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NITI Aayog: भारत चीन प्लस रणनीति का लाभ उठाने में वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से पिछड़ा; नीति आयोग की रिपोर्ट
Wed, 04 Dec 2024 04:18 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 04 Dec 2024 04:18 PM IST
सार
Niti Aayog Report: भारत को चीन स्थान पर विनिर्माण के एक पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों ने अपने विनिर्माण आधारों में विविधता लाने की इच्छुक कंपनियों को आकर्षित करने में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है। आइए इस बारे में और जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
विस्तार
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को चीन प्लस वन रणनीति के कारण पैदा हुए अवसरों का लाभ उठाने में सीमित सफलता मिली है। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में वैश्विक व्यापार परिदृश्य भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से काफी प्रभावित हुआ है। जिसके कारण, इस नीति का सीमित फायदा मिला है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को चीन स्थान पर विनिर्माण के एक पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में बताया गया है कि वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों ने अपने विनिर्माण आधारों में विविधता लाने की इच्छुक कंपनियों को आकर्षित करने में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है।
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नीति आयोग ने कहा, "भारत को अब तक चीन प्लस वन रणनीति को अपनाने में सीमित सफलता मिली है। वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया इस रणनीति के बड़े लाभार्थी बन गए हैं"। रिपोर्ट में कहा गया है कि सस्ते श्रम, सरलीकृत कर प्रणाली, कम टैरिफ और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) सहित सक्रिय व्यापार नीतियों जैसे कारकों ने इन देशों को भारत पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दी है।
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भारत के लिए, नीति आयोग का कहना है कि चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम अवसर और जोखिम दोनों पेश करते हैं। सकारात्मक पक्ष पर, बहुराष्ट्रीय निगम भारत को विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रहे हैं, विशेष रूप से उच्च तकनीक उद्योगों में।
हालांकि, भारत की प्रगति धीमी रही है, विनियामक बाधाओं, उच्च लागतों और रसद अक्षमताओं से प्रक्रिया प्रभावित रही है। इसके अतिरिक्त, भारत को चीन की ओर से अपने बाजार में माल डंप करने के जोखिम से सावधान रहना चाहिए, जो घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों को दूर करना होगा, और चीन की ओर से भारतीय बाजारों में अपने उत्पादों को डंप करने से सावधान रहना होगा। दूसरी ओर, भारत को चीन से अपने विनिर्माण ठिकानों को स्थानांतरित करने की इच्छुक कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में देखा जाता है।"
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति शृंखला को और अधिक विखंडित कर दिया है। अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर सख्त निर्यात नियंत्रण और उच्च शुल्क लगाए हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और कंपनियों को चीनी विनिर्माण के विकल्प तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है। यह स्थिति अवसर पैदा करती है, पर भारत के लिए बदलती गतिशीलता को नेविगेट करने के लिए चुनौतियां पेश करती है।
नीति आयोग ने कहा किचीन प्लस वन रणनीति का अधिकतम लाभ उठाने के लिए भारत को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार करने, अपनी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और वैश्विक व्यापार समझौतों में सक्रिय रूप से शामिल होने की जरूरत है।