5जी सेवाओं को शुरू करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त स्पेक्ट्रमः रविशंकर प्रसाद
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देश में 5जी सेवाओं को शुरू करने के लिए सरकार के पास नीलामी के पर्याप्त स्पेक्ट्रम है। इसलिए कंपनियों को इसे लेने के लिए किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं सरकार ने इस सेवा को शुरू करने के लिए 2020 का लक्ष्य तय किया है।
इतने स्पेक्ट्रम की होगी नीलामी
प्रसाद ने कहा कि सरकार ने नीलामी के लिए 3300-3400 मेगाहर्ट्ज और 3425-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड के बीच 275 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को रखा है। 5जी में टाटा को 10 गीगाबिट प्रति सेकेंड की रफ्तार से ट्रांसफर करने की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ मामलों में यह रफ्तार 20 गीगाबिट प्रति सेकेंड भी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि निचली डाटा स्पीड के मामले में लगभग 320 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता है, जबकि उच्च डाटा स्पीड के मामले में 670 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी।
एरिक्सन ने अपने वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 5जी कनेक्शन 2022 से उपलब्ध होने की संभावना है। ट्राई के आकलन के आधार पर 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300-3400 मेगाहर्ट्ज, 3400-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड अभी तक अनबिके स्पेक्ट्रम का मूल्य 1 अगस्त 2018 के मुताबिक 4.9 लाख करोड़ रुपये है।
सीओएआई ने उठाया था सवाल
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन एस मैथ्यू ने मंगलवार को कहा, 'हम 5जी को कम से कम पांच साल के लिए टालने जा रहे हैं। देश के ऑपरेटरों का यही नजरिया है। शुरुआत में प्राइसिंग की दिक्कत थी। फिर बाद में अन्य समस्याएं भी आ गईं।
सीओएआई देश की सभी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों भारतीय एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया का प्रतिनिधत्व करती है। उन्होंने कहा कि प्राइसिंग इस इंडस्ट्री के लिए शुरुआती समस्या के रूप में सामने आई। 1 मेगाहर्ट्ज की कीमत 492 करोड़ है।