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India Crude Import: ईरान युद्ध के बीच मार्च में रूसी कच्चे तेल का आयात तीन गुना बढ़ा, 5.3 अरब यूरो के पार नंबर

Tue, 14 Apr 2026 06:10 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 14 Apr 2026 06:10 PM IST
सार

मार्च 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात तीन गुना बढ़कर 5.3 अरब यूरो हुआ। अमेरिकी छूट और ईरान युद्ध के बीच इस उछाल के आर्थिक प्रभाव को समझें। पूरी रिपोर्ट पढ़ें। 

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India's Russian oil imports more than triple to 5.3 bn euro in Mar India Crude Import West Asia Conflict
भारत में रूसी कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस संकट के बीच, भारत ने मार्च 2026 में रूस से कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी की है। अमेरिका से मिली एक महीने की विशेष छूट का फायदा उठाते हुए, भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से रूसी तेल आयात शुरू कर दिया है, जिससे भारत एक बार फिर वैश्विक बाजार में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

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रूस से तेल के आयात में भारी उछाल

यूरोप स्थित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (सीआरईए) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात मूल्य तीन गुना से अधिक बढ़कर 5.3 अरब यूरो हो गया। मात्रा के लिहाज से भी इस आयात में दोगुना उछाल देखा गया है। कुल मिलाकर, भारत ने इस महीने 5.8 अरब यूरो के रूसी जीवाश्म ईंधन का आयात किया, जिसमें 91 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जबकि शेष हिस्से में 337 मिलियन यूरो का कोयला और 178.5 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 4 प्रतिशत की कमी आई, इसके बावजूद रूसी कच्चे तेल के आयात में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। इसके मुकाबले फरवरी में भारत 1.8 अरब यूरो के रूसी आयात के साथ तीसरे स्थान पर था। 

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सरकारी और निजी रिफाइनरियों की वापसी

इस जबरदस्त उछाल का मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर दी गई एक महीने की प्रतिबंधों से छूट थी। वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए समुद्र में पहले से मौजूद और पूर्व-मंजूर जहाजों पर यह छूट दी गई थी। इस छूट के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूसी तेल की खरीदारी रोक दी थी, ने फिर से आयात शुरू कर दिया। सीआरईए के अनुसार, इन सरकारी रिफाइनरियों के आयात में महीने-दर-महीने आधार पर 148 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जो कि मार्च 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है। मैंगलोर और विशाखापत्तनम जैसी राज्य के स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के अंत में रूसी आयात रोक दिया था, लेकिन मार्च 2026 में उन्होंने इसे फिर से शुरू कर दिया। दूसरी ओर, निजी रिफाइनरियों के आयात में 66 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई, जो अभी भी पिछले साल के इसी समय की तुलना में कम है।

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वैश्विक बाजार और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात

निर्यात के मोर्चे पर रूस पूरी तरह से एशियाई बाजारों पर निर्भर हो गया है, क्योंकि 2026 की पहली तिमाही में उसके कुल कच्चे तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा केवल चीन और भारत को दिया गया है। मार्च में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 51 प्रतिशत चीन ने और 38 प्रतिशत भारत ने खरीदा। इस परिदृश्य का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि भारतीय रिफाइनरियां इस रूसी तेल को रिफाइन करके वापस उन देशों को निर्यात कर रही हैं जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। मार्च में भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 830 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए, जिसमें यूरोपीय संघ को 304 मिलियन यूरो और अमेरिका को 168 मिलियन यूरो का निर्यात शामिल है। अकेले अमेरिका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व वाली जामनगर रिफाइनरी और तुर्की की स्टार रिफाइनरी से आयात किया, जहां मार्च में जामनगर रिफाइनरी के फीडस्टॉक का 25 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया था।

यूरोपीय संघ की चिंता और आगे की राह

भारत और अन्य देशों की इस रिफाइनिंग रणनीति ने यूरोपीय संघ (ईयू) के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। 21 जनवरी, 2026 को ईयू द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद, मार्च में उच्च जोखिम वाले 14 शिपमेंट यूरोपीय बंदरगाहों पर उतारे गए। इनमें से चार शिपमेंट भारत से आए थे, और फ्रांस इनका सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता था। सीआरईए ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों से इस मामले की जांच करने का आग्रह किया है ताकि रूसी तेल को यूरोपीय ब्लॉक में प्रवेश करने से रोका जा सके। आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी छूट समाप्त होने और ईयू की सख्ती के बाद भारत की तेल आयात और रिफाइनिंग रणनीति क्या नया मोड़ लेती है।

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