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GDP Growth: वित्त वर्ष 2021-22 में 8.7 फीसदी की दर से बढ़ी देश की जीडीपी, जानें क्या रहा चौथी तिमाही का हाल
Tue, 31 May 2022 06:48 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Tue, 31 May 2022 06:48 PM IST
सार
वित्तवर्ष 2021-22 में यह 8.7 फीसदी की दर से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार चार फीसदी रही है।
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भारत की जीडीपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने मंगलवार का 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में देश की जीडीपी के आंकड़े पेश कर दिए हैं। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था का ताजा हाल पेश करने वाले हैं। इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी 8.7 फीसदी की दर से बढ़ी । इसके पहले वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 6.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार सुस्त
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 4.1 फीसदी रही है। इससे पहले अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 5.4 फीसदी रही थी। अनुमान जताया गया था कि कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी और रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने के कारण मार्च तिमाही में जीडीपी सुस्त रह सकती है। इन दोनों कारणों का असर चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में देखने को मिला है। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों को देखें तो जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रही थी।
राजकोषीय घाटा संशोधित लक्ष्य से कम
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 6.9 प्रतिशत के संशोधित बजट अनुमान के मुकाबले 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.71 प्रतिशत रहा है। यह संशोधित लक्ष्य से 20 बेसिस प्वाइंट (BPS) से कम कर रहा है। गौरतलब है कि बजट के अनुसार, राजकोषीय घाटे को संशोधित कर 15.91 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। ताजा आंकड़ों को देखें तो घाटा वास्तविक वित्तीय घाटे 15.87 लाख करोड़ रुपये से 4,552 करोड़ रुपये कम है।
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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 8.4% बढ़ा
बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन में अप्रैल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 8.4 फीसदी बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं कच्चे तेल का उत्पादन अप्रैल में 0.9 प्रतिशत घटा है, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
विनिवेश के लक्ष्य से चूकी सरकार
इस बीच आपको बता दें कि बीते वित्त वर्ष में सरकार विनिवेश के लक्ष्य से चूक गई। विनिवेश और विभिन्न परिसंपत्ति बिक्री से प्राप्त आय 78,000 करोड़ रुपये के एक बड़े बजट लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 14,000 करोड़ रुपये रही। यह मुख्य रूप से अब तक के इतिहास में देश के सबसे बड़े एलआईसी आईपीओ को पेश करने और इसकी लिस्टिंग में देरी की वजह से हुआ है।
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चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार सुस्त
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 4.1 फीसदी रही है। इससे पहले अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 5.4 फीसदी रही थी। अनुमान जताया गया था कि कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी और रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने के कारण मार्च तिमाही में जीडीपी सुस्त रह सकती है। इन दोनों कारणों का असर चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में देखने को मिला है। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों को देखें तो जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रही थी।
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राजकोषीय घाटा संशोधित लक्ष्य से कम
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 6.9 प्रतिशत के संशोधित बजट अनुमान के मुकाबले 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.71 प्रतिशत रहा है। यह संशोधित लक्ष्य से 20 बेसिस प्वाइंट (BPS) से कम कर रहा है। गौरतलब है कि बजट के अनुसार, राजकोषीय घाटे को संशोधित कर 15.91 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। ताजा आंकड़ों को देखें तो घाटा वास्तविक वित्तीय घाटे 15.87 लाख करोड़ रुपये से 4,552 करोड़ रुपये कम है।
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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 8.4% बढ़ा
बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन में अप्रैल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 8.4 फीसदी बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं कच्चे तेल का उत्पादन अप्रैल में 0.9 प्रतिशत घटा है, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
विनिवेश के लक्ष्य से चूकी सरकार
इस बीच आपको बता दें कि बीते वित्त वर्ष में सरकार विनिवेश के लक्ष्य से चूक गई। विनिवेश और विभिन्न परिसंपत्ति बिक्री से प्राप्त आय 78,000 करोड़ रुपये के एक बड़े बजट लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 14,000 करोड़ रुपये रही। यह मुख्य रूप से अब तक के इतिहास में देश के सबसे बड़े एलआईसी आईपीओ को पेश करने और इसकी लिस्टिंग में देरी की वजह से हुआ है।