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भारत में सात लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता, नोटबंदी-जीएसटी का दिखेगा असर: रिपोर्ट
Sat, 04 Jan 2020 11:38 AM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Sat, 04 Jan 2020 11:38 AM IST
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- फोटो : PTI
भारत में 2030 तक करीब सात लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है। वर्तमान में इसका आकार तीन लाख करोड़ डॉलर है। डॉयचे बैंक ने एक शोध रिपोर्ट ‘इमैजिन-2030’ में कहा कि अगले 10 साल में 2.5 गुना की बढ़ोतरी के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि उसे अपना औसत विकास दर 10 फीसदी से अधिक रखना होगा।
बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। इसके बावजूद इसमें तेजी से विकास करने की क्षमता है। आर्थिक विकास की जहां तक बात है तो निकट भविष्य में भी इसके नीचे रहने का अनुमान है। हालांकि, सरकार की ओर से किए जा रहे सुधारों और प्रोत्साहन उपायों से अर्थव्यवस्था में खासी तेजी आएगी।
हाल ही में सरकार ने मांग में कमी की भरपाई करने के लिए साहसिक फैसला करते हुए कॉरपोरेट कर की दर में कटौती की है। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था में निजी निवेश भी बढ़ेगा, जो पिछले आठ वर्षों से कमजोर रहा है। आरबीआई के पिछले साल रेपो रेट में रिकॉर्ड 135 आधार अंकों की कटौती का भी असर दिखेगा।
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बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। इसके बावजूद इसमें तेजी से विकास करने की क्षमता है। आर्थिक विकास की जहां तक बात है तो निकट भविष्य में भी इसके नीचे रहने का अनुमान है। हालांकि, सरकार की ओर से किए जा रहे सुधारों और प्रोत्साहन उपायों से अर्थव्यवस्था में खासी तेजी आएगी।
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हाल ही में सरकार ने मांग में कमी की भरपाई करने के लिए साहसिक फैसला करते हुए कॉरपोरेट कर की दर में कटौती की है। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था में निजी निवेश भी बढ़ेगा, जो पिछले आठ वर्षों से कमजोर रहा है। आरबीआई के पिछले साल रेपो रेट में रिकॉर्ड 135 आधार अंकों की कटौती का भी असर दिखेगा।
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