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GDP: 'आठ फीसदी विकास दर के लिए बड़े राज्यों को कम करना होगा'; अर्थशास्त्री अहलूवालिया ने दिया शहरीकरण पर जोर
Thu, 13 Feb 2025 09:28 AM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 13 Feb 2025 09:28 AM IST
सार
भारत में आठ प्रतिशत की दर से विकास करने के लिए बड़े राज्यों की संख्या घटानी होगी। ये विचार अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया के हैं। उन्होंने भारत में शहरीकरण पर जोर दिया और कहा कि तेज गति से अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि कई बड़े राज्यों को दो या तीन प्रदेशों में विभाजित करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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मोंटेक सिंह अहलूवालिया (फाइल)
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत में तेज आर्थिक विकास के लिए कौन से प्रयास सबसे जरूरी हैं? इस सवाल पर तमाम अर्थशास्त्री अपने-अपने विचार साझा करते हैं। ताजा घटनाक्रम में भारतीय योजना आयोग (अब NITI Aayog) के पूर्व उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि भारत में 8% की विकास दर का लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े राज्यों को बांटना होगा। उन्होंने कहा कि नए शहरों का उभरना और शहरीकरण को बढ़ावा देना भी अहम है। उन्होंने कहा कि अगर भारत 8 फीसदी की विकास दर हासिल करेगा तो शहरी आबादी शहरों के बुनियादी ढांचे की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ेगी।
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जीडीपी में वृद्धि से अर्थशास्त्री उत्साहित
- फोटो : एएनआई
मोंटेक अहलूवालिया का विचार क्यों चर्चा में है
देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले ले चुके योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक अहलूवालिया ने कहा, 'मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि आपको कर्नाटक में क्या करना चाहिए, लेकिन यह मेरा सामान्य विचार है। हमें कई बड़े राज्यों को दो या तीन में विभाजित करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।'
देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले ले चुके योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक अहलूवालिया ने कहा, 'मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि आपको कर्नाटक में क्या करना चाहिए, लेकिन यह मेरा सामान्य विचार है। हमें कई बड़े राज्यों को दो या तीन में विभाजित करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।'
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मोंटेक सिंह अहलूवालिया, अर्थशास्त्री
- फोटो : ANI
यूपी की पूर्व सीएम मायावती का जिक्र
अहलूवालिया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र कर कहा, 'गांधीजी ने कहा था कि भारत अपने गांवों में बसता है और कई लोग अब भी इसे एक तरह का रोमांटिक दृष्टिकोण मानते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कहा था कि भारत 100 साल बाद भी ऐसा करना जारी रखेगा।' उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा नेता मायावती ने अपने राज्य को तीन भागों में विभाजित करने का सुझाव दिया था। अगर उस समय ऐसा किया गया होता, तो तीन नए अच्छे शहर बनाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति तत्काल पैदा हो गई होती।
कठिन फैसलों से ही बदलाव आता है
बकौल अहलूवालिया, ऐसा कई अन्य राज्यों में भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि विदर्भ क्षेत्र को एक अलग राज्य बनाया जाना चाहिए और नागपुर उसकी राजधानी होनी चाहिए। हालांकि, इस तरह के कठिन फैसले राजनीतिक रूप से आसान नहीं होते। इसके बावजूद बदलाव केवल दिलचस्प सुधारों से ही संभव होता है।
अहलूवालिया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र कर कहा, 'गांधीजी ने कहा था कि भारत अपने गांवों में बसता है और कई लोग अब भी इसे एक तरह का रोमांटिक दृष्टिकोण मानते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कहा था कि भारत 100 साल बाद भी ऐसा करना जारी रखेगा।' उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा नेता मायावती ने अपने राज्य को तीन भागों में विभाजित करने का सुझाव दिया था। अगर उस समय ऐसा किया गया होता, तो तीन नए अच्छे शहर बनाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति तत्काल पैदा हो गई होती।
कठिन फैसलों से ही बदलाव आता है
बकौल अहलूवालिया, ऐसा कई अन्य राज्यों में भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि विदर्भ क्षेत्र को एक अलग राज्य बनाया जाना चाहिए और नागपुर उसकी राजधानी होनी चाहिए। हालांकि, इस तरह के कठिन फैसले राजनीतिक रूप से आसान नहीं होते। इसके बावजूद बदलाव केवल दिलचस्प सुधारों से ही संभव होता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला
फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था कैसी स्थिति में है
गौरतलब है कि विगत नवंबर, 2024 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता और तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल 7 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। यह वृद्धि दर 20 देशों के समूह यानी जी-20 में सबसे तेज होगी। इस दौरान बड़े देशों की वृद्धि दर तीन फीसदी से भी नीचे रह सकती है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि अगले साल भारत 6.6 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। 2026 में यह दर 6.5 फीसदी रहने की उम्मीद जताई गई है। चालू वर्ष में 7.2 फीसदी का अनुमान है। एजेंसी का कहना है कि ठोस विकास और मध्यम महंगाई के मिश्रण के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है।
