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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती के संकेत: अक्तूबर में उत्पादन और नए ऑर्डर की धीमी वृद्धि, रोजगार में बढ़ोतरी
Mon, 02 Nov 2026 12:21 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 02 Nov 2026 12:21 PM IST
सार
भारत के विनिर्माण क्षेत्र में अक्टूबर के दौरान विस्तार जारी रहा, लेकिन इसकी गति पिछले महीने के मुकाबले कुछ कम हो गई। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सितंबर के 55.1 से घटकर 54.7 पर आ गया। उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि धीमी रही, जबकि निर्यात ऑर्डर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए।
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विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार सुस्त
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में अक्तूबर के दौरान वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई। उत्पादन और नए ऑर्डर में पहले के मुकाबले कम बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही। हालांकि, लागत दबाव में कमी से क्षेत्र को बड़ी गिरावट से बचने में मदद मिली। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई।
मौसमी उतार-चढ़ाव के प्रभाव से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर के 55.1 से घटकर अक्तूबर में 54.7 पर आ गया। हालांकि, यह अब भी अपने दीर्घकालिक औसत और 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर बना हुआ है। पीएमआई में 50 से अधिक का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार और 50 से कम का आंकड़ा गिरावट को दर्शाता है।
मांग में सुधार से नए कारोबार में बढ़ोतरी
सर्वेक्षण के मुताबिक, मांग में लगातार सुधार के कारण नए कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नए ऑर्डर की वृद्धि सितंबर के सात महीने के उच्च स्तर से थोड़ी ही कम रही और ऐतिहासिक औसत के मुकाबले मजबूत बनी रही।
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अक्तूबर में उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी होने के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार जारी रहा। कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई और कच्चे माल का भंडार भी जमा किया। हालांकि, नई भर्तियों की रफ्तार धीमी रही और कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा कमजोर हुआ।
कंपनियों को कई देशों से मिले नए ऑर्डर
एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "भारत का विनिर्माण पीएमआई पिछले महीने के 55.1 से घटकर अक्टूबर में 54.7 पर आ गया। हालांकि, यह विस्तार के दायरे में मजबूती से बना हुआ है और अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर है।" उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत मांग के कारण नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इससे उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी को समर्थन मिला।
भंडारी के मुताबिक, उत्पादकों ने पिछले आठ महीनों में सबसे अधिक मात्रा में कच्चे माल का भंडार बढ़ाया। कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों में अस्थिरता के बीच संभावित कमी से निपटने और उत्पादन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए एहतियाती भंडार तैयार किया। कंपनियों को बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, नेपाल, ओमान, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों से नए ऑर्डर मिले।
रोजगार में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी
उत्पादन की बढ़ती जरूरतों और काम के बढ़ते बोझ के कारण कारखानों में रोजगार लगातार दूसरे महीने बढ़ा। हालांकि, नई नौकरियां पैदा होने की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी रही।
मांग में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा सितंबर की तुलना में कमजोर हुआ। यह अपने दीर्घकालिक औसत से भी नीचे रहा। सर्वेक्षण में शामिल करीब 18 प्रतिशत विनिर्माण कंपनियों को उम्मीद थी कि अगले एक साल में उनका उत्पादन बढ़ेगा, जबकि बाकी कंपनियों ने तटस्थ रुख अपनाया।
लागत का दबाव फरवरी के बाद सबसे कम
सर्वेक्षण में शामिल विनिर्माण क्षेत्र के तीनों प्रमुख हिस्सों में लागत का दबाव कम हुआ। कंपनियों ने कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी की जानकारी दी, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत में महंगाई की दर फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई।
भंडारी ने कहा, "कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की लागत बढ़ने के बावजूद कुल इनपुट और आउटपुट कीमतों का दबाव पिछले महीने के मुकाबले थोड़ा कम हुआ।" एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल तैयार करता है। इसके लिए करीब 400 विनिर्माण कंपनियों के खरीद प्रबंधकों से प्रश्नावली के जरिए जवाब जुटाए जाते हैं।
भारत के कोयला उत्पादन में अक्टूबर में 42 फीसदी की वृद्धि
