फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Infosys Salil Parekh US Deportation Rumors H-1B Visa Fees ICE Indian IT Sector News in Hindi

Infosys: क्या इंफोसिस के कर्मचारी को अमेरिका में किया गया था गिरफ्तार? जानिए कंपनी के सीईओ ने क्या जानकारी दी

Wed, 14 Jan 2026 09:10 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 14 Jan 2026 09:10 PM IST
सार

Infosys US Deportation Row: इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा कर्मचारी की गिरफ्तारी की खबरों को गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी को केवल प्रवेश से रोका गया था। जानें वीजा चुनौतियों और आईटी सेक्टर पर इसके असर की पूरी रिपोर्ट।

विज्ञापन
Infosys Salil Parekh US Deportation Rumors H-1B Visa Fees ICE Indian IT Sector News in Hindi
बेंगलुरु में कंपनी के तीसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों की घोषणा के दौरान कंपनी के अधिकारी। - फोटो : PTI

विस्तार

विज्ञापन

आईटी सेवा देने वाली भारत की दिग्गज कंपनी इंफोसिस ने उन सोशल मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसके एक कर्मचारी को अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया और निर्वासित कर दिया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक सलिल पारेख ने साफ किया कि किसी भी इंफोसिस कर्मचारी को अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला?

इंफोसिस का स्पष्टीकरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतन अनंतरामू नामक एक यूजर की ओर से किए गए एक पोस्ट के वायरल होने के बाद आया है। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि मैसूर का एक इंफोसिस कर्मचारी अमेरिका में एक प्रोजेक्ट पर तैनात था, उसे आईसीई एजेंटों ने पकड़ लिया था। पोस्ट में आगे आरोप लगाया गया कि कर्मचारी को अपना सामान पैक करने के लिए केवल दो घंटे का समय दिया गया और उसे जेल जाने या निर्वासन चुनने का विकल्प दिया गया। पोस्ट में यह भी दावा किया गया था कि फ्रैंकफर्ट में ट्रांजिट के दौरान विमान में सार्वजनिक घोषणाएं की गईं ताकि वह भाग न सके, इससे कर्मचारी को अत्यधिक अपमान का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन

सीईओ सलिल पारेख ने क्या कहा?

कंपनी की तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए पारेख ने इन अफवाहों पर विराम लगाया। उन्होंने कहा, "किसी भी इंफोसिस कर्मचारी को किसी अमेरिकी प्राधिकरण की ओर से पकड़ा नहीं गया है। कुछ महीने पहले, हमारे एक कर्मचारी को अमेरिका में प्रवेश से इनकार कर दिया गया था और उसे वापस भारत भेज दिया गया था"।

विज्ञापन
विज्ञापन

आईटी सेक्टर के लिए वीजा संकट क्यों खतरा?

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का 280 अरब डॉलर का आईटी उद्योग कई वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी बाजार, जो भारतीय आईटी फर्मों के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, वहां एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों को लेकर सख्ती काफी बढ़ गई है।

अमेरिका में भारतीय कर्मचारियों के लिए क्या है चुनौती?

  • वीजा शुल्क में भारी वृद्धि: नए एच-1बी वीजा के लिए 1,00,000 डॉलर का शुल्क लागू किया गया है।
  • कड़ी स्क्रीनिंग: वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग और प्रोसेसिंग में अप्रत्याशित देरी ने भारतीय कंपनियों के लिए क्रॉस-बॉर्डर डिलीवरी को जटिल बना दिया है।
  • रणनीतिक बदलाव: बढ़ती अनिश्चितता के बीच, भारतीय कंपनियां अब इन वीजा पर निर्भरता कम करने के प्रयास तेज कर रही हैं।

अब आगे क्या?

इंफोसिस ने कहा है कि कंपनी भारत और अमेरिका में मौजूद कर्मचारियों के मिश्रण का उपयोग करने की अपनी रणनीति को जारी रखेगी। वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और वीजा संबंधी बाधाओं के बावजूद, भारतीय आईटी उद्योग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के तेजी से विस्तार के माध्यम से विकास की नई राह तलाश रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed