रस्टी राजेश मेहता द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन और वसूली विभाग की ओर से उन्हें और उनके पिता किशोर मेहता को गंभीर उत्पीड़न और मानसिक यातना दी गई।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि बैंक ने अस्पताल ट्रस्ट के कुछ पूर्व ट्रस्टी के साथ मिलीभगत की और इस उत्पीड़न के कारण 20 मई, 2024 को किशोर मेहता की मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ प्रबंधन ने किशोर मेहता पर गिरफ्तारी की तलवार लटका रखी थी, जिसके परिणामस्वरूप उनकी असामयिक मृत्यु हो गई।
मेहता पिता-पुत्र अल्पसंख्यक जैन समुदाय से हैं। बैंक ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में नोटिस को चुनौती दी और आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि आयोग के समक्ष शिकायत केवल उसके द्वारा शुरू की गई वसूली कार्यवाही से बचने के लिए दायर की गई थी।
अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि राजेश मेहता द्वारा दायर की गई शिकायत ‘‘एचडीएफसी बैंक द्वारा अपने उधारकर्ताओं के खिलाफ अपनाई गई प्रक्रिया को पटरी से उतारने और एक देनदार के रूप में कार्रवाई का सामना करने से बचने के प्रयास के अलावा कुछ नहीं थी, जो संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से 14 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी थे।’’
पीठ ने कहा, ‘‘वह (राजेश मेहता) जैन समुदाय का सदस्य होने के नाम पर आयोग का दरवाजा खटखटाकर आदेश पारित नहीं करा सकते।’’ अदालत ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता पर बकाया राशि की वसूली का दायित्व आता है, तो वह इससे बचने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय का सदस्य होने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि आयोग ने बैंक को नोटिस जारी करके अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया।
अदालत ने एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ को जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि ऐसा ‘‘अधिकार क्षेत्र के बिना किया गया और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।’’