Jio IPO: 100 मिनट में पूरा सब्सक्राइब हुआ जियो का आईपीओ, पहले दिन 69,800 करोड़ की बोलियां
- बोली हासिल करने के मामले में भारत का सबसे तेज आईपीओ बना
- 100 मिनट में शत-प्रतिशत सब्सक्रिप्शन
- ₹69,800 करोड़ से अधिक की बोलियां
- योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए आरक्षित हिस्सा 9.42 गुना सब्सक्राइब हुआ
विस्तार
मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ (IPO) ने पहले ही दिन नया रिकॉर्ड बना दिया। कंपनी का 30,213 करोड़ रुपये का आईपीओ बुधवार को खुलने के महज 100 मिनट के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इसके साथ ही यह भारत में सबसे तेजी से सब्सक्राइब होने वाला मेगा आईपीओ बन गया है। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, पहले दिन शाम पांच बजे तक निवेशकों ने 62.36 करोड़ शेयरों के लिए करीब 69,800 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं। इस दौरान आईपीओ कुल 3.16 गुना सब्सक्राइब हुआ।
इस सप्ताह की शुरुआत में एंकर निवेशकों की ओर से किए गए निवेश को शामिल करने पर आईपीओ में अब तक करीब 77,892 करोड़ रुपये की मांग सामने आई है।
बड़े निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
स्टॉक एक्सचेंज के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) यानी बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा 9.42 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस कैटेगरी में 4.90 करोड़ शेयरों के मुकाबले 46.15 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इससे साफ है कि जियो के आईपीओ में शुरुआती मांग का सबसे बड़ा हिस्सा संस्थागत निवेशकों की ओर से आया है। एंकर निवेशकों में ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े वैश्विक एसेट मैनेजर और सॉवरेन वेल्थ फंड शामिल थे। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) ने 6.13 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन किया। इस कैटेगरी में कुल 1.68 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया।
रिटेल निवेशकों ने भी बनाया रिकॉर्ड
जियो के आईपीओ में छोटे यानी रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी अहम रही। हालांकि, इस कैटेगरी का हिस्सा पहले दिन पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं हो सका। रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित 8.50 करोड़ शेयरों के मुकाबले 6.18 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह रिटेल कैटेगरी 0.73 गुना सब्सक्राइब हुई। इसके बावजूद शेयरों की मांग के लिहाज से यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में किसी भी आईपीओ के पहले दिन का सबसे बड़ा रिटेल रिस्पॉन्स रहा।
क्या है जियो आईपीओ की खासियत?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने सब्सक्रिप्शन की रफ्तार के मामले में कई बड़े आईपीओ को पीछे छोड़ दिया है। इससे पहले बजाज हाउसिंग फाइनेंस का आईपीओ पहले दिन दोपहर दो बजे तक पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ था। वहीं, 2025 में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का आईपीओ पहले दिन के अंत तक पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ था।
इसके मुकाबले 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पहले दिन के अंत तक सिर्फ 18 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला था। हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ अब तक भारत का सबसे बड़ा आईपीओ था। हालांकि, 30,213 करोड़ रुपये के इश्यू साइज के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुका है।
हुंडई और एलजी के आईपीओ से कैसे अलग है जियो का इश्यू?
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के आईपीओ से एक अहम मामले में अलग है। हुंडई और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) थे। यानी इन कंपनियों के मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी बेची थी और उससे मिलने वाली रकम शेयर बेचने वाले निवेशकों को गई थी। वहीं, जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के जरिए 27 करोड़ तक नए शेयर जारी कर रही है। इन नए शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम सीधे कंपनी को मिलेगी।
आईपीओ का मूल्य और लक्ष्य क्या है?
आईपीओ का मूल्य प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये निर्धारित किया गया है। इस मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन लगभग 108 अरब डॉलर होगा।
निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया क्यों?
संस्थागत निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया एंकर-निवेशक बुकिंग के बाद आई है। जियो ने सोमवार को 212 एंकर निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर पर करीब 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए थे। उस आवंटन की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी। कंपनी के कर्मचारियों के लिए आरक्षित शेयरों को 1.30 गुना और मौजूदा शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को 1.38 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। यह आईपीओ डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में जियो की विस्तार महत्वाकांक्षा का एक बड़ा परीक्षण है। कंपनी का 53.3 करोड़ का ग्राहक आधार इन कारोबारों की नींव है। जियो इसी ग्राहक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके एंटरप्राइज और टेक्नोलॉजी सर्विसेज से अपनी कमाई बढ़ाना चाहती है।
6G, सैटेलाइट इंटरनेट और AI पर जियो की नजर
जियो प्लेटफॉर्म्स आने वाले वर्षों में अपने कारोबार को टेलीकॉम सेवाओं से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की प्रमुख योजनाओं में 6G मोबाइल सेवाएं, होम ब्रॉडबैंड, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड, बिजनेस-टू-बिजनेस डेटा सॉल्यूशंस, एंटरप्राइज एआई एप्लिकेशन और डिजिटल कॉमर्स शामिल हैं।
आईपीओ की रकम से 27,500 करोड़ रुपये तक का कर्ज चुकाएगी जियो
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने भी सकारात्मक टिप्पणी की है। मूडीज के मुताबिक, यह आईपीओ रिलायंस इंडस्ट्रीज की क्रेडिट स्थिति के लिए फायदेमंद होगा। इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल टेलीकॉम सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड का कर्ज कम करने में किया जाएगा। इससे कंपनी पर ब्याज चुकाने का बोझ घटेगा और रिलायंस समूह को फंड जुटाने में ज्यादा सहूलियत मिलेगी। बाकी रकम का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी और डिजिटल सर्विसेज में निवेश, पूंजीगत खर्च और रोजमर्रा की कारोबारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
आईपीओ के बाद रिलायंस की हिस्सेदारी घटकर 64.5 फीसदी रह सकती है
आईपीओ से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.4 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि, लिस्टिंग के बाद भी कंपनी पर रिलायंस का नियंत्रण बना रहेगा। क्रेडिटसाइट्स के मुताबिक, आईपीओ के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी 66.4 फीसदी से घटकर करीब 64.5 फीसदी रह सकती है।
23 अक्तूबर को बंद होगा आईपीओ, 28 अक्तूबर को लिस्टिंग की तैयारी
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ शुक्रवार, 23 अक्तूबर को बंद होगा। क्रेडिटसाइट्स के मुताबिक, कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्तूबर को होनी तय है। पहले दिन के आंकड़े बताते हैं कि जियो के आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की ओर से मजबूत मांग बनी हुई है, जबकि रिटेल निवेशकों की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है। अब बाजार की नजर अगले दो दिनों में आने वाले आवेदनों पर रहेगी।