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GDP में 8.6 फीसदी की गिरावट संभव, राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत: UBS सेक्योरिटीज
Thu, 17 Sep 2020 12:59 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 17 Sep 2020 12:59 PM IST
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अर्थव्यवस्था
- फोटो : PTI
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ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस सेक्योरिटीज ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 8.6 फीसदी गिरावट आने का अनुमान लगाया है। हालांकि, इससे पहले उसने इसमें 5.8 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताया था। वहीं 2021-22 में इसमें 10 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। यूबीएस सेक्योरिटीज ने कहा कि संकट से निपटने को लेकर सरकार के 'हल्के' कदम समेत अन्य कारकों को ध्यान में रखकर उसने जीडीपी में गिरावट के अनुमान को संशोधित किया है।
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धीरे-धीरे होगा आर्थिक पुनरुद्धार
सेक्योरिटीज ने कहा कि आर्थिक वृद्धि में गिरावट को थामने के लिए ठोस कदम के अभाव में देश में वृद्धि की संभावना दर भी घटकर 5.75 से 6.25 फीसदी पर आ गई है जबकि पूर्व में यह 7.1 फीसदी थी। ब्रोकरेज कंपनी की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा कि उच्च आवृत्ति के आंकड़े में कुछ सुधार है लेकिन इसका प्रमुख कारण गिरावट के बाद मांग में सुधार होना है और सितंबर तिमाही के बाद आर्थिक पुनरुद्धार धीरे-धीरे होगा।
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सक्रमित मामलों में वृद्धि जारी
उल्लेखनीय है कि देश के जीडीपी में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में करीब एक चौथाई की गिरावट आई है। इसका एक बड़ा कारण कोविड-19 माहामारी और उसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन लगाया जाना था। इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। देश में सक्रमित मामलों में वृद्धि जारी है और भारत अब दुनिया में दूसरा सर्वाधिक संक्रमित देश हो गया है।
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जैन ने कहा कि जो पुनरुद्धार अभी हम देख रहे हैं, वह टिकने वाला नहीं है क्योंकि संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और इसके साथ आय को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ रही है। इससे लोग खपत को कम कर रहे हैं जबकि अर्थव्यवस्था लगभग 60 फीसदी तक इस पर निर्भर है।
दूसरे दौर के प्रोत्साहन की जरूरत
उन्होंने कहा कि जो राजकोषीय प्रोत्साहन दिए गए हैं, वह केवल 1.8 फीसदी है और दूसरे दौर के प्रोत्साहन की तत्काल जरूरत है। जैन ने कहा, 'भारत को मजबूत आर्थिक सुधारों के साथ ठोस राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि सरकार को बुनियादी ढांचा विकास और निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने की जरूरत है। साथ ही गांव एवं शहरों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने के लिए पहल करने की आवश्यकता है।