World Economic Forum: क्लॉस श्वाब ने विश्व आर्थिक मंच के अध्यक्ष पद व न्यासी बोर्ड से दिया इस्तीफा, यह है कारण
World Economic Forum: विश्व आर्थिक मंच ने सोमवार को बताया कि उसके संस्थापक क्लॉस श्वाब ने तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष और न्यासी बोर्ड के सदस्य के पद से हट गए हैं। श्वाब जिनेवा स्थित संगठन के पर्याय माने जाते हैं। आइए उनके बारे में विस्तार से जानें।
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विश्व आर्थिक मंच ने सोमवार को बताया कि उसके संस्थापक क्लॉस श्वाब ने तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष और न्यासी बोर्ड के सदस्य के पद से हट गए हैं। श्वाब जिनेवा स्थित संगठन के पर्याय माने जाते हैं। इसकी स्थापना 55 वर्ष पहले हुई थी और तब से वे इसके प्रमुख हैं। श्वाब ने बोर्ड को बताया, "मेरी हालिया घोषणा के बाद, औरे मेरे 88वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, मैंने अध्यक्ष पद व न्यासी बोर्ड के सदस्य के पद से तत्काल प्रभाव से हटने का फैसला लिया है।" रविवार को एक असाधारण बोर्ड बैठक में, बोर्ड ने श्वाब के इस्तीफे पर चर्चा की और सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष पीटर ब्रेबेक-लेटमैथ को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया।
विश्व आर्थिक मंच ने एक बयान में कहा कि भावी अध्यक्ष के चयन के लिए एक खोज समिति भी गठित की गई है। डब्ल्यूईएफ, जो स्वयं को सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए बना एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बताता है, हर वर्ष दावोस में अपनी प्रमुख वार्षिक बैठक आयोजित करता है। इसमें भारत सहित दुनिया भर के शीर्ष सरकारी और व्यापारिक जगत के दिग्गज भाग लेते हैं। दावोस में होने वाली बैठक के दौरान सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के दिग्गजों के अलावा शिक्षा, संस्कृति और नागरिक समाज से जुड़े लोगों का सबसे बड़ा जुटान होता है। डब्ल्यूईएफ ने सेवानिवृत्त अध्यक्ष और संस्थापक की उत्कृष्ट उपलब्धियों को स्वीकार किया है।
इसमें कहा गया है, "उन्होंने संवाद और प्रगति के लिए अग्रणी वैश्विक मंच तैयार किया तथा बोर्ड ने मंच के शीर्ष पर उनके 55 वर्षों के अथक नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया।" न्यासी बोर्ड में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीना जॉर्जीवा, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड, डब्ल्यूटीओ प्रमुख नगोजी ओकोन्जो-इवेला और सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शम्मुगरत्नम शामिल हैं। विश्व आर्थिक मंच ने कहा कि ऐसे समय में जब विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जटिलता से निपटने और भविष्य को आकार देने के लिए समावेशी संवाद की आवश्यकता पहले कभी इतनी अधिक महत्वपूर्ण नहीं रही।