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India-USA Trade Deal: व्यापार वार्ता के बाद अंतिम नतीजे का अमेरिका को भी इंतजार; भारत की अनदेखी नहीं कर सकता

Sat, 02 Aug 2025 05:13 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 02 Aug 2025 05:13 AM IST
सार

अमेरिका को पता है कि वर्तमान वैश्विक और भारत की घरेलू परिस्थितियों में वह भारत से कितना लाभ ले सकता है। सारी बातों पर विचार कर ही ट्रंप प्रशासन ने रूस से ऊर्जा-तेल आयात, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई अन्य क्षेत्रों पर टैरिफ या जुर्माना के मामले में फिलहाल कुछ नहीं कहा और भारत संग समझौते में बीच के रास्ते का दरवाजा खुला रखा है।

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India-USA Trade Deal: America is also waiting for final outcome of trade talks; cannot ignore India
भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के साथ रूस से तेल-ऊर्जा आयात पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की थी। हालांकि इसके बाद जब इससे संबंधित कार्यकारी आदेश जारी किए गए तब इस सूची में दवा उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पाद पर चुप्पी साध ली गई।

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आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की तरह अमेरिका को भी द्विपक्षीय व्यापार समझौता मामले में अंतिम नतीजे पर पहुंचने और वार्ता के जरिए बीच का रास्ता निकलने का भरोसा है। यही कारण है कि कार्यकारी आदेश में जरूरी वस्तुओं पर टैरिफ को बाहर रखा गया है और जुर्माने के बारे में चुप्पी साध ली गई। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ एसडी मुनी ने कहा, जाहिर तौर पर अमेरिका का उद्देश्य भावी द्विपक्षीय व्यापार समझौता मामले में भारत पर दबाव बनाने की है। यही कारण है कि वार्ता जारी रहने के बीच एकतरफा तौर पर ट्रंप प्रशासन ने भारत से होने वाले आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने और रूस से तेल-ऊर्जा आयात पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की थी।
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दरअसल, अमेरिका को पता है कि वर्तमान वैश्विक और भारत की घरेलू परिस्थितियों में वह भारत से कितना लाभ ले सकता है। सारी बातों पर विचार कर ही ट्रंप प्रशासन ने रूस से ऊर्जा-तेल आयात, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई अन्य क्षेत्रों पर टैरिफ या जुर्माना के मामले में फिलहाल कुछ नहीं कहा और भारत संग समझौते में बीच के रास्ते का दरवाजा खुला रखा है।
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रिश्ता सामरिक रूप से भी अहम
आर्थिक मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ अंजन रॉय ने कहा, भारत और अमेरिका का रिश्ता आर्थिक ही नहीं सामरिक रूप से भी अहम है। इन क्षेत्रों में दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरत है। भारत लोकतांत्रिक देश है। ऐसे में वह अमेरिका की मर्जी से अपने रक्षा, कृषि, उद्योग क्षेत्र को उसके हवाले नहीं कर सकता। इसे देखते हुए 25 फीसदी टैरिफ को सिर्फ दबाव की रणनीति ही कहा जा सकता है। व्यापार वार्ता में अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले उसने अपने विकल्प खुले रखे हैं। रॉय ने बताया कि एक दूसरे पर व्यापार समझौते में बढ़त हासिल करने के लिए दोनों देशों के बीच अभी अस्थाई तनातनी बनी रहेगी।

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