Infrastructure: इन्फ्रा में निवेश बढ़ाने से वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ेगा भारत, कृषि को मिलेगी मजबूती
हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन एवं सीईओ पवन मुंजाल ने कहा कि पूंजीगत निवेश, एग्री-क्रेडिट, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कर्ज और कम टैक्स स्लैब के बजट प्रस्तावों से खर्च करने योग्य आय बढ़ेगी। इससे वाहन क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी।
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आम बजट की घोषणाएं छोटे अप्लायंसेज, पैकेज्ड उत्पाद, छोटी कारों और दोपहिया वाहनों की घरेलू मांग को बढ़ा सकती हैं। डाबर इंडिया लिमिटेड के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि बजट उपभोक्ता वर्ग और विशेष रूप से मध्यम वर्ग की जेब में अधिक आय डालने का वादा करता है। बुनियादी ढांचे के विकास पर पूंजीगत खर्च में 33 फीसदी वृद्धि सबसे सकारात्मक बात है, जो भारत को वैश्विक शक्ति बनाने की ओर ले जाएगा।
- 10 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे बुनियादी ढांचे के विकास पर, जो 33 फीसदी ज्यादा
उन्होंने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए हर साल 10,000 करोड़ रुपये का अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाने का सरकार का फैसला समग्र उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में मदद करेगा। ब्यूरो
कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन एवं सीईओ पवन मुंजाल ने कहा कि पूंजीगत निवेश, एग्री-क्रेडिट, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कर्ज और कम टैक्स स्लैब के बजट प्रस्तावों से खर्च करने योग्य आय बढ़ेगी। इससे वाहन क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी।
- गोदरेज अप्लायंसेज के कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, यह प्रगतिशील बजट है। इसमें विकास दर, बुनियादी ढांचे में निवेश और कृषि अर्थव्यवस्था पर ध्यान दिया गया है। बड़े उपकरणों की बिक्री पिछले साल सुस्त रही है। लेकिन, कमोडिटी की कीमतों में नरमी से इस साल बिक्री में तेजी दिख सकती है।
निवेश में वृद्धि से विकास दर को मिलेगी रफ्तार
मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा, बजट निवेश और विकास को बढ़ावा देगा। पुराने सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग से वाहनों की मांग थोड़ी बढ़ सकती है। सरकार अगर इसके लिए कुछ धन आवंटित करती तो वाहनों की मांग और बढ़ जाएगी।
जैफरीज के विश्लेषकों का दावा
आयकर में कटौती से 15 लाख रुपये से कम कमाई वाले व्यक्तियों के लिए 2-4 फीसदी की अतिरिक्त बचत होगी
कुछ चिंताएं भी, जिनको दूर करने के लिए घोषणाएं काफी नहीं
विश्लेषकों का कहना है कि आम चुनाव से पहले मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट में व्यक्तिगत आयकर दरों में किया गया संशोधन ग्रामीण भारत में मांग बढ़ाने के लिए काफी नहीं है। उनका कहना है कि उच्च महंगाई लंबे समय से घरेलू खपत को प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों में, जहां उपभोक्ता विवेकाधीन खर्च से बचते हुए दैनिक खर्चों पर ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं। कमोडिटी की कीमतों में नरमी देरी से आई है।
- अनाज, दूध और दाल समेत अन्य कच्चे माल की लागत अब भी पिछले साल के मुकाबले 25-40 फीसदी अधिक है। ऐसे में कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने पर मजबूर होना पड़ा। इससे मांग प्रभावित हुई है।
- विश्लेषकों ने कहा, लोग अपनी जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं। व्यक्तिगत आयकर दरों में संशोधन से जो अतिरिक्त राशि उनके हाथ में आएगी, वह उतनी बड़ी नहीं होगी कि लोगों को खर्च करने की अतिरिक्त आजादी दे। 15 लाख की सालाना कमाई वाले लोगों के लिए संशोधन उतना महत्वपूर्ण नहीं है।