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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India's Industrial Output Growth Slows to 4.9% in April 2026; IIP Base Year Revised to 2022-23

औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटी: अप्रैल में 4.9% रही IIP ग्रोथ, सरकार ने बदला आधार वर्ष

Mon, 01 Jun 2026 06:06 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 01 Jun 2026 06:06 PM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) पर पड़ा है और अप्रैल 2026 में ग्रोथ घटकर 4.9% रह गई है। सरकार ने आईआईपी का आधार वर्ष भी 2022-23 कर दिया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें हमारी विस्तृत रिपोर्ट।

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India's Industrial Output Growth Slows to 4.9% in April 2026; IIP Base Year Revised to 2022-23
औद्योगिक उत्पादन में आ सकती है बड़ी गिरावट - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और ऊर्जा क्षेत्र में सुस्त वृद्धि का असर अब भारत के औद्योगिक उत्पादन पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत की फैक्ट्री आउटपुट यानी औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर धीमी होकर 4.9 प्रतिशत पर आ गई है। हालांकि, इस बार के आंकड़ों की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खासियत यह है कि इन्हें औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के नए 'आधार वर्ष'  2022-23 के तहत जारी किया गया है। 

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किस सेक्टर का कैसा रहा हाल?

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में IIP की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत थी, जो इस साल अप्रैल में घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई है। त्वरित अनुमान के अनुसार, सूचकांक अप्रैल 2025 के 113.1 के मुकाबले अप्रैल 2026 में 118.9 पर रहा है।

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सेक्टोरल आधार पर देखें तो:

  • मैन्युफैक्चरिंग: इस क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
  • खनन: इस क्षेत्र का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और इसमें 5.1 प्रतिशत की नकारात्मक (माइनस) ग्रोथ रही।
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  • बिजली और गैस आपूर्ति: इस क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • जल आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन: इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा 6.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

आधार वर्ष में ऐतिहासिक बदलाव: 2011-12 से 2022-23

अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश करने के लिए सांख्यिकी मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। यह बदलाव 'तकनीकी सलाहकार समिति' (टीएसी-आईआईपी) की सिफारिशों पर किया गया है, जिसकी रिपोर्ट 25 मई 2026 को जारी हुई थी। आपको बता दें कि 1937 में पहली बार आईआईपी तैयार होने के बाद से यह आधार वर्ष में 10वां संशोधन है। नए आधार वर्ष से भारत के औद्योगिक उत्पादन का अधिक सटीक, प्रासंगिक और व्यापक मापन हो सकेगा।

बदलते भारत की तस्वीर: बास्केट में क्या जुड़ा, क्या हटा?

नई आईआईपी सीरीज में देश के औद्योगिक उत्पादन में आई विविधता और नई तकनीकों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। 

  • क्या शामिल हुआ: कुल 120 नए आइटम समूह जोड़े गए हैं, जिनमें मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड (डेबिट/क्रेडिट कार्ड), सीसीटीवी कैमरे, नॉन-वोवन टेक्सटाइल, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, स्टेंट और वैक्सीन जैसी आधुनिक चीजें शामिल हैं। अब नई बास्केट में कुल 1,042 उत्पाद (463 आइटम समूहों में) शामिल हैं।
  • क्या बाहर हुआ: 64 पुराने आइटम समूहों को बास्केट से हटा दिया गया है, जिनमें मिट्टी का तेल (केरोसिन), फ्लोरोसेंट ट्यूब और सीएफएल, साइकिल/रिक्शा के ट्यूब, प्रिंटिंग मशीन और सिलाई मशीन जैसी चीजें शामिल हैं, जिनका चलन अब काफी कम हो गया है।

सरकार ने हासिल किया राजपोषीय घाटे का लक्ष्य

सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया है। लेखा महानियंत्रक द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया है।



पिछले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 15,68,936 करोड़ रुपये होने का अनुमान था, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फरवरी में संसद में प्रस्तुत किए जाने पर संशोधित करके 15,58,492 करोड़ रुपये कर दिया गया।

सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, सरकार 33.42 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने में सफल रही, जो संशोधित बजट अनुमानों (आरई) का 98.8 प्रतिशत है। 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार का व्यय 49.64 लाख करोड़ रुपये था, जो पुनर्मूल्यांकन का 98.8 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.8 प्रतिशत था।
 

सरकार का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था की आधुनिक और वास्तविक तस्वीर पेश करता है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, यह नई सीरीज ज्यादा विस्तृत जानकारी देगी; उदाहरण के तौर पर, अब नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अलग-अलग मापा जाएगा। उन्नत बास्केट से उभरते औद्योगिक उत्पादों को बेहतर जगह मिलेगी। आईआईपी के ये आंकड़े अब संदर्भ महीने से 28 दिनों के अंतराल पर हर महीने जारी किए जाएंगे, जिससे नीति निर्माताओं और बाजार निवेशकों को अर्थव्यवस्था की असली नब्ज पकड़ने में अधिक मदद मिलेगी।

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