गौरतलब है कि विगत नवंबर, 2024 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता और तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल 7 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। यह वृद्धि दर 20 देशों के समूह यानी जी-20 में सबसे तेज होगी। इस दौरान बड़े देशों की वृद्धि दर तीन फीसदी से भी नीचे रह सकती है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि अगले साल भारत 6.6 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। 2026 में यह दर 6.5 फीसदी रहने की उम्मीद जताई गई है। चालू वर्ष में 7.2 फीसदी का अनुमान है। एजेंसी का कहना है कि ठोस विकास और मध्यम महंगाई के मिश्रण के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है।
भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
शहरों के विकास के लिए भारत में कैसी नीति
तमाम आर्थिक पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए अहलूवालिया का मानना है कि कुछ टियर-2 शहरों को चुनना और उन्हें "महानगरों के निकट" विकसित करना बंगलूरू जैसे अति-संतृप्त शहरों के लिए समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा, अन्य शहरों में भी इसका प्रसार होना चाहिए, लेकिन स्वाभाविक रूप से ऐसा होता नहीं है। उन्होंने कहा, भारत में ऐसा केवल तभी होता है जब कोई नया राज्य बनाया जाता है और राजधानी बनाई जाती है। अहलूवालिया ने कहा, बंगलूरू में बहुत सारी सुविधाएं हैं, लेकिन सिर्फ बहुत सारी कंपनियों के निवेश से किसी शहर को रहने लायक नहीं बना सकते। शहरी निकायों में प्रबंधन के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह सभी राज्यों के लिए सच है।
34 साल पहले हुए सुधार सरल थे, 1991 के उदारीकरण से प्रेरणा लेनी जरूरी नहीं
उन्होंने कहा कि हमें 1991 में हुए उदारीकरण वाले फैसले से प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब 34 साल पहले किए गए सुधार वास्तव में सरल थे। उस समय दुनिया एक ही भाषा बोल रही थी। भारत ने सुधार तब शुरू किए जब पूर्वी यूरोप ने साम्यवाद को समाप्त कर दिया था। उस समय केवल एक ही काम करना था, और वह था वैश्विक बाजार के साथ एकीकरण। बता दें कि तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह को उदारीकरण का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल में यह फैसला लिया था।
तमाम आर्थिक पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए अहलूवालिया का मानना है कि कुछ टियर-2 शहरों को चुनना और उन्हें "महानगरों के निकट" विकसित करना बंगलूरू जैसे अति-संतृप्त शहरों के लिए समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा, अन्य शहरों में भी इसका प्रसार होना चाहिए, लेकिन स्वाभाविक रूप से ऐसा होता नहीं है। उन्होंने कहा, भारत में ऐसा केवल तभी होता है जब कोई नया राज्य बनाया जाता है और राजधानी बनाई जाती है। अहलूवालिया ने कहा, बंगलूरू में बहुत सारी सुविधाएं हैं, लेकिन सिर्फ बहुत सारी कंपनियों के निवेश से किसी शहर को रहने लायक नहीं बना सकते। शहरी निकायों में प्रबंधन के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह सभी राज्यों के लिए सच है।
34 साल पहले हुए सुधार सरल थे, 1991 के उदारीकरण से प्रेरणा लेनी जरूरी नहीं
उन्होंने कहा कि हमें 1991 में हुए उदारीकरण वाले फैसले से प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब 34 साल पहले किए गए सुधार वास्तव में सरल थे। उस समय दुनिया एक ही भाषा बोल रही थी। भारत ने सुधार तब शुरू किए जब पूर्वी यूरोप ने साम्यवाद को समाप्त कर दिया था। उस समय केवल एक ही काम करना था, और वह था वैश्विक बाजार के साथ एकीकरण। बता दें कि तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह को उदारीकरण का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल में यह फैसला लिया था।
बजट 2025
- फोटो : amarujala.com
अमेरिका-चीन और रूस जैसे बड़े देशों में हो रहे बदलावों का भी असर होता है
वर्तमान भूराजनीतिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए अहलूवालिया ने कहा, वर्तमान माहौल में सुधार जटिव हो गए हैं क्योंकि भारत के सामने खंडित विश्व है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका न केवल कनाडा बल्कि मैक्सिको जैसे अपने सबसे करीबी सहयोगियों और चीन के साथ भी अपनी समस्याओं से जूझ रहा है। चीन और रूस करीब आ रहे हैं। रूस चीन पर निर्भर होता जा रहा है। यूरोपीय लोग रूस से बहुत डरे हुए हैं। वे चीन के बारे में इतने चिंतित नहीं हैं।
भारत में तेज गति से आर्थिक विकास की आस
तमाम आर्थिक पहलुओं को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते एक फरवरी को जो आम बजट पेश किया था, उसमें देशवासियों को 12 लाख रुपये तक की कमाई पर शून्य आयकर की सौगात मिली है। अब उपभोग बढ़ने के साथ-साथ सरकार को तेज गति से आर्थिक विकास की उम्मीदें हैं।
वर्तमान भूराजनीतिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए अहलूवालिया ने कहा, वर्तमान माहौल में सुधार जटिव हो गए हैं क्योंकि भारत के सामने खंडित विश्व है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका न केवल कनाडा बल्कि मैक्सिको जैसे अपने सबसे करीबी सहयोगियों और चीन के साथ भी अपनी समस्याओं से जूझ रहा है। चीन और रूस करीब आ रहे हैं। रूस चीन पर निर्भर होता जा रहा है। यूरोपीय लोग रूस से बहुत डरे हुए हैं। वे चीन के बारे में इतने चिंतित नहीं हैं।
भारत में तेज गति से आर्थिक विकास की आस
तमाम आर्थिक पहलुओं को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते एक फरवरी को जो आम बजट पेश किया था, उसमें देशवासियों को 12 लाख रुपये तक की कमाई पर शून्य आयकर की सौगात मिली है। अब उपभोग बढ़ने के साथ-साथ सरकार को तेज गति से आर्थिक विकास की उम्मीदें हैं।