GDP Growth Rate: सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी रही आर्थिक वृद्धि दर
चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 5.4 फीसदी रहा। यह बाजार के 5.9 फीसदी के अनुमान से कम है। ठीक एक साल पहले दिसंबर 2021 तिमाही में ग्रोथ रेट 0.40 फीसदी रहा था। इसके अलावा जनवरी में कोर इंडस्ट्री ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही। जनवरी में आठ कोर सेक्टर का ग्रोथ रेट 3.7 फीसदी दर्ज किया गया।
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चालू वित्त वर्ष की पिछली दो तिमाहियों में तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की गति अक्तूबर-दिबंसर में सुस्त पड़ गई। राष्टट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 5.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ी। अप्रैल-जून यानी पहली तिमाही में कम आधार प्रभाव के कारण आर्थिक वृद्धि दर 20.3 फीसदी और जुलाई-सितंबर यानी दूसरी तिमाही में 8.5 फीसदी रही थी। इस तरह, पिछले दो तिमाहियों के मुकाबले तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार धीमी रही।
एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 8.9 फीसदी की दर से आगे बढ़ सकती है। इससे पहले जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में आर्थिक वृद्धि दर 9.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। 2020-21 में कोरोना महामारी के कारण जीडीपी में 6.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। आरबीआई ने हालिया मौद्रिक नीति समिति की बैठक में 2021-22 के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर 9.2 फीसदी और 2022-23 में 7.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महामारी की तीसरी लहर के कारण आर्थिक वृद्धि में कुछ कमी आई है। इसका असर अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में वृद्धि दर पर पड़ा है।
राजकोषीय घाटा : बजट लक्ष्य का 58.9 फीसदी
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जनवरी अंत में 2021-22 के सालाना बजट लक्ष्य का 58.9 फीसदी रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2020-21 के संशोधित अनुमानों का 66.8 फीसदी था। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के सोमवार के आंकड़ों के मुताबिक, 15.91 लाख करोड़ रुपये के संशोधित वार्षिक अनुमान के मुकाबले वास्तविक घाटा जनवरी, 2022 अंत में 9,37,868 करोड़ रुपये था। राजकोषीय घाटा सरकार की कुल कमाई और कुल खर्च के बीच का अंतर होता है। इसके चालू वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है। पहले इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।
- आंकड़ों के मुताबिक, सरकार की कुल प्राप्तियां जनवरी अंत में 18.71 लाख करोड़ रुपये या 2021-22 के संशोधित अनुमान का 85.9 फीसदी थीं। यह संग्रह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2020-21 के संशोधित अनुमान का लगभग 80 फीसदी था।
- आलोच्य अवधि में कर (शुद्ध) राजस्व 15.47 लाख करोड़ या 2021-22 के संशोधित अनुमान का 87.7 फीसदी रहा। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2020-21 के संशोधित अनुमान का 82 फीसदी था।
- जनवरी अंत तक सरकार का कुल खर्च 28.09 लाख करोड़ या 2021-22 के संशोधित अनुमान का 74.5 फीसदी रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2020-21 के संशोधित अनुमान का 73 फीसदी था।
- सीजीए के मुताबिक, 2022-23 में राजकोषीय घाटा बढ़कर 16,61,196 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
औद्योगिकी श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई 5.84 फीसदी
कुछ खाद्य उत्पादों की कीमतें में तेजी से औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई की दर जनवरी, 2022 में 5.84 फीसदी रही। पिछले साल जनवरी में खुदरा महंगाई 3.15 फीसदी और दिसंबर, 2021 में 5.56 फीसदी रही थी। श्रम मंत्रालय ने कहा कि आलोच्य महीने में खाद्य महंगाई 6.22 फीसदी रही, जो दिसंबर, 2021 में 5.93 फीसदी और पिछले साल जनवरी में 2.38 फीसदी रही थी। आंकड़ों के मुताबिक, आखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू (औद्योगिकी श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) जनवरी, 2022 में 0.3 अंक घटकर 125.1 अंक रहा। पिछले साल दिसंबर में यह 125.4 अंक था।
बजट में महामारी के बाद स्थिरता पर जोर : वित्तमंत्री
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि 2022-23 के बजट में महामारी के बाद सुधार के लिए स्थिरता पर जोर दिया गया है। पिछले साल के बजट की निरंतरता को कायम रखते हुए नया बजट पेश किया गया है। एक कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य को देखते हुए सरकार ने बजट में कृषि जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी अपनाने वाले कदम उठाए हैं।
इसके अलावा, इंडिया एट 100 पहल के तहत चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्रों में डिजिटल कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया गया है। सीतारमण ने कहा कि हम पिछले बजट से एक तरह की निरंतरता का भाव इस बजट में रखना चाहते थे। पिछला बजट फॉर्मूला बनाने और सिद्धांतों के निर्धारण में काफी व्यापक था। फिर महामारी से अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए स्थिरता और सबसे बढ़कर अनुकूल कर प्रणाली देना इस बजट के निर्देशक सिद्धांत थे।
- उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और रेल मंत्रालय के संयोजन में एक बैठक बुलाई जाएगी। इसमें दक्षिणी राज्यों में उत्पादित सीमेंट को उत्तरी राज्यों तक पहुंचाने के बारे में चर्चा होगी।
- उनका यह बयान उद्योगपति और इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवासन के उस सवाल के बाद आया है, जिनमें श्रीनिवासन ने कहा कि भारत में 40 फीसदी चूना पत्थर दक्षिणी राज्यों में पाया जाता है। इसलिए सीमेंट को उत्तरी राज्यों तक न पहुंचाए जाने पर सीमेंट की किल्लत हो सकती है।
देश का राजकोषीय घाटा भी बढ़ा
इसके साथ ही लेखा महानियंत्रक (सीजीए) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 की अवधि में सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 22 के लक्ष्य का 58.9 फीसदी हो गया। रिपोर्ट में कहा गया कि जनवरी 2022 में राजकोषीय घाटा 75,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो संशोधित अनुमान का 58.9 फीसदी है।