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CEA: 'विकसित राष्ट्र बनने के लिए अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों का उठाना होगा लाभ', मुख्य आर्थिक सलाहकार का बयान

Fri, 31 Jan 2025 10:10 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 31 Jan 2025 10:10 PM IST
सार

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि भारत 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2030 तक 6.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 10.2% रहेगी। भारतीय रुपये में गिरावट से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर नागेश्वरन ने कहा कि केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए तर्कसंगत कदम सही दिशा में हैं।  

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India needs to take advantage of conducive global situations to be developed nation by 2047: CEA
वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार - फोटो : ANI

विस्तार

भारत को तेजी से आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा, ताकि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। यह बात मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कही। नागेश्वरन ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर में कमी के लिए वैश्विक कारणों को जिम्मेदार ठहराया।
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भारत के आर्थिक विकास पर क्या कहता है सर्वेक्षण
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत को अगले 20 सालों तक 8% की दर से वृद्धि करनी होगी ताकि वह 2047 तक विकसित देश बन सके। 2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण को पेश करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान मंदी को सही संदर्भ में देखना चाहिए, क्योंकि 'भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।' राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुमान के अनुसार, 2024-25 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.4% रहने की उम्मीद है। सर्वेक्षण में 2025-26 के लिए 6.3% से 6.8% के बीच वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।  
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नागेश्वरन ने बताया कि जब भी वैश्विक निर्यात वृद्धि में तेजी आती है, तो भारत की अर्थव्यवस्था को 0.5% से 1% तक अतिरिक्त बढ़त मिलती है, जिससे वृद्धि दर 7.5-8% तक पहुंच सकती है। वहीं, कृषि क्षेत्र भी 1% अतिरिक्त जीडीपी वृद्धि में योगदान दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत (विकसित राष्ट्र बनने) के लिए डॉलर के संदर्भ में नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर लगभग 10% होनी चाहिए। 
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'वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए रहे तैयार'
नागेश्वरन ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह 10% की वृद्धि हर साल औसतन हासिल नहीं होगी... कुछ सालों में यह अधिक होगी और कुछ सालों में कम, यह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा'। उन्होंने बताया कि यह कोई स्थिर संख्या नहीं है, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक प्रभाव डालेंगी। 'हमें उन अनुकूल वर्षों में इसका पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियों वाले वर्षों में न्यूनतम स्तर की वृद्धि बनाए रखनी होगी।'


हम विकसित देशों से भी मुकाबला कर रहे हैं- नागेश्वरन
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में गिरावट के कारणों पर उन्होंने कहा, 'अब हम केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे हैं, बल्कि विकसित देशों से भी मुकाबला कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि एफडीआई आकर्षित करने का सबसे बड़ा कारक लाभदायक निवेश की संभावना है, जिसे भारत पोर्टफोलियो निवेशकों और प्रत्यक्ष निवेशकों के लिए प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा, 'सरकार उभरती हुई परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही है, इसलिए एफडीआई के आंकड़ों को वैश्विक एफडीआई प्रवाह के संदर्भ में देखना चाहिए'। इसके अलावा, नागेश्वरन ने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है।
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