SAF: इंडियन ऑयल को मिला जले हुए खाद्य तेल से हवाई जहाज का ईंधन बनाने का सर्टिफिकेशन, जानें इसके बारे में सबकुछ
रसोई में व्यंजन बनाने के लिए इस्तेमाल होने के बाद आमतौर पर कुकिंग ऑयल कचरे के रूप में बर्बाद हो जाता है। हालांकि इंडियन ऑयल अब इसका इस्तेमाल टिकाऊ एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने के लिए करेगी। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है एसएएफ और इसका क्या लाभ है?
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विस्तार
इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी ने टिकाऊ एविएशन फ्यूल (SAF) उत्पादन के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया है। कंपनी अब इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल से हवाई जहाजों के लिए ईंधन बनाने में सक्षम हो गई है। कंपनी के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने यह जानकारी दी।
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कार्बन ऑफसेटिंग और न्यूनीकरण योजना के तहत मिला सर्टिफिकेशन
कंपनी ने बताया कि यह सर्टिफिकेशन कार्बन ऑफसेटिंग और न्यूनीकरण योजना के तहत विकसीत किया गया है, ताकि इस्तेमाल किए कुंकिंग ऑयल से एसएएफ का उत्पादन किया जा सके।
कंपनी का एसएएफ को लेकर लक्ष्य
साहनी ने कहा कि हम देश में यह सर्टिफिकेशन पाने वाले एकमात्र कंपनी हैं। रिफाइनरी इस वर्ष के अंत से लगभग 35,000 टन प्रति वर्ष एसएएफ का उत्पादन शुरू कर देगी।
कंपनी यहां से करती है तेल इकट्ठा
एजेंसियां प्रमुख उपभोक्ताओं, जिनमें होटल श्रृंखलाएं, रेस्तरां और हल्दीराम जैसी कन्फेक्शनरी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी यहां से इस्तेमाल किए गए तेल इकट्ठा करती हैं और इसे पानीपत रिफाइनरी में पहुंचाती हैं, जहां इसे विमानन ईंधन में परिवर्तित किया जाता है।
सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने आगे कहा कि देश में इस तरह का तेल बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। एकमात्र चुनौती संग्रह की है। हालांकि बड़ी होटल श्रृंखलाओं से संग्रह करना आसान है, लेकिन घरों सहित छोटे उपयोगकर्ताओं से संग्रह के लिए कोई समाधान ढूंढ़ने की जरूरत है।
एसएएफ क्या है?
यह एक वैकल्पिक, गैर-पेट्रोलियम आधारित जेट ईंधन है, जिसे जैविक, नवीनीकृत या अपशिष्ट स्रोतों से बनाया जाता है। इसे बायो-जेट ईंधन, फर्स्ट/नेक्स्ट-जनरेशन बायोफ्यूल या रिन्यूएबल जेट फ्यूल भी कहा जाता है। उपलब्धता के आधार पर, इसे पारंपरिक विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ या जेट ईंधन) के साथ 50 प्रतिशत तक मिश्रित किया जा सकता है। भारत ने 2027 से अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को बेचे जाने वाले जेट ईंधन में 1 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण अनिवार्य कर दिया है।
स्पाइसजेट ने अगस्त 2018 में 75% नियमित एटीएफ और 25% जैव ईंधन के मिश्रण का उपयोग करके एक परीक्षण उड़ान का संचालन किया था। इसके बाद, इंडिगो ने फरवरी 2022 में एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर 10% एसएएफ मिश्रण वाली उड़ान का प्रदर्शन किया ।
SAF निम्न स्रोतों से बनाया जा सकता है:
- खाना पकाने का इस्तेमाल किया हुआ तेल, पशु वसा, पौधों के तेल,
- कृषि व वानिकी अवशेष, नगरपालिका कचरा (जैसे भोजन का अपशिष्ट), शैवाल, इंडस्ट्रियल वेस्ट आदि,
- स्मार्ट विकल्प, जैसे ‘power-to-liquid’ (CO₂ और बिजली के उपयोग से निर्मित), कुछ तकनीकों में डिफॉरेस्टेशन-रहित फीडस्टॉक्स का भी उपयोग होता है।
एसएएफ के लाभ
- जीवनचक्र उत्सर्जन में भारी कटौती, SAF पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में 60-80% तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम कर सकता है,
- कोर प्रदूषण में कमी, यह सल्फर और पार्टिकुलेट (धूलकण) उत्सर्जन को भी काफी कम कर सकता है, आमतौर पर 90 से 100% तक,
- कार्बन लूप को बंद करना, पौधे CO₂ अवशोषित करते हैं, और इसे SAF के जलने पर उसी मात्रा में वापस छोड़ते हैं। इससे नेट कार्बन इम्पैक्ट कम होता है।
वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
- उपलब्धता और आपूर्ति, अभी SAF की वैश्विक आपूर्ति बहुत सीमित है। यह कुल जेट ईंधन का मात्र 0.2 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत है।
- उच्च लागत, SAF पारंपरिक ईंधन से 2 से 3 गुना महंगा है। इससे एयरलाइन्स के लिए अपनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
- फीडस्टॉक की सीमित उपलब्धता और प्रतियोगिता (खाद्य, कृषि आदि क्षेत्रों में) भी एक बड़ी बाधा है।