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Indian Economy: CEA बोले- वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत सकारात्मक, राजकोषीय घाटा व सरकारी कर्ज घटना बड़े सुधार
Wed, 18 Jun 2025 01:05 PM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 18 Jun 2025 01:05 PM IST
सार
देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की संभावनाएं शानदार हैं। उन्होंने कहा कि देश आर्थिक मौर्चे पर 'चमकदार जगह' (Bright Spot) के रूप में उभरा है।
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वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार
- फोटो : ANI
विस्तार
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के पास अवसर और संभावनाओं की कमी नहीं है। ऐसा मानना है देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंता नागेश्वरन का। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत 'चमकदार जगह' (Bright Spot) के रूप में सामने आया है। देश की अर्थव्यवस्था में निरंतर मजबूती दिखी, जो आज के कठिन वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि है।
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2022 से वैश्विक स्तर पर संघर्ष और व्यवधान लगातार बढ़े
फरवरी, 2022 से शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी हिंसक संघर्ष, इस्राइल और ईरान के चिंताजनक टकराव, ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंकाओं के बीच एक साक्षात्कार में नागेश्वरन ने कहा, वर्ष 2022 से वैश्विक स्तर पर संघर्ष और व्यवधान लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब ये ज्यादा तीव्र और अप्रत्याशित हो गए हैं, जिससे दुनिया भर में आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा हुई है। हालात विकास के लिए और भी जटिल बन गए हैं। आज वैश्विक माहौल लगभग सभी देशों के लिए कठिन हो गया है। ऊपर की तरफ जाने की संभावनाओं से अधिक नीचे गिरने का जोखिम (downside risks) बढ़ गया है।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने यह बड़ी चुनौतियां, लेकिन भारत सकारात्मक
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंता नागेश्वरन ने कहा, यह स्थिति केवल भारत की नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने यह चुनौती बड़ी होती जा रही है। हालांकि, इस कठिन परिदृश्य में भी भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है। देश की अर्थव्यवस्था एक सकारात्मक उदाहरण पेश करती है।
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आर्थिक मोर्चे पर ये बड़े सुधार: राजकोषीय घाटा और सरकारी कर्ज घटा
नागेश्वरन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने 2020 में फैली COVID-19 महामारी के बाद अच्छी रिकवरी की है। देश में मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही भारत का राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) और सरकारी कर्ज भी कम हुआ है। आर्थिक मोर्चे पर ये बड़े सुधार हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और इसका असर भारत और अमेरिका के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर भी हुआ है। बॉन्ड की उपज में अंतर कम होने से ये अंतर साफ दिख रहा है।
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भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 6.5 प्रतिशत, यह बड़ी उपलब्धि
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत की लगभग 6.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने 2008 में आई वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते 17-18 साल में वैश्विक आर्थिक माहौल पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा है।
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विपरीत परिस्थितियों में भी भारत स्थायित्व और विकास की दिशा में बढ़ रहा है
नागेश्वरन ने बताया कि भारत सरकार देश की अर्थव्यवस्था को 7 प्रतिशत या उससे अधिक की दर से बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हालांकि, आज की अनिश्चित और कठिन वैश्विक स्थितियों में भी 6.5 प्रतिशत की दर को बनाए रखना एक मजबूत उपलब्धि मानी जानी चाहिए। भारत विपरीत परिस्थितियों में भी स्थायित्व और विकास की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाए हैं।