सरकार ने सोमवार को बताया कि अक्टूबर में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कोयले का उत्पादन 2.203 करोड़ टन रहा। अक्तूबर 2025 में यह आंकड़ा 1.549 करोड़ टन था। इस तरह सालाना आधार पर कोयला उत्पादन में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले महीने कोयले की आपूर्ति 2.111 करोड़ टन रही, जबकि अक्तूबर 2025 में यह 1.548 करोड़ टन थी। इस तरह आपूर्ति में सालाना आधार पर 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, इस क्षेत्र ने मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की है। पिछले साल अप्रैल से अक्तूबर की अवधि की तुलना में इस साल इसी अवधि के दौरान कोयला उत्पादन 10.533 करोड़ टन से बढ़कर 11.723 करोड़ टन हो गया। इसमें 11.30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह, कोयले की आपूर्ति भी 11.195 करोड़ टन से बढ़कर 12.486 करोड़ टन हो गई, जो 11.53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि ये आंकड़े खनन गतिविधियों में लगातार बनी तेजी को दिखाते हैं।
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मौसमी उतार-चढ़ाव के प्रभाव से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर के 55.1 से घटकर अक्तूबर में 54.7 पर आ गया। हालांकि, यह अब भी अपने दीर्घकालिक औसत और 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर बना हुआ है। पीएमआई में 50 से अधिक का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार और 50 से कम का आंकड़ा गिरावट को दर्शाता है।
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मांग में सुधार से नए कारोबार में बढ़ोतरी
सर्वेक्षण के मुताबिक, मांग में लगातार सुधार के कारण नए कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नए ऑर्डर की वृद्धि सितंबर के सात महीने के उच्च स्तर से थोड़ी ही कम रही और ऐतिहासिक औसत के मुकाबले मजबूत बनी रही।
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अक्तूबर में उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी होने के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार जारी रहा। कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई और कच्चे माल का भंडार भी जमा किया। हालांकि, नई भर्तियों की रफ्तार धीमी रही और कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा कमजोर हुआ।
कंपनियों को कई देशों से मिले नए ऑर्डर
एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "भारत का विनिर्माण पीएमआई पिछले महीने के 55.1 से घटकर अक्टूबर में 54.7 पर आ गया। हालांकि, यह विस्तार के दायरे में मजबूती से बना हुआ है और अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर है।" उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत मांग के कारण नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इससे उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी को समर्थन मिला।
भंडारी के मुताबिक, उत्पादकों ने पिछले आठ महीनों में सबसे अधिक मात्रा में कच्चे माल का भंडार बढ़ाया। कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों में अस्थिरता के बीच संभावित कमी से निपटने और उत्पादन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए एहतियाती भंडार तैयार किया। कंपनियों को बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, नेपाल, ओमान, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों से नए ऑर्डर मिले।
रोजगार में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी
उत्पादन की बढ़ती जरूरतों और काम के बढ़ते बोझ के कारण कारखानों में रोजगार लगातार दूसरे महीने बढ़ा। हालांकि, नई नौकरियां पैदा होने की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी रही।
मांग में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा सितंबर की तुलना में कमजोर हुआ। यह अपने दीर्घकालिक औसत से भी नीचे रहा। सर्वेक्षण में शामिल करीब 18 प्रतिशत विनिर्माण कंपनियों को उम्मीद थी कि अगले एक साल में उनका उत्पादन बढ़ेगा, जबकि बाकी कंपनियों ने तटस्थ रुख अपनाया।
लागत का दबाव फरवरी के बाद सबसे कम
सर्वेक्षण में शामिल विनिर्माण क्षेत्र के तीनों प्रमुख हिस्सों में लागत का दबाव कम हुआ। कंपनियों ने कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी की जानकारी दी, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत में महंगाई की दर फरवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई।
भंडारी ने कहा, "कुछ कच्चे माल और ऊर्जा की लागत बढ़ने के बावजूद कुल इनपुट और आउटपुट कीमतों का दबाव पिछले महीने के मुकाबले थोड़ा कम हुआ।" एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल तैयार करता है। इसके लिए करीब 400 विनिर्माण कंपनियों के खरीद प्रबंधकों से प्रश्नावली के जरिए जवाब जुटाए जाते हैं।
भारत के कोयला उत्पादन में अक्टूबर में 42 फीसदी की वृद्धि
सरकार ने सोमवार को बताया कि अक्टूबर में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कोयले का उत्पादन 2.203 करोड़ टन रहा। अक्तूबर 2025 में यह आंकड़ा 1.549 करोड़ टन था। इस तरह सालाना आधार पर कोयला उत्पादन में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले महीने कोयले की आपूर्ति 2.111 करोड़ टन रही, जबकि अक्तूबर 2025 में यह 1.548 करोड़ टन थी। इस तरह आपूर्ति में सालाना आधार पर 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, इस क्षेत्र ने मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की है। पिछले साल अप्रैल से अक्तूबर की अवधि की तुलना में इस साल इसी अवधि के दौरान कोयला उत्पादन 10.533 करोड़ टन से बढ़कर 11.723 करोड़ टन हो गया। इसमें 11.30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह, कोयले की आपूर्ति भी 11.195 करोड़ टन से बढ़कर 12.486 करोड़ टन हो गई, जो 11.53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि ये आंकड़े खनन गतिविधियों में लगातार बनी तेजी को दिखाते हैं।