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Nirmala Sitharaman: 'वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूती बरकरार', बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण

Thu, 25 Sep 2025 05:26 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 25 Sep 2025 05:26 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूती और लचीलापन उसके सशक्त मैक्रोइकोनॉमिक मूलभूत कारकों की वजह से है। उन्होंने कहा कि यह पिछले दशक में सक्रिय राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के निर्माण और बेहतर शासन और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

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India strength remains intact amid global uncertainties, said Finance Minister Sitharaman
निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI

विस्तार

बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूती और लचीलापन उसके सशक्त मैक्रोइकोनॉमिक मूलभूत कारकों की वजह से है। पुणे में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 91वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अंतरराष्ट्रीय माहौल में अस्थिरता और बढ़ गई है। इसका असर कई देशों पर साफ दिख रहा है। 

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इन कारको ंसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली

वित्त मंत्री ने कहा कि लेकिन इन सभी अनिश्चित वैश्विक स्थितियों के बीच, भारत की लचीलापन सामने आता है और कई अनुकूल कारक, जैसे मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी बातें, युवा जनसांख्यिकी और घरेलू मांग पर अधिक निर्भरता, भारतीय अर्थव्यवस्था को मुख्य ताकत प्रदान करते हैं।

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सीतारमण ने कहा कि आर्थिक लचीलापन जारी रहा है, विशेष रूप से इस वर्ष अप्रैल-जून तिमाही में भी, जहां भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल आकस्मिक नहीं है। यह पिछले दशक में सक्रिय राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के निर्माण (भौतिक और डिजिटल दोनों) और बेहतर शासन और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

सरकारी बैंकों को एमएसएमई पर ध्यान बढ़ाना चाहिए

इस अवसर पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को एमएसएमई पर अपना ध्यान बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को अधिक ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा शिक्षा ऋण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी शिक्षा ऋण आवेदन अस्वीकृत न किया जाए। नागराजू ने यह भी कहा कि बैंकों को कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण देना बढ़ाना चाहिए।

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