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India Fuel Needs: हरदीप पुरी बोले- इस्राइल-ईरान टकराव के बीच भारत ईंधन आपूर्ति जरूरतें पूरी करने के लिए तैयार

Tue, 17 Jun 2025 07:30 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 17 Jun 2025 07:30 AM IST
सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इस्राइल टकराव के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि ईंधन आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। पुरी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ भारत की पेट्रोलियम आपूर्ति की समीक्षा के बाद यह बात कही।

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India Fuel Needs Hardeep Puri says India ready to meet fuel supply needs amid Israel-Iran conflict
भारत की ईंधन जरूरतों पर हरदीप पुरी का बयान - फोटो : एएनआई / अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि इस्राइल-ईरान टकराव के बीच भारत अपनी ईंधन आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। पुरी ने कहा, वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी ईंधन की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम और अच्छी स्थिति में है। हम अपने बास्केट में पर्याप्त विविधता ला चुके हैं और ईंधन आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए सहज स्थिति में हैं। भारत के बेसिनों में लगभग 42 बिलियन टन तेल और गैस के बराबर की क्षमता है।
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ईंधन कंपनियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा
अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी देते हुए हरदीप पुरी ने कहा, तेजी से अस्थिर होते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों और हमारे पीएसयू ओमसी (सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन उत्पादन / विपणन कंपनियां) के साथ भाररत में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की।
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अंडमान में अन्वेषण बन सकता है भारत का 'गुयाना मोमेंट'
पुरी ने कहा, भारत अपने जीवाश्म-आधारित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। नवीनतम प्रयास का प्रमाण अंडमान में हो रही गहरी खुदाई है। अन्वेषण और उत्पादन के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई उपाय किए हैं। अंडमान में अन्वेषण अच्छी खबर है और यह भारत के लिए 'गुयाना मोमेंट' बन सकता है।

भारत ने कभी भी आठ प्रतिशत क्षेत्र से अधिक इलाके में खोज नहीं की
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत में एक अनुमान के मुताबिक 35 लाख वर्ग किलोमीटर की तलछटी बेसिन (sedimentary basins) है। ये ऐसे इलाके होते हैं जहां झीलों, नदियों आदि के तल पर जमा रेत, पत्थर, कीचड़ के नीचे कच्चे तेल या गैस मिलने की संभावना होती है। पुरी के मुताबिक भारत ने कभी भी आठ प्रतिशत क्षेत्र से आगे अन्वेषण नहीं किया। इससे समुद्र तल का एक बड़ा हिस्सा ऐसा रह गया है जहां खोज नहीं की गई है।

सरकार ने 10 लाख वर्ग किलोमीटर तलछटी बेसिनों में अन्वेषण का रास्ता साफ किया
अब सरकार ने बेसिन के बड़े हिस्से में अन्वेषण का फैसला लिया है। पहले जिन इलाकों में प्रतिबंध थे, अब ऐसे 10 लाख वर्ग किलोमीटर तलछटी बेसिनों में अन्वेषण कराया जा सकता है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति के नौ दौर हो चुके हैं। इसमें 38 फीसदी बोलियां 10 लाख वर्ग किलोमीटर के लिए आई हैं। सरकार को उम्मीद है कि 75 फीसदी से अधिक बोलियां आएंगी। लगभग 2.5 वर्ग लाख किलोमीटर क्षेत्र के लिए बोली लगाई जा सकती है।

India Fuel Needs Hardeep Puri says India ready to meet fuel supply needs amid Israel-Iran conflict
हरदीप पुरी ने भारत की ईंधन जरूरतों की समीक्षा के लिए बुलाई बैठक - फोटो : एएनआई
ईरान-इस्राइल संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल की आशंका
बता दें कि पश्चिम एशिया में इस्राइल और ईरान के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण भारत समेत पूरी दुनिया में ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है। टकराव से न सिर्फ भारत के निर्यात समेत वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है, बल्कि हवाई और समुद्री माल ढुलाई दरों के साथ बीमा शुल्क में भी बढ़ोतरी का भी जोखिम है। निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध के कारण यूरोप और रूस जैसे देशों को भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है। 

ये भी पढ़ें- Crude Oil Price: पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारतीय तेल और गैस कंपनियों पर बढ़ा दबाव

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कच्चा तेल आयात के बिल में आई कमी - फोटो : पीटीआई

व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी
अगर युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एवं लाल सागर जैसे मार्गों के जरिये व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी।फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, वैश्विक व्यापार की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही थी, जो ईरान-इस्राइल तनाव बढ़ने से फिर से प्रभावित होगी।

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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी - फोटो : ANI

व्यापारियों को उठाना पड़ेगा बोझ
वहीं, मुंबई स्थित निर्यातक एवं टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष एसके सराफ ने कहा, मालवाहक जहाज धीरे-धीरे लाल सागर के मार्गों पर लौट आए हैं। इससे भारत और एशिया के अन्य हिस्सों से अमेरिका एवं यूरोप जाने में 15-20 दिन की बचत हो रही है। इस युद्ध के कारण मालवाहन जहाज अब फिर से लाल सागर मार्ग का इस्तेमाल करने से बचेंगे। सराफ ने आगे कहा, ईरान और इस्राइल के बीच युद्ध अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक चलत रहा, तो माल ढुलाई की लागत करीब 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी, जिसका बोझ व्यापारियों को उठाना पड़ेगा। भारत के व्यापार पर असर पड़ेगा, क्योंकि दोनों देश हमारे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार के लिए भी स्थिति काफी कठिन हो जाएगी।

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