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Moodys: वैश्विक आर्थिक संकटों के बीच भारत सबसे लचीली अर्थव्यवस्था, जानिए मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?

Tue, 05 May 2026 02:39 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 05 May 2026 02:39 PM IST
सार

मूडीज रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2020 के बाद से दुनिया की सबसे लचीली और मजबूत उभरती बाजार अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत नीतियों ने कैसे किया अर्थव्यवस्था का बचाव, पूरी न्यूज़ स्टोरी पढ़ें और जानिए क्या हैं आगे की चुनौतियां।

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India most resilient emerging mkt economy; better placed to manage future shocks: Moody's
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

साल 2020 के बाद से दुनिया भर में आए तमाम आर्थिक तूफानों और भू-राजनीतिक संकटों के बीच, भारत सबसे मजबूत और 'लचीली' बड़ी उभरती बाजार अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। मंगलवार को जारी वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'मूडीज रेटिंग्स' की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अपनी मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए पर्याप्त और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसी भंडार ने वैश्विक संकटों के दौरान निवेशकों और बाजार का विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत अपनी मजबूत नीतियों के दम पर भविष्य में आने वाले किसी भी बड़े वैश्विक झटके का प्रबंधन करने के लिए अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है।

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मौद्रिक नीति और विदेशी मुद्रा भंडार बनी ढाल

मूडीज की 'इमर्जिंग मार्केट' रिपोर्ट उभरते बाजारों की स्थिति का गहराई से विश्लेषण करती है। इसके अनुसार, भारत का मौद्रिक नीति ढांचा बेहद स्पष्ट और पूर्वानुमानित है, जो इसे आर्थिक झटकों से बचाने में एक ढाल का काम करता है। इसके साथ ही, देश में महंगाई की उम्मीदें काफी हद तक नियंत्रित हैं और जरूरत पड़ने पर देश की विनिमय दरों में समायोजन करने की क्षमता भी अर्थव्यवस्था को लचीलापन प्रदान करती है। 

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रिपोर्ट बताती है कि भारत भविष्य के किसी भी तनाव की अवधि में मजबूत और सुलभ बफर के साथ प्रवेश करेगा, क्योंकि घरेलू फंडिंग पर इसकी निर्भरता को इसके गहरे स्थानीय बाजारों और भारी-भरकम भंडार द्वारा संतुलित किया गया है। भारत ने हाल के वैश्विक तनाव की अवधि से काफी पहले ही स्थिरता का समर्थन करने वाले प्रमुख नीतिगत विकल्प अपना लिए थे।

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इन वैश्विक संकटों से बिना नुकसान के उबरा भारत

मूडीज ने पिछले कुछ वर्षों में उभरे चार प्रमुख वैश्विक तनाव अवधियों के दौरान 10 बड़े उभरते बाजारों के प्रदर्शन का आकलन किया है, जिनमें भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्किये और अर्जेंटीना शामिल हैं। इन चार प्रमुख वैश्विक झटकों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कोविड-19 महामारी: 2020 की शुरुआत में आई वैश्विक महामारी का असर।
  • महंगाई और ब्याज दरें: 2022 में वैश्विक महंगाई में तेज वृद्धि और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में सख्ती।
  • बैंकिंग संकट: 2023 की शुरुआत में अमेरिका का क्षेत्रीय बैंकिंग तनाव।
  • टैरिफ तनाव: 2025 में नए सिरे से उत्पन्न हुआ टैरिफ तनाव।

इन सभी संकटों ने आमतौर पर विनिमय दर के दबाव, कठिन फंडिंग स्थितियों और पुनर्वित्त जोखिमों के माध्यम से उभरते बाजारों में तनाव पैदा किया। हालांकि, भारत सहित कई बड़े उभरते बाजारों ने पिछले पांच वर्षों में जोखिम प्रीमियम में तेज वृद्धि या बाजार पहुंच खोए बिना इन बड़े वैश्विक झटकों को सफलतापूर्वक झेला है। मूडीज के अनुसार, हाल के संकटों के बाद 'अपेक्षाकृत अनुकूल बाहरी बाजार स्थितियों' ने भी 2020 के बाद से उभरते बाजारों को इन झटकों को सहने में मदद की है।

चिंता का विषय: कर्ज का बढ़ता बोझ

भले ही रिपोर्ट बड़े पैमाने पर सकारात्मक है, लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण जोखिम को भी रेखांकित किया गया है। मूडीज ने चेतावनी दी है कि भारत का अपेक्षाकृत उच्च कर्ज का बोझ और कमजोर राजकोषीय संतुलन लगातार आने वाले झटकों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को सीमित कर देता है।

संक्षेप में, मूडीज का यह आकलन इस बात की पुष्टि करता है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के नीतिगत ढांचे में किए गए स्थायी सुधार और मजबूत बफर के निर्माण ने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर एक नई ताकत दी है। उच्च ऋण और राजकोषीय घाटे जैसी चुनौतियों के बावजूद, मजबूत स्थानीय बाजार, स्पष्ट नीतियां और विदेशी मुद्रा भंडार भारत को भविष्य की किसी भी आर्थिक उथल-पुथल के लिए तैयार रखते हैं।

 

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