देश के प्रत्येक किसान पर है एक लाख का कर्ज, आंकड़ों से जानिए किस हाल में हैं किसान
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केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसान आवाज उठा रहे हैं। सरकार और आंदोलनकारी किसान नेताओं के बीच गतिरोध बरकरार है। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान करने के बावजूद देश के प्रत्येक किसान पर एक लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है। आइए आंकड़ों से जानते हैं कि देश में किसानों का बना रहना कितना कठिन है।
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केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसान आवाज उठा रहे हैं। सरकार और आंदोलनकारी किसान नेताओं के बीच गतिरोध बरकरार है। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान करने के बावजूद देश के प्रत्येक किसान पर एक लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है। आइए आंकड़ों से जानते हैं कि देश में किसानों का बना रहना कितना कठिन है।
- केंद्र सरकार ने पीएम किसान निधि के लिए 14.5 करोड़ किसान परिवारों की संख्या मानी है, यानी देश में कम से कम 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं।
- साल 2018 में जारी की गई कृषि जनगणना 2015-16 के मुताबिक 68 फीसदी किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है। देश में 86 फीसदी कृषि भूमि सीमांत और छोटे किसानों के पास है। मालूम हो कि जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर तक की भूमि होती है, वे छोटे किसानों की श्रेणी में आते हैं।
- मार्च 2019 में जारी इंडियन स्टैटिकल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकार कुल 3,36,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी किसानों को देती है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1,20,500 करोड़ रुपये है। वहीं राज्यों द्वारा किसानों को 1,15,500 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में मिलते हैं।
- विभिन्न राज्यों की बात करें, तो कृषि सेंसस 2015-16 के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक लोगों के पास खेती की जमीन है। यहां 2.38 करोड़ लोग खेती से जुड़े हैं। इसके बाद बिहार में 1.64 करोड़, महाराष्ट्र में 1.52 करोड़, मध्यप्रदेश में एक करोड़, कर्नाटक 0.8 करोड़, आंध्र प्रदेश में 0.852 करोड़ लोगों के पास कृषि योग्य जमीन है।
- देश में सालों से किसान कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार द्वारा अनेक प्रयासों के बावजूद कृषि क्षेत्र पर भारी कर्ज है, जिसकी वजह से प्रति वर्ष कई किसान आत्महत्या भी कर लेते हैं। 16 अगस्त 2019 को नाबार्ड ने अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेश सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की थी, जिसके मुताबिक, देश में 52.5 फीसदी किसान परिवार कर्ज के दायरे में हैं और प्रत्येक व्यक्ति पर औसतन एक लाख रुपये से अधिक का कर्ज है।
- हालांकि सरकार कि पास किसानों की आय का कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है। लेकिन, एनएसएसओ के अनुसार, साल 2012-13 में प्रत्येक कृषक परिवार की औसत मासिक आय 6426 रुपये थी। बाद में साल 2016 में नाबार्ड की एक रिपोर्ट में कहा गया कि किसानों की मासिक आय औसतन 8931 रुपये है।
- किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सरकार कई कदम उठाती आई है। इनमें से एक सब्सिडी भी है। सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज की साल 2018-19 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रति किसान को करीब 20,000 रुपये की सब्सिडी (सभी स्रोतों से मिलाकर) मिलती है। अन्य देशों की बात करें, तो 2016 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में यह आंकड़ा 45.22 लाख है।
- कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या की संख्या काफी ज्यादा है। एनसीआरबी की साल 2019 की सुसाइड के नाम से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में खेती पर निर्भर 10,281 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। यानी 28 लोगों ने हर दिन आत्महत्या की।
- आत्महत्या के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र से आए हैं। 2019 में महाराष्ट्र में 3927 खेती से जुड़े लोगों ने आत्महत्या की।
- कर्नाटक में यह आंकड़ा 1992 है, आंध्र प्रदेश में 1024, मध्यप्रदेश में 541, छत्तीसगढ़ में 499 और तेलंगाना में भी 499 लोगों ने ही आत्महत्या की।
- हालांकि देश में रोजगार में खेती की संख्या अब भी सबसे ज्यादा यानी 41.49 फीसदी है। साल 2020 में खेती से 41.49 फीसदी, इंडस्ट्री से 26.18 फीसदी और सर्विक सेक्टर से 32.33 फीसदी लोग जुड़े हैं।
- इससे पिछले साल यानी 2019 में खेती से 42.39 फीसदी, इंडस्ट्री से 25.58 फीसदी और सर्विस सेक्टर से 32.04 फीसदी लोग जुड़े थे।
- साल 2018, 2017 और 2016 से खेती से क्रमश: 43.33 फीसदी, 44.05 फीसदी और 45.14 फीसदी लोग जुड़े थे, जो इंडस्ट्री और सर्विस क्षेत्र से ज्यादा है।