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पिछले तीन सालों में इस तरह भारतीय रेलवे ने कमाए 9,000 करोड़ रुपये
Fri, 28 Feb 2020 04:13 PM IST
अनवर अंसारी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 28 Feb 2020 04:13 PM IST
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भारतीय रेल
- फोटो : Social media
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2017 और 2020 के बीच टिकट कैंसिलेशन चार्ज और वेट-लिस्टेड टिकट्स के नॉन-कैंसिलेशन से 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। रेलवे द्वारा एक आरटीआई के जवाब में इस बात की जानकारी दी है।
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कोटा के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआरआईएस) में याचिका दायर कर इस संबंध में जवाब मांगा था। इसके जवाब में सीआरआईएस ने बताया कि उन्हें एक जनवरी 2017 से 31 जनवरी 2020 की तीन साल के समयावधि के दौरान साढ़े नौ करोड़ से अधिक यात्रियों के वेट-लिस्टेड टिकट्स कैंसल नहीं हुए थे।
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इन यात्रियों के कारण भारतीय रेलवे को राजस्व में 4,335 करोड़ का मुनाफा हुआ है। वहीं, एक जनवरी 2017 से 31 जनवरी 2020 के बीच रेलवे ने कंफर्म्ड टिकट्स की कैंसिलेशन फीस से 4,684 करोड़ रुपये कमाए हैं।
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जवाब में बताया गया है कि इन दोनों मामलों में अधिकांश कमाई स्लीपर क्लास के टिकट्स से हुई है। इसके बाद थर्ड एसी के टिकट्स से सबसे ज्यादा आय हुई। वहीं, बताया गया है कि इंटरनेट और काउंटर्स से टिकट खरीदने वाले लोगों की संख्या में बड़ा अंतर देकने को मिला है। तीन साल की अवधि में करीब 145 करोड़ से अधिक यात्रियों ने इंटरनेट के जरिए टिकट्स खरीदे, जबकि 74 करोड़ से ज्यादा लोगों ने काउंटर्स से टिकट्स खरीदे।
कार्यकर्ता स्वामी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भारतीय रेलवे की रिजर्वेशन पॉलिसी पर आरोप लगाया है कि वह भेदभावपूर्ण है। उन्होंने इसमें रिजर्वेशन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पॉलिसी में अंतर की बात कही है, जो कि यात्रियों पर अनावश्यक वित्तीय और मानसिक बोझ डालती है।