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Ethanol: ISMA ने इथेनॉल आयात पर प्रतिबंध जारी रखने की मांग की, घरेलू उद्योग और किसान हितों पर दिया जोर

Tue, 15 Jul 2025 05:13 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 15 Jul 2025 05:13 PM IST
सार

आईएसएमए ने सरकार से इथेनॉल के आयात पर प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है। संघ ने चिंता जताई है कि अगर प्रतिबंध को हटाया तो किसानों के साथ-साथ घरेलू क्षमता निर्माण, निवेश और रोजगार सृजन में होने वाले लाभ को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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ISMA demands continuation of ban on ethanol import, emphasises on interests of domestic industry and farmers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (आईएसएमए) ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को इथेनॉल के विषय पर पत्र लिखा है। उन्होंने भारत के अमेरिका के साथ चल रही व्यापार चर्चाओं के बीच ईंधन मिश्रण के लिए इथेनॉल के आयात पर प्रतिबंधों को हटाने की संभावना के बारे में चिंता व्यक्त की है। पत्र में आईएसएमए ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और भारतीय किसानों के हितों के लिए इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। 

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राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति ने निभाई अमह भूमिका

आईएसएमए ने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा, जो राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (2018) पर आधारित है। 21 अगस्त 2018 की डीजीएफटी अधिसूचना द्वारा ईंधन के रूप में इथेनॉल के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखे जाने से मजबूत हुई है। देश में आत्मनिर्भर इथेनॉल अर्थव्यवस्था के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है। ब्याज सबवेंशन योजनाओं और अनुकूल विनियामक वातावरण ने देशभर में स्वदेशी एथनॉल उत्पादन क्षमता की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन दिया है।
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इन पहलों के जरिए अनेक राष्ट्रीय उद्देश्यों को प्राप्त हुए हैं। इनमें गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और उनकी आय बढ़ाना, कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, और स्वच्छ एवं सतत जैव ईंधनों को बढ़ावा देना शामिल है।

2018 से इथेनॉल उत्पादन क्षमता में 140% वृद्धि हुई
इसके परिणास्वरूप 2018 से भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता में 140 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इसमें 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। इथेनॉल मिश्रण पहले ही 18.86 प्रतिशत तक पहुँच चुका है । र देश चालू इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) के भीतर 20 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है, जो कि प्रारंभिक 2025-26 ईएसवाई लक्ष्य से पहले है।


प्रतिबंध हटाने से कई पहलों को होगा नुकसान
इस्मा ने चेताया कि ईंधन इथेनॉल आयात को खोलने से किसानों के भुगतान की प्रकिया में बाधा आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की कीमतों सीधे गन्ना के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (FRP) से जुड़ी होती हैं। इससे घरेलू क्षमता निर्माण, निवेश और रोजगार सृजन में होने वाले लाभ को भी नुकसान पहुंच सकता है।

संघ ने आशंका जताई कि अगर आयात को बढ़ावा दिया गया, तो देश के एथनॉल संयंत्रों की क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा, जिससे भारत की हरित ईंधन क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी खतरा हो सकता है। इन चिंताओं के मद्देनजर ISMA ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह ईंधन मिश्रण के लिए इथेनॉल आयात पर वर्तमान प्रतिबंध को बरकरार रखा जाए। 

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