India Fuel Needs: हरदीप पुरी बोले- इस्राइल-ईरान टकराव के बीच भारत ईंधन आपूर्ति जरूरतें पूरी करने के लिए तैयार
पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इस्राइल टकराव के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि ईंधन आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। पुरी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ भारत की पेट्रोलियम आपूर्ति की समीक्षा के बाद यह बात कही।
विस्तार
ईंधन कंपनियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा
अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी देते हुए हरदीप पुरी ने कहा, तेजी से अस्थिर होते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों और हमारे पीएसयू ओमसी (सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन उत्पादन / विपणन कंपनियां) के साथ भाररत में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की।
As oil is on the boil, all eyes are on the ball…
In the increasingly volatile geopolitical situation, reviewed the petroleum products supply situation with @PetroleumMin officials and our PSU OMCs. Under the visionary leadership of PM @narendramodi Ji, we have diversified our… pic.twitter.com/J58LSEC2cVविज्ञापन विज्ञापन— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) June 16, 2025
अंडमान में अन्वेषण बन सकता है भारत का 'गुयाना मोमेंट'
पुरी ने कहा, भारत अपने जीवाश्म-आधारित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। नवीनतम प्रयास का प्रमाण अंडमान में हो रही गहरी खुदाई है। अन्वेषण और उत्पादन के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई उपाय किए हैं। अंडमान में अन्वेषण अच्छी खबर है और यह भारत के लिए 'गुयाना मोमेंट' बन सकता है।
भारत ने कभी भी आठ प्रतिशत क्षेत्र से अधिक इलाके में खोज नहीं की
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत में एक अनुमान के मुताबिक 35 लाख वर्ग किलोमीटर की तलछटी बेसिन (sedimentary basins) है। ये ऐसे इलाके होते हैं जहां झीलों, नदियों आदि के तल पर जमा रेत, पत्थर, कीचड़ के नीचे कच्चे तेल या गैस मिलने की संभावना होती है। पुरी के मुताबिक भारत ने कभी भी आठ प्रतिशत क्षेत्र से आगे अन्वेषण नहीं किया। इससे समुद्र तल का एक बड़ा हिस्सा ऐसा रह गया है जहां खोज नहीं की गई है।
सरकार ने 10 लाख वर्ग किलोमीटर तलछटी बेसिनों में अन्वेषण का रास्ता साफ किया
अब सरकार ने बेसिन के बड़े हिस्से में अन्वेषण का फैसला लिया है। पहले जिन इलाकों में प्रतिबंध थे, अब ऐसे 10 लाख वर्ग किलोमीटर तलछटी बेसिनों में अन्वेषण कराया जा सकता है। खुली एकड़ लाइसेंसिंग नीति के नौ दौर हो चुके हैं। इसमें 38 फीसदी बोलियां 10 लाख वर्ग किलोमीटर के लिए आई हैं। सरकार को उम्मीद है कि 75 फीसदी से अधिक बोलियां आएंगी। लगभग 2.5 वर्ग लाख किलोमीटर क्षेत्र के लिए बोली लगाई जा सकती है।
बता दें कि पश्चिम एशिया में इस्राइल और ईरान के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण भारत समेत पूरी दुनिया में ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है। टकराव से न सिर्फ भारत के निर्यात समेत वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है, बल्कि हवाई और समुद्री माल ढुलाई दरों के साथ बीमा शुल्क में भी बढ़ोतरी का भी जोखिम है। निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध के कारण यूरोप और रूस जैसे देशों को भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
ये भी पढ़ें- Crude Oil Price: पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारतीय तेल और गैस कंपनियों पर बढ़ा दबाव
व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी
अगर युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एवं लाल सागर जैसे मार्गों के जरिये व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी।फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, वैश्विक व्यापार की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही थी, जो ईरान-इस्राइल तनाव बढ़ने से फिर से प्रभावित होगी।
व्यापारियों को उठाना पड़ेगा बोझ
वहीं, मुंबई स्थित निर्यातक एवं टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष एसके सराफ ने कहा, मालवाहक जहाज धीरे-धीरे लाल सागर के मार्गों पर लौट आए हैं। इससे भारत और एशिया के अन्य हिस्सों से अमेरिका एवं यूरोप जाने में 15-20 दिन की बचत हो रही है। इस युद्ध के कारण मालवाहन जहाज अब फिर से लाल सागर मार्ग का इस्तेमाल करने से बचेंगे। सराफ ने आगे कहा, ईरान और इस्राइल के बीच युद्ध अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक चलत रहा, तो माल ढुलाई की लागत करीब 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी, जिसका बोझ व्यापारियों को उठाना पड़ेगा। भारत के व्यापार पर असर पड़ेगा, क्योंकि दोनों देश हमारे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार के लिए भी स्थिति काफी कठिन हो जाएगी।
संबंधित वीडियो