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IRCTC: शख्स ने महज 35 रुपये के लिए किया पांच साल तक संघर्ष, जीत के बाद कराया तीन लाख लोगों का फायदा
Tue, 31 May 2022 01:50 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Tue, 31 May 2022 01:50 PM IST
सार
कोटा के रहने वाले सुजीत स्वामी ने अप्रैल 2017 में स्वर्ण मंदिर मेल में कोटा से नई दिल्ली के लिए 765 रुपये का टिकट बुक किया था। लेकिन इसे कैंसिल कराने के बाद रेलवे की ओर से उसे 665 रुपये वापस मिले। सुजीत के अनुसार, रेलवे को सर्विस टैक्स के रूप में 65 रुपये काटने थे, लेकिन उसने 100 रुपये काट लिए। यानी 35 रुपये ज्यादा।
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भारतीय रेलवे
- फोटो : iStock
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विस्तार
एक शख्स ने महज 35 रुपये के रिफंड के लिए भारतीय रेलवे के साथ पांच साल लंबी जंग लड़ी और आखिरकार उसे जीत हासिल हुई। उसके इस संघर्ष ने केवल उसे ही नहीं बल्कि करीब तीन लाख लोगों को फायदा पहुंचा है। इन पांच सालों में शख्स ने 50 से ज्यादा आरटीआई लगाई थीं।
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दरअसल, कोटा के रहने वाले इंजीनियर और आरटीआई कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने 35 रुपये का रिफंड पाने के लिए करीब 50 आरटीआई लगाई और सरकारी कार्यालयों में इन पांच सालों में कई पत्र लिखे। मामले पर गौर करें तो स्वामी ने अप्रैल 2017 में स्वर्ण मंदिर मेल में कोटा से नई दिल्ली के लिए 765 रुपये का टिकट बुक किया था। यह टिकट उस साल दो जुलाई की यात्रा के लिए था। लेकिन वेटिंग की वजह से उसे टिकट कैसिंल कराना पड़ा। कैंसिलेशन के बाद उसे 665 रुपये वापस मिले। सुजीत के अनुसार, रेलवे को सर्विस टैक्स के रूप में 65 रुपये काटने थे, लेकिन उसने 100 रुपये काट लिए। यानी 35 रुपये ज्यादा।
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इसके बाद उसकी इन 35 रुपये के लिए रेलवे के साथ जंग शुरू हुई और पूरे पांच साल तक जारी रही। अपने 35 रुपये वापस लेने के लिए स्वामी ने आरटीआई के जरिए रेलवे से जानकारी मांगी। लगातार आरटीआई लगाने के बार उसे जो जबाव मिला, उसके मुताबिक रेलवे ने 2.98 लाख टिकट बुक कराने वाले लोगों से कैंसिलेशन के दौरान प्रति यात्री 35 रुपये सेवाकर के रूप लिए। इस जानकारी के सामने आने के बाद शख्स ने अपने संघर्ष को और आगे बढ़ाया और रिफंड को लेकर रेल मंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिख डाले।
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सुजीत ने अपने पत्र में इन लाखों लोगों से बसूले गए कर को रिफंड करने की मांग की। मामले को बढ़ता देख 2019 में रेलवे ने उसे 35 की जगह 33 रुपये रिफंड कर दिए। लेकिन सुजीत ने अपनी तरह रेलवे की मनमानी के शिकार अन्य लोगों को रिफंड दिलाने की ठान ली और अपने दो रुपये के बकाया रिफंड के साथ अन्य 2.98 लाख लोगों को रिफंड दिलाने के प्रयास में जुट गए। इस बीच सुजीत ने करीब 50 से ज्यादा आरटीआई डालीं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब सुजीत स्वामी का संघर्ष रंग लाया है और पांच साल बाद रेलवे बोर्ड ने उसके दो रुपये के साथ 2.98 लाख ग्राहकों को 35 रुपये प्रति यात्री के हिसाब से 2.43 करोड़ रुपये लौटाने की मंजूरी दे दी है। स्वामी ने अपने लंबे संघर्ष में जीत के साथ लाखों लोगों का भी फायदा कर दिया है।