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पश्चिम एशिया तनाव: बॉन्ड बाजार में भूचाल, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.44% पर, महंगे होंगे होम और कार लोन?

Thu, 22 Oct 2026 07:22 AM IST
शिवम गर्ग बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 22 Oct 2026 07:22 AM IST
सार

  • कच्चे तेल में उबाल का क्या है इससे सीधा संबंध? इस पूरे आर्थिक संकट के पीछे की वजह क्या है? आम आदमी और निवेशकों पर इसका क्या असर होगा?
  • 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3 साल के उच्चतम स्तर 7.44% पर

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West Asia Tensions Push India 10-Year Bond Yield to 7.44%: Will Home and Car Loans Get Costlier?
बॉन्ड यील्ड में उछाल - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बेकाबू तेजी के चलते देश का बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 3 साल के उच्चतम स्तर 7.44 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पहले यह स्तर 10 मार्च 2023 को देखा गया था, जब खुदरा महंगाई दर 5.66 फीसदी बढ़ी थी। बॉन्ड बाजार में यह तेजी रातों-रात नहीं आई है, बल्कि यह इस साल की शुरुआत से ही लगातार ऊपर चढ़ रहा है।

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पिछले महज एक महीने के भीतर ही बॉन्ड यील्ड में 40 आधार अंकों की भारी तेजी दर्ज की जा चुकी है। 1 जनवरी, 2026 से लेकर अब तक यील्ड कुल 85 आधार अंक तक बढ़ चुकी है। बॉन्ड मार्केट के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल तेज है, जहां रुपया-डॉलर का जोड़ा लगभग 11 पैसे कमजोर होकर 94.9 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
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बॉन्ड यील्ड में तेजी क्यों?
इस पूरे संकट की जड़ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। पिछले एक दिन में ही तेल की कीमतों में 1.74 फीसदी की तेजी आई है। अगर पिछले हफ्ते के ट्रेंड को देखें, तो तेल की कीमतें वापस उन स्तरों पर लौट आई हैं, जो मई 2026 में नजर आए थे। हालांकि, इस बार 110 डॉलर तक का यह सफर थोड़ा अधिक क्रमिक रहा है, लेकिन इसका दबाव अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा है।
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पश्चिम एशिया के हालात एक बार फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का डर सता रहा है। तेल महंगा होने से भारत जैसे देश में जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

देश के प्रमुख बैंकों के ट्रेजरी हेड इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि कच्चे तेल के मौजूदा मूल्य स्तरों को देखते हुए बॉन्ड यील्ड आगे चलकर 7.5% तक ऊपर जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बॉन्ड यील्ड को राहत मिलने का एकमात्र रास्ता यही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आएं और लंबे समय तक टिकाऊ रूप से उसी निचले स्तर पर बनी रहें।


कर्जदारों और निवेशकों पर इसका क्या असर?
जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो इसका मतलब होता है कि वित्तीय प्रणाली में पैसे की लागत बढ़ गई है। बैंक भी अपने फंड जुटाने की बढ़ी हुई लागत का बोझ अंततः ग्राहकों पर डालते हैं। इसके आगामी दिनों में आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है। जो निवेशक फिक्स्ड इनकम या डेट म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाते हैं, उनके लिए ऊंची यील्ड पर निवेश के नए मौके तो जरूर मिलते हैं, लेकिन मौजूदा बॉन्ड पोर्टफोलियो के कैपिटल वैल्यू पर दबाव देखने को मिल सकता है। सरकार को भी बाजार से कर्ज लेने के लिए अधिक ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे राजकोषीय घाटे के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

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